Bhopal Declaration-2: दलित और आदिवासी वर्ग के अधिकारों को मजबूत करने के लिए भोपाल डिक्लेरेशन-2 बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके तहत दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर का विचार-विमर्श आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से दलित और आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, ओमकार सिंह मरकाम सहित कई दलित-आदिवासी संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
भोपाल डिक्लेरेशन-1
तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सरकार के दौरान भोपाल डिक्लेरेशन-1 लाया गया था। इसे “दलित एजेंडा” का नाम दिया गया था। इस कमेटी का उद्देश्य अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के हितों पर काम करना है।
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दिग्विजय सिंह का बयान
दिग्विजय सिंह ने कहा कि ST/SC वर्ग के बच्चों में बेरोजगारी की समस्या अब भी बनी हुई है। उन्होंने याद दिलाया कि इंदिरा गांधी ने अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों के लिए पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी जैसे कई कदम उठाए थे।
उन्होंने कहा कि अब Gen-Z से संवाद करना जरूरी है। उनकी सरकार ने डिग्री होल्डर युवाओं को टेंडर देने की शुरुआत की थी।
भोपाल डिक्लेरेशन-2 का लक्ष्य
दिग्विजय सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है कि भोपाल डिक्लेरेशन-2 लाया जाए, जिसे वर्ष 2027 में लागू करने का लक्ष्य है।
संतोष वर्मा को लेकर दिग्विजय सिंह की प्रतिक्रिया
संतोष वर्मा के विवादित बयान पर दिग्विजय सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, “देखना होगा किस संदर्भ में उन्होंने अपनी बात कही है। अपनी बात को लेकर उन्होंने स्पष्टीकरण भी दे दिया। बात ये नहीं है कि उनका बयान क्या है, बात ये अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के अंदर ये क्यों भावना पैदा हो रही है। कहीं न कहीं कमी तो है, हम ही लोगों में कमी होगी।
उन्होंने कहा कि लोगों में लोकतंत्र को लेकर चिंता है। साथ ही यह भी कहा कि मध्यप्रदेश में ST/SC वर्ग का मुख्यमंत्री बने तो उन्हें खुशी होगी। आदिवासी वर्ग को जमीन के पट्टे तो मिल रहे हैं, लेकिन जमीन पर वास्तविक कब्जा नहीं मिल पा रहा है।
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