Highlight
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कुत्ते इंसानी डर पहचानते हैं, इसलिए काटते हैं; हर कुत्ते को हटाने का आदेश नहीं।
- वकीलों ने बताया कि देश में केवल 5 सरकारी शेल्टर हैं; पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और आंकड़े जरूरी।
- सुनवाई में जज बोले “बिल्लियां चूहों की दुश्मन हैं, उनकी संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।”
SC Stray Dog Case: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आवारा कुत्तों के मामले पर लगातार दूसरे दिन सुनवाई की। जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते इंसानों का डर पहचानते हैं इसलिए काटते हैं। वकील ने इनकार किया, लेकिन न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यह उनके व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है।
शेल्टर की कमी और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत
याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि देश में सिर्फ 5 सरकारी शेल्टर हैं, हर शेल्टर में 100 कुत्ते ही रखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सड़कों से कुत्तों को हटाने के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है।
कुत्तों को हटाने पर चिंता
एनिमल वेलफेयर की ओर से सीयू सिंह ने तर्क दिया कि कुत्तों को हटाने से चूहों और बंदरों की संख्या बढ़ सकती है। कोर्ट ने कहा, “तो क्या बिल्लियों को बढ़ाना चाहिए?” और यह स्पष्ट किया कि हर कुत्ते को हटाने का आदेश नहीं है।
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रोकथाम ही बेहतर उपाय
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सभी कुत्तों को पकड़ना संभव नहीं है और आर्थिक रूप से भी मंहगा होगा। कोर्ट ने कहा कि रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर है।
सरकार के पास नहीं हैं आंकड़े
ध्रुव मेहता ने बताया कि सरकार के पास आवारा कुत्तों और डॉग बाइट के सही आंकड़े नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बीमार और स्वस्थ कुत्तों को एक साथ रखने से नई समस्याएं हो सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सभी पक्षों को सुझाव रखने का मौका मिलेगा ताकि समाधान निकाला जा सके।
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