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ये हैं मध्य प्रदेश के 10 सबसे प्रसिद्ध मंदिर …

मध्य प्रदेश पौराणिक समय से ही आस्था का केंद्र रहा है । प्रदेश की भूमि पर ऐसे कई चामत्कारिक मंदिर है जो अपने दिव्य अनुभव ,पौराणिक कथा और मंदिर की बनावट के कारण काफी प्रसिद्ध है । आज हम आपको मध्यप्रदेश के ऐसे ही 10 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे मे बताएंगे ,जहाँ जाकर आप भी दिव्य अनुभव कर सकते है साथ ही वहाँ होने वाले चमत्कारों को भी देख सकते हैं ।


1 चौसठ योगिनी मंदिर – माँ नर्मदा की गोद में बसे मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में कई ऐसे मंदिर हैं जिनके इतिहास की गणना करना बहुत कठिन है। इनमें से कई मंदिर दूर-दराज के इलाकों में स्थित हैं। ऐसा ही एक मंदिर नर्मदा से थोड़ी दूर पर लगभग 70 फुट ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। विश्व प्रसिद्ध भेड़ाघाट के नजदीक स्थित चौसठ योगिनी मंदिर सभवतः भारत का इकलौता मंदिर है, जहाँ भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की प्रतिमा स्थापित है। कहा जाता है कि इस मंदिर के लिए नर्मदा ने भी अपनी दिशा बदल दी थी। हालाँकि देश के कई अन्य मंदिरों की तरह यह भी औरंगजेब के इस्लामिक कट्टरपंथ की भेंट चढ़ा, लेकिन वह मंदिर के गर्भगृह में स्थापित प्रतिमा का कोई नुकसान नहीं कर पाया।


2.ओंकारेश्वर मंदिर – भगवान शिव से जुड़े द्वादश ज्योतिर्लिंगों में मध्य प्रदेश स्थित ओंकारेश्वर का चौथा स्थान आता है. यहां पर भगवान शिव नर्मदा नदी के किनारे ॐ के आकार वाली पहाड़ पर विराजमान हैं. हिंदू धर्म में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिग को लेकर कई मान्यताएं हैं. जिसमें सबसे बड़ी मान्यता ये है कि भगवान भोलेनाथ तीनों लोक का भ्रमण करके प्रतिदिन इसी मंदिर में रात को सोने के लिए आते हैं. महादेव के इस चमत्कारी और रहस्यमयी ज्योतिर्लिंग को लेकर यह भी मानना है कि इस पावन तीर्थ पर जल चढ़ाए बगैर व्यक्ति की सारी तीर्थ यात्राएं अधूरी मानी जाती है.


3.वैजनाथ मंदिर – ये मंदिर आगर मालवा के सुसनेर रोड (उज्जैन-कोटा रोड राष्ट्रिय राजमार्ग 27) पर स्थित है. मंदिर बाणगंगा नदी के तट पर बना हुआ है और उसका निर्माण कार्य 1528 में शुरु और 1536 में पूर्ण हुआ. अंग्रेज़ दंपत्ति ने 1883 में मंदिर का पुनर्निमाण करवाया. ये बेहद आश्चर्यजनक बात है कि एक अंग्रेज़ दंपत्ति ने आख़िर एक मंदिर को क्यों बनवाया, जबकि वे ईसाई धर्म का पालन करते हैं.

4.पीताम्बर मंदिर – मध्यप्रदेश के दतिया जिले में स्थित मां पीतांबरा सिद्धपीठ है। इसकी स्था.पना 1935 में की गई थी। यहां मां के दर्शन के लिए कोई दरबार नहीं सजाया जाता बल्कि एक छोटी सी खिड़की है, जिससे मां के दर्शन का सौभाग्य मिलता है। यूं तो हर समय ही यहां भक्तोंी का मेला सा लगा रहता है लेकिन नवरात्र में मां की पूजा का विशेष फल प्राप्तय होता है। कहा जाता है कि पीले वस्त्र धारण करके, मां को पीले वस्त्रश और पीला भोग अर्पण करने से भक्तज की हर मुराद यहां पूरी होती है।

5. महाकालेश्वर मंदिर –भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों को दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग के दर्शन होते हैं। महाकालेश्वर मंदिर मुख्य रूप से तीन हिस्सों में विभाजित है। इसके ऊपरी हिस्से में नाग चंद्रेश्वर मंदिर है, नीचे ओंकारेश्वर मंदिर और सबसे नीचे जाकर आपको महाकाल मुख्य ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजित नजर आते हैं। जहां आपको भगवान शिव के साथ ही गणेशजी, कार्तिकेय और माता पार्वती की मूर्तियों के भी दर्शन होते हैं। इसके साथ ही यहां एक कुंड भी है जिसमें स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं।

