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दुनिया में एैसी भी जगहें है, जहा की जाती है, रावण की पूजा

आज के दिन लोग रावण को जला कर बुराई पे अच्छाई की जीत हासिल करते है, वही दुनिया में कुछ एैसी भी जगहें है, जहां रावण की पूजा की जाती है. मध्यप्रदेश के विदिशा जिलें में एक एैसा ही गांव है जहां रावण दहन नही रावण की पूजा की जाती है. इस गावं का नाम ‘रावण गांव’ है. यहा लोग रावण को दशहरे के दिन जलाने के बजाय रावन की पूजा-अर्चना करते हैं.

जब ‘रावण गांव’ के लोगों से बात किया गया तो वहा के लोगों ने बताया कि, हम भी दशहरा धुम धाम से मनाते है, पूजा करते है और भंडारा भी करते है. लेकिन हम रावण दहन नही करते है, रावण हमारे कुल देवता है. हम सब रावण बाबा को अपना गावंवासी मानते है. कोई भी नया काम या नई गाड़ियां लेते है तो सबसे पहले हम रावण बाबा की पूजा करते है.

हमारी गाड़ियों पर जय लंकेश लिखा मिलेगा. जब तक हम अपनी गाड़ी पर ‘जय लंकेश’ नही लिखते है तब तक उसे चलाते नही है. ट्रैक्टर-ट्रॉली, जीप, मोटरसाइकिल, साइकिल छोटा हो या बड़ा हमारे सारे वाहनों पर ‘जय लंकेश’ लिखा मिलेगा. हम रावण को रावण बाबा बोलते है.

एैसे बना रावण का मंदिर

रावण गावं के पूजारी का कहना है कि गाव से 3 किमी दूर एक पहाड़ी है. जहां पर बुध्द नामक एक राक्षस रेहता था, जो रावण से युध्द करना चाहता था. लेकिन जब वह युध्द करने कि इच्छा लेकर लंका जाता था, तो लंका की खुबशूरती देखते ही मोहित हो जाता और उसकी युध्द की इच्छा मर जाती थी.

एक दिन लंकेश ने उसे बुलाया और पुछा तुम रोज दरबार में आते हो और बिना कुछ बताए चले जाते हो. आखिर बात क्या है. तब बुध्द राक्षस ने लंकेश से बताया कि मैं प्रतिदिन दरबार में आपसे युध्द करने की इच्छा लेकर आता हु, लेकिन मैं जब लंका और आपको देखता हुं तो मेरी इच्छा और मेरा क्रोध शांत हो जाता है.

तब लंकेश ने दुध्द राक्षस से बोला तुम जहा रेहते हो वहा मेरी एक प्रतिमा बना लो और उसी से युध्द करना. तब से यह प्रतिमा यहा बनी है. लोगों ने बाद में उसे मंदिर बना दिया, और अभी तक उसकी पूजा करते है.

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