Highlights
- महाकाल मंदिर गर्भगृह में सभी को प्रवेश देने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
- हाईकोर्ट का फैसला बरकरार, गर्भगृह में प्रवेश का अधिकार कलेक्टर के पास
- कोर्ट ने कहा – मंदिर की व्यवस्था तय करना न्यायालय का काम नहीं
Ujjain VIP Darshan: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में सभी श्रद्धालुओं को प्रवेश देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया और याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा, इसका फैसला उज्जैन कलेक्टर ही करेंगे।
क्या थी याचिका
इंदौर के अधिवक्ता चर्चित शास्त्री और दर्पण अवस्थी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जा रहा, जबकि नेता और वीआईपी आसानी से अंदर जाकर पूजा कर रहे हैं। इसे समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया गया था।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मंदिर में किसे प्रवेश देना है, यह तय करना कोर्ट का काम नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं में न्यायालय दखल नहीं देगा और यह निर्णय प्रशासन पर ही छोड़ा जाना चाहिए।
कलेक्टर को अधिकार
इससे पहले हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि गर्भगृह में प्रवेश का अधिकार उज्जैन कलेक्टर के पास रहेगा। यदि किसी दिन किसी व्यक्ति को अनुमति दी जाती है, तो उसी आधार पर उसे वीआईपी माना जाएगा।
ढाई साल से बंद गर्भगृह
महाकाल मंदिर का गर्भगृह 4 जुलाई 2023 से आम श्रद्धालुओं के लिए बंद है। सावन माह और बढ़ती भीड़ के कारण यह फैसला लिया गया था। महाकाल लोक बनने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ गई है।
जनप्रतिनिधियों की मांग
उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया और महापौर ने भी आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में दर्शन देने की मांग उठाई है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गर्भगृह में प्रवेश को लेकर स्थिति यथावत बनी रहेगी।
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