बारिश के मौसम में मध्य प्रदेश के इन झरनों में होता है स्वर्ग का अनुभव …
मध्य प्रदेश भारत के ह्रदय के रूप में जाना जाता है . प्रदेश की प्राकृतिक सुन्दरता देखते ही बनती है .प्रदेश की वाइल्ड लाइफ ,फोरेस्ट तथा झरनों के नाम देश की सबसे सुन्दर जगहों में आते हैं . आपको बतादें कि झरने तो देश में कई हैं लेकिन मध्य प्रदेश के झरनों की सुन्दरता सबसे अनोखी है और आज इस लेख के माध्यम से हम आपको प्रदेश के सबसे खूबसूरत झरनों की जानकारी देंगे . बी फॉल्स मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित पचमढ़ी मध्य भारत का सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थल है। पचमढ़ी का बी फॉल्स प्रपात जमुना प्रपात से भी जाना जाता है। जमुना जलप्रपात एक शानदार प्रपात है, जो पचमढ़ी के . पीने का पानी प्रदान करता है। इसकी धारा बहुत ऊंचाई से गिरती है। वहाँ स्नान करने वाले लोगों को वहीं का पानी चुभता है। बी फॉल्स एक अद्भुत झरना है, जो कल कल ध्वनि के साथ बहता है। यहाँ जल प्रपात के ऊपर और नीचे कुंड है । इस झरने से वर्ष भर धारा प्रवाहित होती रहती हैं और इसका पानी पहाड़ी से 35 मीटर की गहराई में गिरता हैं। धुआंधार वाटरफॉल्स मध्य प्रदेश के शहर जबलपुर से लगभग 21 किलोमीटर की दूर पर मौजूद धुआंधार वाटरफॉल्स प्रकृति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। अपनी शांति और अद्भुत दृश्यों के रूप से ये झरण सबका मन आसानी से मोह लेता है। जब इस झरने का पानी लगभग 18 मीटर से अधिक की ऊंचाई से गिरता है, तब सैलानियों में एक अलग ही रंगत देखने को मिलती है। कहा जाता है कि पानी गिरने की आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती है। ) अगर आप जबलपुर घूमने के लिए जा रहे हैं तो यहाँ ज़रूर पहुंचें। इस झरने को एक रोमांटिक वाटरफॉल्स के रूप में भी पसंद किया जाता है। इसलिए यहां कई कपल्स भी घूमने के लिए आते हैं। दुग्ध धारा लगभग 15 मीटर की ऊंचाई से गिरते पानी देखने और यहां आसपास घूमने के लिए हर महीने हजारों सैलानी पहुंचते हैं। ये झरना मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में मौजूद है। इस झरने को लेकर एक मान्यता है कि यहां दुर्वासा ऋषि ने तपस्या की थी इसलिए इस झरने का नाम दुर्वासा झरना पड़ा था। लेकिन, बाद के समय में ये दूध धारा के रूप में प्रचलित हो गया। एक अन्य धारणा है कि नर्मदा जी ने किसी राजकुमार पर प्रसन्न होकर उन्हें दूध की धारा के रूप में दर्शन दिए थे जिसके बाद इसका नाम दूध धारा पड़ा। रजत फॉल मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में मौजूद रजत फॉल किसी भी प्रकृति प्रेमी के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। कहा जाता है कि ये झरना भारत का 30वां सबसे खूबसूरत और अद्भुत झरना है। इस झरने की ऊंचाई लगभग 350 फीट है। आपको बता दें कि इस झरने को सिल्वर और सतपुड़ा की रानी के नाम से भी जाना जाता है। परिवार, दोस्तों और पार्टनर के साथ साथ घूमने के लिए ये झरना एक बेहतरीन जगह भी है। चिचाई वॉटरफॉल भारत में मौजूद 23वें सबसे अधिक ऊंचाई पर मौजूद है ये झरना। ये झरना लगभग 115 मीटर गहरा और लगभग 175 मीटर चौड़ा भी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये मध्य प्रदेश के रीवा से लगभग 42 किलोमीटर की दूरी पर सिरमौर जिले में मौजूद है। ये भी बता दें कि ये झरण बीहर नदी द्वारा निर्मित होता है। इस झरने के आसपास मौजूद हरियाली और खूबसूरत नज़ारे किसी भी सैलानी को अचंभित कर सकती है। इस झरने को पिकनिक की जगह के रूप में भी पसंद किया जाता है।
