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INDIA-EU FTA: 20 साल बाद ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर मुहर; जानिए क्या बदलेगा?

INDIA-EU FTA

Highlights

  • भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत पूरी, 20 साल बाद डील के औपचारिक ऐलान की तैयारी।
  • कपड़ा, चमड़ा, फार्मा और रत्न-आभूषण जैसे भारतीय सेक्टरों को EU बाजार में कम टैरिफ का बड़ा फायदा।
  • अमेरिका के टैरिफ दबाव के बीच भारत को EU के 27 देशों में नया और बड़ा निर्यात बाजार मिलेगा।

INDIA-EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। करीब 20 साल बाद इस डील को लेकर औपचारिक ऐलान होने की उम्मीद है। गणतंत्र दिवस के मौके पर EU प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन की भारत यात्रा ने इसे और अहम बना दिया है।

मोदी–वॉन डेर लेयेन शिखर बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और EU नेतृत्व के बीच आज अहम बैठक होगी। इसमें व्यापार के साथ-साथ रणनीतिक साझेदारी, निवेश और पेशेवरों की आवाजाही पर सहमति बनने की संभावना है। वाणिज्य सचिव (Commerce Secretary) ने पुष्टि की है कि बातचीत पूरी हो चुकी है और लीगल स्क्रबिंग चल रही है।

क्यों खास है ये डील?

EU भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच व्यापार 136.53 अरब डॉलर रहा। यह समझौता ऐसे समय आ रहा है, जब अमेरिका के टैरिफ से भारतीय निर्यात दबाव में है। EU तक आसान पहुंच भारत के लिए बड़ा विकल्प बनेगी।

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भारतीय निर्यातकों को फायदा

FTA से कपड़ा, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, फार्मा और केमिकल सेक्टर को सबसे ज्यादा लाभ होगा। EU में इन पर लगने वाला 10–12% शुल्क घट सकता है या खत्म हो सकता है। इससे भारतीय उत्पाद बांग्लादेश और पाकिस्तान के बराबर प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

सेवाएं और प्रोफेशनल्स

आईटी, इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए आसान वीजा और काम के मौके बढ़ सकते हैं। इससे अमेरिका पर निर्भरता कम होगी।

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यूरोप को क्या मिलेगा?

EU को भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार तक पहुंच मिलेगी। ऑटोमोबाइल, मशीनरी, वाइन-स्पिरिट्स और निवेश के लिए बेहतर माहौल बनेगा। साथ ही चीन पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी।

कृषि-डेयरी सुरक्षित

भारत ने अपनी रेड लाइन कायम रखी है। कृषि और डेयरी सेक्टर को इस समझौते से बाहर रखा गया है, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रहें।

कब लागू होगा समझौता

इस साल साइन होने और 2026 की शुरुआत में लागू होने की उम्मीद है। इसे भारत की NDA सरकार का आठवां बड़ा व्यापार समझौता माना जा रहा है।

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