Bhopal Polluted Water: भोपाल में नगर निगम की लापरवाही अब गंभीर रूप ले चुकी है। शहर में पीने के पानी की गुणवत्ता पर से लोगो का भरोसा उठता जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नगर निगम के ड्राइवर ही पानी के सैंपल लेने लगे हैं, जबकि इसके लिए प्रशिक्षित केमिस्ट और लैब स्टाफ की जरूरत होती है।
गंदे पानी की लगातार शिकायतें
भोपाल के कई इलाके जैसे करोंद, रोशनपुरा, ईदगाह हिल्स और नीलबड़ में लोग बदबूदार और मटमैले पानी के जखीरे से जूझ रहे हैं। कॉल सेंटर और सीएम हेल्पलाइन पर हर महीने 10 से अधिक शिकायतें दर्ज होती हैं।
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पाइपलाइन को लेकर लापरवाही
कई इलाकों में पीने के पानी की पाइपलाइन नालियों और नालों के पास से गुजरती है। करीब 80% ओवरहेड और संपवेल टैंक 6 महीने से 1 साल तक साफ नहीं किए गए हैं। इसका गंदा पानी सीधे लोगों के घरों तक पहुच रहा है।
प्रशासनिक कार्यवाही
महापौर मालती राय ने इंजीनियरों की टीमें संदिग्ध लाइनों की जांच के लिए भेजी हैं। वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर महिला कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। मुद्दा अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और राजनीतिक भी बन चुका है।
भोपाल में यह स्थिति साफ संकेत देती है कि अगर नगर निगम ने जल्द सुधार नहीं किया, तो इंदौर जैसी त्रासदी होने का खतरा बढ़ सकता है।
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