मध्य प्रदेश की ये ऐतिहासिक जगह बयां करती है प्रदेश का गौरवपूर्ण इतिहास …
प्रत्येक स्थान का अपना एक इतिहास होता है ऐसे ही मध्य प्रदेश का भी अपना एक गौरवपूर्ण इतिहास रहा है .हर इतिहास प्रेमी अक्सर ऐसे ही ऐतिहासिक स्थान पर जाना चाहता है जहाँ जाकर वो इतिहास को और करीब से देख सके . इस लेख के द्वारा हम आपको प्रदेश की ऐसी ही ऐतेहासिक जगहों के बारे में बताएँगे .. 1. ग्वालियर का किला मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक, ग्वालियर कला, संस्कृति और इतिहास में समृद्ध है। यह शहर मध्य प्रदेश पर्यटन का एक प्रमुख हिस्सा है और वास्तुकला के चमत्कारों और ऐतिहासिक मील के पत्थर का एक आदर्श मिश्रण दिखाता है। शहर का सबसे लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण – ग्वालियर का किला – भारत के सर्वश्रेष्ठ किलों में से एक है। मुख्य आकर्षण: ग्वालियर का किला, मानसिंह पैलेस, तानसेन मकबरा, टाइगर डैम, गोपाचल पर्वत, सूर्य मंदिर, सास बहू मंदिर, जय विलास पैलेस, सिंधिया संग्रहालय और माधव राष्ट्रीय उद्यान 2. उज्जैन मध्य प्रदेश पर्यटन स्थल उज्जैन, शिप्रा नदी के किनारे स्थित, मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलमें से एक है। सबसे प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल को ‘मध्य प्रदेश के मंदिर शहर’ के रूप में जाना जाता है। यह स्थान बुंदेला कला और वास्तुकला को दर्शाते हुए अद्भुत मंदिरों का दावा करता है। लोग ज्यादातर शांति और शांति प्राप्त करने के लिए इस जगह का पता लगाते हैं। उज्जैन बेहद लोकप्रिय कुंभ मेले की मेजबानी के लिए भी प्रसिद्ध है। मुख्य आकर्षण: श्री महाकालेश्वर मंदिर, राम घाट, काल भैरव मंदिर, जंतर मंतर, कालीदेह पैलेस और विक्रम कीर्ति मंदिर संग्रहालय 3. मांडवगढ़ मध्य प्रदेश पर्यटन स्थल : यदि आपके मन में एक छोटा और सुरम्य शहर है, तो मांडू वह जगह है। एक चट्टान पर स्थित, मांडू – या मांडवगढ़ – मध्य प्रदेश का इतिहासप्रेमी का स्वर्ग है और कुछ अद्भुत स्थापत्य वैभव के लिए जाना जाता है। राजसी मंदिरों की खोज करना या प्राचीन मंदिरों की त्रुटिहीन कलाकृति की खोज करना यहाँ की कुछ आवश्यक चीजें हैं। मुख्य आकर्षण: शिप पैलेस, हिंडोला महल, रूपमती का मंडप, नीलकंठ का महल, रीवा कुंड, बाग गुफाएं, होशंग शाह का मकबरा और रूपयान संग्रह 4. : खजुराहो मध्य प्रदेश पर्यटन स्थल : खजुराहो की मंदिर भारतीय कला और वास्तुकला के अद्भुत प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। यह मध्य प्रदेश के खूबसूरत और मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक है। इसकी त्रुटिहीन मूर्तियां, जटिल नक्काशी और ललित कला के नमूनों ने इसे भारत के सात अजूबों में स्थान दिलाया है। मुख्य आकर्षण: अजयगढ़ किला, खजुराहो की मंदिर, पन्ना राष्ट्रीय उद्यान, बेनी सागर बांध, पुरातत्व संग्रहालय, और कंदरिया