Highlights
- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले में प्रशासन के नोटिस का विरोध किया।
- उन्होंने कहा: शंकराचार्य कौन होगा, यह केवल अन्य शंकराचार्य तय कर सकते हैं, राष्ट्रपति या प्रशासन नहीं।
- ज्योतिषपीठ शंकराचार्य का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित, लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर में खुद को शंकराचार्य लिखा।
Shankaracharya Controversy: प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मेला प्रशासन ने नोटिस भेजा और पूछा कि वे खुद को ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य कैसे बता रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य का फैसला तब तक नहीं हो सकता जब तक मामला अदालत में लंबित है।
अविमुक्तेश्वरानंद ने नोटिस पर दी प्रतिक्रिया
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नोटिस को अवैध बताया और कहा कि शंकराचार्य कौन होगा, यह केवल अन्य शंकराचार्य तय कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति या मेला प्रशासन के पास यह अधिकार नहीं है। अविमुक्तेश्वरानंद तीन दिन से धरने पर हैं और प्रशासन से माफी मांगने तक आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे।
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पुरी के दूसरे शंकराचार्य पर उठाया सवाल
उन्होंने मेला प्रशासन से पूछा कि पुरी के दूसरे शंकराचार्य का शिविर क्यों लगता है, जबकि वे इसे असली शंकराचार्य मानते हैं। उनका कहना है कि पुरी के शंकराचार्य ने उनके बारे में कोई विरोधाभासी बयान नहीं दिया और वे निर्विवाद रूप से ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य हैं।
सपा अध्यक्ष का बयान
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लिखा कि प्रशासन का यह व्यवहार “घोर निंदनीय” है और नोटिस देने वाले पहले खुद प्रमाण पत्र दें। उन्होंने भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति का आरोप लगाया।
सुप्रीम कोर्ट का मामला
ज्योतिषपीठ में शंकराचार्य पद का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2022 के आदेश में किसी को भी शंकराचार्य घोषित करने या पट्टाभिषेक करने से रोक लगाई है।
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