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मौत का हाइवे NH 30! 5 साल में 500 मौतों का क्या है सच… क्या शापित है हाइवे

NH 30 Accidents

NH 30 Accidents: जबलपुर से छत्तीसगढ़ की चिल्फी घाटी तक फैला नेशनल हाईवे-30 (NH-30) पिछले कुछ सालों में गंभीर हादसों का केंद्र बन गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते 5 साल में इस हाईवे पर 500 से ज्यादा लोगों की जान गई है, जबकि 2000 से अधिक लोग घायल हुए हैं। यह कोई कहानी नहीं, बल्कि रोज की सच्चाई है।

ब्लैक स्पॉट्स से भरा 150 किमी का सफर

बरेला से शुरू होकर मंडला जिला और चिल्फी घाटी तक करीब 150 किलोमीटर के हिस्से में 11 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। हर मोड़ और ढलान पर खतरा बना रहता है। ड्राइवरों का कहना है कि यहां सफर करते समय हर पल डर लगा रहता है।

सबसे खतरनाक हिस्से

बरेला घाट, अंजनिया घाट और बबेहा नाला इस हाईवे के सबसे जोखिम भरे हिस्से माने जाते हैं। यहां खड़ी ढलान, संकरे रास्ते और अचानक आने वाले अंधे मोड़ हादसों की बड़ी वजह हैं।

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डिजाइन पर उठे सवाल

ड्राइवरों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि हाईवे का डिजाइन सही नहीं है। गलत ढलान और मोड़ों की वजह से कई बार ब्रेक फेल जैसी स्थिति बन जाती है। यह सड़क 2014-15 में करोड़ों रुपये की लागत से बनी थी, लेकिन सुरक्षा इंतजाम नाकाफी बताए जा रहे हैं।

स्थानीय मान्यता

कुछ लोग इसे ‘शापित हाईवे’ भी कहते हैं। मान्यता है कि निर्माण के दौरान बंजारी माता का मंदिर हटाया गया, जिससे हादसे बढ़े। लोग मंदिर की पुनर्स्थापना और हाईवे की री-इंजीनियरिंग की मांग कर रहे हैं।

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