महादेव, पार्श्वनाथ, विश्वनाथ, देवी जगदम्बा, वामन, दुलादेव, चित्रगुप्त और बीजमंडल के मंदिर 5. सांची सांची मध्य प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर लोकप्रिय मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक स्थल में से एक है। यह पूर्व शैक्षिक और बौद्ध तीर्थस्थल प्रसिद्ध स्तूप के लिए जाना जाता है, जो यूनेस्को द्वारा सूचीबद्ध विश्व धरोहर स्थल भी है। मुख्य आकर्षण: सांची स्तूप, तोरण, मठ, अशोक स्तंभ, बौद्ध विहार, गुप्त मंदिर और सांची संग्रहालय 6. अमरकंटक मध्य प्रदेश पर्यटन स्थल तीर्थराज के नाम से जाना जाने वाला अमरकंटक मध्य प्रदेश में सबसे अधिक देखे जाने वाले पर्यटन स्थलों में से एक है। अमरकंटक के रहस्य एक मध्य प्रदेश के हिल स्टेशन है जहां विंध्य, मैकाल और सतपुड़ा पर्वतमाला मिलती है। यह हिल स्टेशन तीर्थयात्रियों के राजा के रूप में लोकप्रिय है और हर साल बहुत सारे तीर्थयात्री यहां आते हैं। इस मध्य प्रदेश के हिल स्टेशन में से एक कबीर कोठी है जहाँ महान कवि कबीर ने एक बार मध्यस्थता की थी और तब से यह यात्रियों को बहुत आकर्षित करता है। आपको श्री यंत्र मंदिर, कपिल धारा फॉल्स और अमरकंटक में नर्मदा कुंड के पास रुकना होगा। मुख्य आकर्षण: श्री यंत्र मंदिर, कपिल धारा फॉल्स, और नर्मदा कुंडी
मध्य प्रदेश की सबसे डरावनी जगह ,जहाँ आज भी जाने से डरते हैं लोग …
अगर आच्छाई है तो बुराई भी है ,और भगवान है तो शैतान भी होंगे, और अगर आप मध्य प्रदेश कि ऐसे ही किसी डरावनी जगह के बारे मे जानना चाहते हैं तो आज हम आपको बताएंगे मध्य प्रदेश की हॉन्टेड जगहों का नाम .. 1.भोपाल का भूत बंगला मध्य प्रदेश की सबसे खतरनाक जगह मै से एक है भोपाल शहर की प्रोफेसर कॉलोनी में स्थित एक बंगला “भूतों का घर” माना जाता है। इस बंगले के पास से अकेले निकलने में भी लोग डरते हैं। कई सालों से यह बंगला वीरान है। इस बंगले की डरावनी कहानियों और मौतों के बाद भूत बंगला खूनी बंगला के नाम से भी मशहूर हो गया था। इस बंगले में कई बार लोगों की खूनी लाशें मिली हैं, हालांकि आज तक इन लाशों के खूनी का पता नहीं चल सका। माना जाता है कि यहां भूत प्रेत का निवास है और वो ही लोगों का खून करते हैं। कई लोग भूत बंगले से जुड़े मिथक और आत्माओं की कहानियों के बारे में बताते हैं, जिसे सुनने के बाद लोगों के मन में अजीब सी दहशत बैठ गई है। हालांकि अब यह बंगला तोड़ दिया गया है, लेकिन अभी भी यह भोपाल शहर की सबसे खतरनाक जगह मै से एक है और आज तक लोग इस जगह के पास से गुजरने से ही सहम जाते हैं। 2.डॉव इंडस्ट्रीयल बिल्डिंग भोपाल की डॉव इंडस्ट्रीयल बिल्डिंग 1984 में हुई गैस त्रासदी की घटना से जुडी है। इस बिल्डिंग को भोपाल शहर की सबसे खतरनाक जगह माना जाता है। लोग कहते हैं कि इस बिल्डिंग के आसपास आत्माओं का साया है। भोपाल गैस त्रासदी में हुई लोगों की हत्या के बाद उनकी आत्मा यहां फंसी हुई है। कई लोगों ने डॉव इंडस्ट्रीयल बिल्डिंग में आत्माओं की उपस्थिति की पुष्टि की है, जबकि कुछ लोग यहां डरावनी घटनाओं की पुष्टि करते हैं। इसलिए इस बिल्डिंग को बंद कर दिया गया है और इसे भोपाल की सबसे खतरनाक बिल्डिंग बताया जाता है।