Highlights
- सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में लड़कियों के लिए मुफ्त सैनेटरी पैड और अलग शौचालय का आदेश दिया।
- आदेश में सभी सरकारी और निजी स्कूलों को तीन महीने में नियम लागू करने के निर्देश।
- प्राइवेट स्कूल फेल होने पर मान्यता रद्द की जा सकती है।
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में लड़कियों के लिए मुफ्त सैनेटरी पैड और अलग शौचालय की सुविधा देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। कोर्ट ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों से तीन महीने के भीतर इस आदेश का पालन करने को कहा है।
आदेश के मुख्य बिंदु
- सभी स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग शौचालय और पानी की सुविधा सुनिश्चित हो।
- सभी नए स्कूलों में गोपनीयता और दिव्यांग छात्रों के अधिकारों का ध्यान रखा जाए।
- स्कूलों में बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएं।
- मासिक धर्म आपातकालीन स्थिति के लिए अतिरिक्त यूनिफॉर्म और जरूरी सामग्री रखने के लिए स्वच्छता केंद्र बनाए जाएं।
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प्राइवेट स्कूलों को चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर प्राइवेट स्कूल लड़कियों के लिए अलग शौचालय और मुफ्त सैनेटरी पैड नहीं देंगे, तो उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है।
समाज और माता-पिता के लिए संदेश
कोर्ट ने कहा कि यह आदेश सिर्फ स्कूल या शिक्षकों के लिए नहीं है, बल्कि माता-पिता और समाज के हर वर्ग के लिए है। अदालत ने जोर देकर कहा कि यह कदम लड़कियों को शिक्षा में पीछे न रहने देने और मासिक धर्म से जुड़े स्वास्थ्य अधिकारों की सुरक्षा के लिए है।
वरिष्ठ न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए यह आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है और इसे लागू करना हर स्कूल की जिम्मेदारी है।
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