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3 दिन से धरने पर बैठे अविमुक्तेश्वरानंद को मेला प्रशासन का नोटिस, 24 घंटे में शंकराचार्य होने का दें प्रमाण… 

Prayagraj Magh Mela

Highlights

  • प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 24 घंटे में शंकराचार्य साबित करने का नोटिस
  • तीन दिन से धरने पर बैठे हैं शंकराचार्य, प्रशासन से माफी की मांग
  • मौनी अमावस्या पर पालकी रोकने के विवाद के बाद प्रशासन और शंकराचार्य में टकराव

Prayagraj Magh Mela: प्रयागराज माघ मेला में मौनी अमावस्या पर रथ रोकने के विरोध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले तीन दिनों से धरने पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगेगा, वह अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे और फुटपाथ पर रहेंगे।

नोटिस में 24 घंटे में जवाब तलब

माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर 24 घंटे में साबित करने को कहा है कि वे असली शंकराचार्य हैं। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि कोर्ट के अंतिम फैसले तक किसी को भी शंकराचार्य घोषित नहीं किया जा सकता।

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अविमुक्तेश्वरानंद ने दी सफाई

बीते सोमवार को मीडिया से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने आप को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य बताते हुए कहा कि तीनों अन्य पीठों में से दो उन्हें ही शंकराचार्य मानते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले माघ मेले में वे साथ स्नान कर चुके हैं।

स्वामी ने यह भी स्पष्ट किया कि शंकराचार्य का निर्णय केवल शंकराचार्य ही कर सकते हैं, न कि राज्य के मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति। पुरी के शंकराचार्य ने उनके बारे में कोई विरोध नहीं जताया। उन्होंने आपना दावा दोहराते हुए कहा कि, “हम निर्विवाद रूप से ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य हैं, जो इस पर सवाल उठाना चाहता है, वह सामने आए और बात करे।”

मौनी अमावस्या पर हुआ विवाद

रविवार को मौनी अमावस्या पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को पुलिस ने रोक दिया था। शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया। इसके विरोध में शंकराचार्य अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।

प्रशासन और शंकराचार्य में टकराव

प्रशासन ने कहा कि स्वामी ने अपने शिविर में बोर्ड पर खुद को “ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य” लिखा, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। नोटिस में जवाब देने के साथ सुधार करने को कहा गया है।

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