6. ओरछा रामराजा मंदिर – ओरछा के इस मंदिर को लेकर कई कहानियां प्रचलित है. इनमें से एक कहानी ये है कि एक बार भगवान राम ने ओरछा के राजा मधुकरशाह को सपना में दर्शन दिए थे. जिसके बाद वो राजा भगवान श्रीराम के आदेश पर अयोध्या से उनकी प्रतिमा लाए थे. वहीं राजा ने मूर्ति को मंदिर में स्थापित करने से पहले एक जगह पर रखा था और जब प्राण-प्रतिष्ठा के वक्त मूर्ति को वहां से हटाया जाने लगा तो वो ऐसा नहीं कर पाए, तभी राजा को गवान का निर्देश याद आया कि वो जिस स्थान पर विराजमान हो जाएंगे वहां से हटाए नहीं जाएंगे. यही वजह है कि रामलला सरकार महल में विराजे हैं ये देश का एकमात्र मंदिर है जहां भगवान राम राजा के रूप में पूजे जाते हैं. इसके अलावा एमपी पुलिस सुबह और शाम यहां पर बंदूकों से सलामी देती है. यही वजह है कि इस मंदिर में दूर-दूर से भक्त भगवान राम का सम्मान देखने भक्त आते हैं।

7. सास बहु मंदिर – ग्वालियर स्थित सास-बहू मंदिर, दो मंदिरों का एक समूह, एक वास्तुशिल्प रत्न है और मान मंदिर पैलेस के दक्षिण में स्थित है। मूल रूप से शाहस्त्र बाहु मंदिर के रूप में जाना जाने वाला यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसे 11वीं शताब्दी की शुरुआत में कछवाहा राजा महिपाल ने बनवाया था। यह संभवतः किला परिसर का सबसे प्राचीन मंदिर है। सहस्त्रबाहु मंदिर या सास बहू मंदिर, , जो मूर्तिकला स्तंभों और नक्काशीदार पायलटों की भूलभुलैया की प्रचुरता के लिए उल्लेखनीय है जो बहन संरचनाओं के बड़े हिस्से को सजाते हैं। सास बहू मंदिर के बड़े हिस्से पर एक लंबा संस्कृत शिलालेख है, जिसमें कहा गया है कि इसे 1098 ईस्वी में ग्वालियर के एक राजपूत राजकुमार द्वारा पूरा किया गया था। इन मंदिरों को भारत के खूबसूरत स्मारकों में शुमार किया जाता है। यह एक वास्तुशिल्प चमत्कार है, जिसके स्तंभों को मूर्तियों और दीवार की आकृतियों से सजाया गया है।

8. मतंगेश्वर मंदिर – खजराहु का मतंगेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी बाबू लाल गौतम बताते हैं कि यहां शिवलिंग 9 फीट जमीन के अंदर और उतना ही बाहर भी है. मान्यता है कि मंदिर में मौजूद इस शिवलिंग की हर साल शरद पूर्णिमा के दिन एक इंच लंबाई बढ़ती है. प्रति वर्ष कार्तिक माह की शरद पूर्णिमा के दिन शिवलिंग की लंबाई एक तिल के आकार के बराबर बढ़ती है. शिवलिंग की लंबाई नापने के लिए पर्यटन विभाग के कर्मचारी बकायदा मेजरमेंट टेप का उपयोग करते हैं. चमत्कारिक रूप से शिवलिंग पहले की तुलना में लंबा मिलता है.

9. भरत मिलाप मंदिर -भरत मिलाप मंदिर कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर स्थित है। आप जब पहाड़ की परिक्रमा करते हैं, तब आप इस मंदिर को देख सकते हैं। आप इस मंदिर में आते हैं, तो आपको यहां पर चट्टान दिखाई देती है, जिस पर राम जी और भरतजी चरण चिन्ह उभरे है। अब इन चटटानों के संरक्षण के लिए इन्हे अच्छी तरह पक्का बना दिया गया है। दीवार पर आपको श्लोक लिखे हुए देखने मिलते है। यहां पर एक चट्टान और है, जिसमें शत्रुघ्न और लक्ष्मण जी के चरण चिन्ह आपको देखने मिलते हैं। इन चट्टानों के पास मूर्तियों के द्वारा राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के मिलन को दर्शाया गया है। यहां पर राम भगवान जी के खड़ाऊ को भरत जी ने अपने सिर पर रखा हुआ है, इस दृश्य को भी मूर्ति के द्वारा दिखाया गया है।

10. लक्ष्मी मंदिर –लक्ष्मण मंदिर खजुराहो का एक प्रमुख मंदिर है। यह मंदिर पश्चिमी मंदिर समूह में स्थित है। लक्ष्मण मंदिर खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह में स्थित सबसे खूबसूरत मंदिरों में से एक है। लक्ष्मण मंदिर की दीवारों में आपको नक्काशी देखने के लिए मिलती है, जो अद्भुत है। इस मंदिर के चारों कोने में छोटे-छोटे मंदिर बनाए गए हैं, जिन्हें उप मंदिर कहते हैं। मंदिर के गर्भ गृह में भगवान विष्णु की वैकुंड रूप की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। इस मूर्ति में तीन रूप देखने के लिए मिलते हैं भगवान नरसिंह, वराह और विष्णु भगवान। ऐसी प्रतिमा आपको और कहीं देखने के लिए नहीं मिलेगी। लक्ष्मण मंदिर में बहुत सारी कथाएं एवं प्राचीन जीवन का मूर्तियों के माध्यम से बताने के प्रयास किया गया है।

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