Highlights
- मौनी अमावस्या स्नान के दौरान प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम जाने से रोका गया।
- शिष्यों और पुलिस में धक्का-मुक्की, पालकी खींची गई और कई समर्थक हिरासत में लिए गए।
- नाराज शंकराचार्य बिना स्नान लौटे, शिविर में धरने पर बैठे; प्रशासन ने जांच की बात कही।
Prayagraj Magh Mela: प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के पावन स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान से रोक दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया। शंकराचार्य पालकी से संगम जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें भीड़ का हवाला देकर रोक लिया।
शिष्यों और पुलिस में धक्का-मुक्की
📍 Prayagraj, Uttar Pradesh | CLASH at Magh Mela
— The Alternate Media (@AlternateMediaX) January 18, 2026
🚨Police stopped Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati’s chariot amid heavy crowding.
Disciples refused to proceed on foot.
The Shankaracharya returned without taking the holy dip on Mauni Amavasya. pic.twitter.com/j4KNNiVOSF
पुलिस ने शंकराचार्य से पालकी छोड़कर पैदल जाने का आग्रह किया, लेकिन शिष्य नहीं माने और आगे बढ़ने लगे। इसी दौरान पुलिस और शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। आरोप है कि एक साधु को चौकी में पीटा गया और कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया।
पालकी खीची, क्षत्रप टूटा
विवाद बढ़ने पर पुलिस ने शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से करीब एक किलोमीटर दूर ले गई। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। लगभग दो घंटे तक अफसरों ने समझाने की कोशिश की, लेकिन शंकराचार्य नाराज रहे और स्नान नहीं किया।
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धरने पर बैठे शंकराचार्य
घटना से आहत शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें ससम्मान प्रोटोकॉल के साथ नहीं ले जाया जाएगा, तब तक वे गंगा स्नान नहीं करेंगे। उन्होंने इसे सरकार के इशारे पर की गई कार्रवाई बताया।
प्रशासन का पक्ष
प्रयागराज के डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि शंकराचार्य बिना अनुमति पालकी पर आए थे। उस समय संगम पर भारी भीड़ थी। समर्थकों ने बैरियर तोड़े और पुलिस से धक्का-मुक्की की। पूरे मामले की जांच की जा रही है।
मौनी अमावस्या पर संगम तट पर रिकॉर्ड भीड़ उमड़ी। शाम तक करीब साढ़े चार करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके थे। सुरक्षा के लिए AI, CCTV और ड्रोन से निगरानी की गई, मेला क्षेत्र को सात सेक्टरों में बांटा गया था।
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