Highlights
- बसंत पंचमी पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में विशेष पूजा, पंचामृत अभिषेक और सरसों के फूलों से दिव्य श्रृंगार।
- महाकाल मंदिर के आंगन से होली पर्व की परंपरागत शुरुआत, संध्या आरती में गुलाल अर्पित।
- आज से होली तक प्रतिदिन गुलाल अर्पण की परंपरा।
Ujjain Mahakaal Basant Panchmi: बसंत पंचमी के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन हुए। शुक्रवार तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही भगवान महाकाल की भस्म आरती के साथ पर्व की शुरुआत हुई। इसी दिन से महाकाल मंदिर से होली पर्व की परंपरागत शुरुआत भी मानी जाती है।
पंचामृत से अभिषेक
सुबह भगवान महाकाल को जल स्नान के बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके साथ ही केसर युक्त पंचामृत अर्पित किया गया। भगवान को पीले रंग के पकवानों का भोग लगाया गया।
सरसों के फूलों से विशेष श्रृंगार
बसंत पंचमी पर बाबा महाकाल का वर्ष में एक बार होने वाला विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान को सरसों के पीले फूलों, पत्तियों और सूखे मेवों से सजाया गया। राजा स्वरूप में भगवान का श्रृंगार किया गया, जिसमें रजत मुकुट, रुद्राक्ष माला, रजत मुंडमाला और रत्नजड़ित तिलक शामिल रहा।
पीले रंग से सजा मंदिर
पूरे मंदिर परिसर में बसंती माहौल देखने को मिला। पांचों आरतियों में भगवान को विशेष वासंती पोशाक धारण कराई गई। मां सरस्वती की भी संयुक्त रूप से आराधना की गई।
संध्या आरती में गुलाल अर्पण
पुजारियों के अनुसार सुबह सरसों के फूल और शाम को संध्या आरती में भगवान को गुलाल अर्पित किया जाएगा। आज से होली तक प्रतिदिन भगवान को गुलाल चढ़ाया जाएगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।
दर्शन का विशेष महत्व
पुजारियों ने बताया कि बसंत पंचमी पर महाकाल के दर्शन से शक्ति और बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस अद्भुत दर्शन के लिए भक्त साल भर प्रतीक्षा करते हैं।