3 थॉमस चर्चगुना की देलवी कॉलोनी में स्थित थॉमस चर्च में होने वाली अनहोनी घटनाओं के कारण ये चर्चा में रहता है। थॉमर्स चर्च के बारे में बताया जाता है कि यहां अक्सर बच्चों के रोने की आवाज सुनाई देती थी, जिससे धीरे-धीरे स्थानीय लोगों में डर बढ़ता गया। एक समय आया जब मुस्लिम कम्यूलिटी के लोगों ने यह चर्च जला दिया, जिसके बाद ये चर्च खाली कर दिया गया। तब से थॉमस चर्च खाली पड़ा है, लेकिन आज भी जो कोई भी इसे देखता है उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह मात्र एक ऐसा चर्च है जो मध्यप्रदेश की खौफनाक जगह मै से एक है।4 एम्प्टी बिल्डिंगइंदौर के एमजी रोड पर स्थित एम्प्टी बिल्डिंग यहां की भूतिया बिल्डिंग मानी जाती है। कहा जाता है कि कई साल पहले एक महिला ने इस इमारत से कूदकर जान दी थी। महिला की मौत के बाद यहां असामान्य और अजीब गतिविधियां होने लगीं, जिसके बाद एक-एक कर लोगों ने बिल्डिंग खाली करना शुरू कर दी। इस तरह एम्प्टी बिल्डिंग खाली हो गई। मध्यप्रदेश की खौफनाक जगह आज भी लोग एम्प्टी बिल्डिंग इमारत में जाने से डरते हैं। बता दें कि इंदौर की एम्प्टी बिल्डिंग शहर के सबसे व्यस्त सड़क पर स्थित है, लेकिन आज भी इसका कोई खरीददार नहीं है। ऐसी कई मध्यप्रदेश की खौफनाक जगह है जो शहर के बीच मै होते हुए भी शहर का हिस्सा नही बन पाते।5 सुख निवास पैलेस मध्य प्रदेश की सबसे डरावनी जगह कहा जाये या खूबूसरत जगह। इंदौर शहर एक जहग ऐसी भी है जो इतनी डरावना भी है और खूबसूरत भी, इसका अनुमान आपको तब लगेगा जब आप इंदौर के सुख निवास पैलेस जाएंगे। सुख निवास पैलेस बाहर से दिखने में जितना आलीशान है, अंदर का नजारा उससे भी ज्यादा खूबसूरत है। लेकिन सुख निवास पैलेस इंदौर की सबसे डरावनी जगह मानी जाती है। कई लोगों ने इस महल के पास असामान्य घटनाओं का अनुभव किया है। इसलिए इस सुख निवास पैलेस को इंदौर मध्यप्रदेश की खौफनाक जगह में शामिल कर दिया गया है। ये महल इंदौर के होलकर्स द्वारा 18वीं शताब्दी में बनवाया गया था, लेकिन अब इसे म्यूजियम का रूप दे दिया गया है। हालांकि लोग यहां घूमने आते हैं, लेकिन इस भूतिया महल की कहानी सुनने के बाद लोगों में दहशत जरूर बैठ जाती है और यहां दोबोरा आने के बारे में कोई नहीं सोचता। लेकिन आपको बता दें वर्तमान में सुख निवास पैलेस से जुड़ी किसी भूतिया घटना के बारे में सटीक जानकारी नहीं मिलती है। 6.भूतिया अस्पताल क्या ऐसा भी कोई अस्पताल होगा जहां भूत मरीजों के साथ मिलकर अपना इलाज कराते होंगे। सुनने में ही कितना डरावना सा लगता है लेकिन भोपाल शहर की सबसे खतरनाक जगह मै से एक जगह ऐसी भी है। आप भले ही मानें या ना मानें, लेकिन भोपाल में स्थित इंदिरा गांधी हॉस्पीटल में भूत मरीजों के साथ अपना भी इलात कराते हैं। शहर के सबसे बड़े सरकारी जनाना अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर कई बार भूत को देखने के बाद मरीजों के पसीने छूट गए हैं। जाना तो दूर की बात है, अब लोग इस जगह के आसपास भटकने से भी घबराते हैं। हालात ये हैं कि अब इस पांचवी मंजिल के वॉर्ड पर ताला लगा दिया गया है और अब कोई भी डॉक्टर और कर्मचारी यहां कदम नहीं रखना चाहता। सुनकर आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे कि इंदिरा गांधी हॉस्पीटल में आदमी