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क्या एमपी में दोहराया जाएगा साल 2020 का इतिहास

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो चुका है और अब हर किसी को इंतज़ार है तो बस वोट की गिनती का। 3 दिसंबर को वोट की गिनती की जाएगी जिससे पता चलेगा कि एमपी में किसकी सरकार बनने वाली है। सभी राजनैतिक दलों के प्रत्याशियों और बड़े नेताओं कि धड़कने बड़ी हुई है । इसी बीच पीसीसी चीफ कमलनाथ भी परेशान हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री के चिंता की बजह केवल वोटों की गिनती नहीं है बल्कि अपने खुदके विधायक भी हैं। जिस प्रकार से साल 2020 में कांग्रेसी विधायकों ने पार्टी को दगा दे दिया था कहीं इस बार भी ऐसा ही ना हो। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने इस डर के कारण आज अपने सभा 230 विधायकों की एक मीटिंग बुलाई है जिसमें विधायकों को वोटों की गिनती की ट्रेनिंग दी जाएगी साथ ही प्रत्याशियों से शपथ भी दिलवाई जाएगी और उन्हें अपनी पार्टी के साथ होने का अपील भी कर सकते हैं। एमपी कांग्रेस के नेताओं से प्रत्याशियों पर कड़ी नज़र गढ़ाई रखी है।

कांग्रेसी नेताओं ने जिला प्रभारियों को जिम्मेदारी सौंपी है । जिला प्रभारी इन दिनों अपने अपने जिलों में डेरा डाल सकते हैं और प्रत्याशियों को हर हरकत पर नज़र रख सकते हैं। खास कर के ऐसे प्रत्याशी जिनकी जीत की सम्भावना ज्यादा है। बतादें कि साल 2018 में में कांग्रेस पार्टी 114 वोटों से जीती थी पर साल 2020 में पार्टी के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायकों ने भी इस्तिफा दे दिया था। इसी कारण से कांग्रेस पार्टी की महज़ 15 महीनों में ही सरकार गिर गई थी और अब एक बार कमलनाथ यह गलती नहीं दोहराना चाहते जिसके कारण उन्होंने पूरा बंदोबस्त कर रखा है।

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