Highlight
- मुरैना जिले के 8 मदरसों में 254 हिंदू बच्चे पढ़ते पाए गए, शिक्षा विभाग की जांच में खुलासा।
- मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद मदरसों में गैर-मुस्लिम बच्चों का नामांकन जारी रहा।
- एनएचआरसी को मुरैना और शिवपुरी में करीब 550 हिंदू बच्चों के दाखिले की शिकायतें मिलीं।
Hindu Studying In Madrassas: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जिले के मदरसों में 254 हिंदू बच्चे पढ़ रहे हैं। यह मामला तब और अहम हो जाता है, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 16 अगस्त 2024 को मदरसों में गैर-मुस्लिम बच्चों के दाखिले पर रोक के आदेश दिए थे।
जिले में मदरसों की स्थिति
शिक्षा विभाग की जांच में सामने आया कि मुरैना में कुल 55 मदरसे दर्ज हैं। इनमें से 26 मदरसे अनुदान न मिलने के कारण बंद हैं, जबकि 29 मदरसे वर्तमान में संचालित हो रहे हैं। इन 29 में से 8 मदरसों में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के बच्चे पढ़ रहे हैं।
छात्रों के आंकड़े
इन 8 मदरसों में कुल 950 छात्र नामांकित हैं, जिनमें 254 हिंदू और 696 मुस्लिम बच्चे शामिल हैं। विभाग का कहना है कि हिंदू बच्चे अपने अभिभावकों की सहमति से शासन द्वारा तय पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा ले रहे हैं। शेष 21 मदरसों में केवल मुस्लिम छात्र पढ़ते हैं।
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खडियार गांव का उदाहरण
अंबाह विकासखंड के खडियार गांव स्थित मदरसा आयशा इस्लामिया में कुल 448 छात्रों में 135 हिंदू बच्चे पाए गए। अभिभावकों का कहना है कि पास में यही शिक्षण संस्थान उपलब्ध है, इसलिए बच्चे यहीं पढ़ रहे हैं।
एनएचआरसी की चिंता
मदरसे में 550 हिंदू बच्चों के होने का अर्थ शिक्षा विभाग की नाकामी है।
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) January 7, 2026
RTE एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप आबादी से 1 और 3 किलोमीटर में स्कूल खोले गए हैं,सरकारी विभाग जब स्कूल भर्ती अभियान चलाते हैं तो यह हिंदू बच्चे अदृश्य क्यों हो जाते हैं ?
सरकार की नीति बनाने वाले NGO तो… pic.twitter.com/yozxm9SFG6
एनएचआरसी सदस्य प्रियांक कानूनगो के अनुसार मुरैना और शिवपुरी में लगभग 550 हिंदू बच्चों के मदरसों में दाखिले की शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों में धर्मांतरण की आशंका भी जताई गई है।
आरटीई एक्ट के तहत स्कूलों की उपलब्धता के बावजूद हिंदू बच्चों का मदरसों में पढ़ना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या ठोस कदम उठाती है।
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