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Bhojshala Basant Panchami: भोजशाला में 10 साल बाद बसंत पंचमी पर एक साथ पूजा-नमाज; सुरक्षा में 8 हजार जवान तैनात, धार छावनी में तब्दील

Bhojshala Basant Panchami 2026

Highlights

  • धार भोजशाला में 10 साल बाद एक ही दिन पूजा और नमाज, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तय समय में आयोजन।
  • बसंत पंचमी पर कड़ी सुरक्षा: सीआरपीएफ, RAF समेत 8000 जवान तैनात, ड्रोन और AI से निगरानी।
  • भोजशाला और आसपास का इलाका छावनी में बदला, नो-फ्लाई जोन घोषित, सोशल मीडिया पर भी नजर।

Bhojshala Basant Panchami: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में आज बसंत पंचमी के अवसर पर खास और संवेदनशील माहौल देखा जा रहा है। करीब 10 साल बाद ऐसा हुआ है जब एक ही दिन पूजा और नमाज दोनों हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार यह व्यवस्था की गई है।

सुबह से पूजा, दोपहर में नमाज

सूर्योदय के साथ ही हिंदू समाज ने मां सरस्वती की पूजा शुरू कर दी। यह पूजा दोपहर 1 बजे तक और फिर 3 बजे से सूर्यास्त तक चलेगी। वहीं मुस्लिम समाज दोपहर 1 से 3 बजे के बीच जुमे की नमाज अदा करेगा। इस दौरान परिसर को पूरी तरह खाली रखा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि दोनों समुदायों को तय समय पर धार्मिक कार्य करने की अनुमति होगी और प्रशासन शांति बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी लेगा।

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धार बना छावनी

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए धार शहर को छावनी में बदल दिया गया है। सीआरपीएफ, रैपिड एक्शन फोर्स और स्थानीय पुलिस के 8000 से ज्यादा जवान तैनात हैं। ड्रोन और AI कैमरों से निगरानी की जा रही है। श्रद्धालुओं को कई स्तर की जांच के बाद ही प्रवेश मिल रहा है।

नो-फ्लाई जोन और सख्ती

भोजशाला के 300 मीटर क्षेत्र को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है। सोशल मीडिया पर भी पुलिस की नजर है। अफवाह या आपत्तिजनक पोस्ट पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

प्रशासन का बयान

धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि पूजा शांतिपूर्ण ढंग से चल रही है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है।

भोजशाला विवाद

भोजशाला 11वीं-12वीं सदी का ऐतिहासिक स्थल है। हिंदू इसे सरस्वती मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समाज इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है।

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