ही नहीं बल्कि लिफ्ट तक जाने से घबराती है। यहां लिफ्ट में पांचवी मंजिल का बटन दबता ही नहीं है। अगर आप इस बटन को दबाएं भी तो भी लिफ्ट वहीं खड़ी रहती है। अगर कोई भूलवश यहां पहुंच भी जाएं, तो उसका वापस लौटना मुश्किल होता है। अस्पताल के कर्मचारियों ने खुद भूतों को देखने की पुष्टि की है। जानकारी के अनुसार इस अस्पताल में बेड, मशीने सब नई हैं, लेकिन अब सब ताले के अंदर हैं। यहां तक की इन मशीनों को पांचवी मंजिल से लाने का साहस भी कोई नहीं करता। लेकिन वहां ऐसा क्यों होता था ये कोई भी नहीं जनता। 7.शिवपुरी किला शिवपुरी जिले में स्थित किला काफी डरावना है। यहां रात तो क्या दिन में भी कोई अकेले आने
मध्य प्रदेश का सबसे अमीर व्यक्ति कौन …
ये तो सभी जानते हैं कि भारत का सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी है पर क्या आप ये जानते हैं कि मध्य प्रदेश का सबसे अमीर व्यक्ति कौन है..आइए जानते हैं । विनोद अग्रवाल ‘यदि आपकी मर्सिडीज खरीदने की क्षमता है, फिर भी आप पुराने मॉडल की गाड़ी पर चलते हैं तो ये गलत है। वैसे ही यदि आपकी क्षमता नहीं है, फिर भी आप दिखावे के लिए मर्सिडीज खरीद लें, वह भी ठीक नहीं..। टाइम और वैल्यू दोनों को पहचानना बहुत जरूरी है, तभी सक्सेस मिलेगी।’ यह कहना है मध्यप्रदेश के सबसे अमीर व्यक्ति विनोद अग्रवाल का। अमीरों में इंदौर शहर के कोल कारोबारी विनोद अग्रवाल प्रदेश के सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में सामने आए हैं। वित्तीय सेवाएं देने वाली देश की अग्रणी कंपनियों में से एक आइआइएफएल हुरून ने एक हजार करोड़ से अधिक संपत्ति वाले देश के 1037 अमीरों की सूची जारी की है। इसमें इंदौर के कोल कारोबारी विनोद अग्रवाल देश में 279 वें स्थान पर हैं। पिछले वर्ष वे सूची में 494 वें स्थान पर थे। 9 वीं कक्षा से संभाला कारोबार जब विनोद 9वीं क्लास में था, उस वक्त लगभग 14-15 साल की उम्र थी। तभी बिजनेस को संभालना शुरू कर दिया। तब गुजरात-राजस्थान की यात्राएं की जो कोयला व्यापार से संबंधित थी। तब क्लाइंट को हैंडल करना बड़ा चैलेंज था। कम उम्र होने के कारण कई बार उन्हें भरोसे में लेना मुश्किल हो जाता था। हालांकि व्यापार के साथ उनका पढ़ने का शौक कम नहीं हुआ। 12वीं की परीक्षा में गोल्ड मेडलिस्ट रहे और प्रदेश में मेरिट लिस्ट में आए । व्यापार का सफर भी चलता रहा। लोगों ने कहा विदेश चले जाओअग्रवाल से पहले कभी कहा गया था कि भारत के कानून अलग तरीके के हैं। सख्त हैं। यहां टैक्सेशन अधिक है। आपको कहीं न कहीं विदेश में सेटल हो जाना चाहिए। देश से बाहर चले जाना चाहिए। तो उनका यही जवाब रहता था कि ये मां अहिल्या की पुण्याई की नगरी है।
ये है मध्य प्रदेश की स्थापना करने के पीछे का इतिहास..
आजादी के बाद 1 नवम्बर को मध्य प्रदेश की स्थापना हुई ,जिसे प्रदेश की जनता स्थापना दिवस के रूप मे मनाती है । लेकिन प्रश्न ये उठता है कि आखिर किस कारण से राज्यों के पुनर्गठन मे मध्य प्रदेश कि स्थापना हुई ,किस आधार पर इसे राज्य बनाया गया और क्या है प्रदेश कि स्थापना से जुड़ा इतिहास । आइए जानते हैं.. ऐसे हुई मध्य प्रदेश की स्थापना 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू हुआ इसके बाद सन् 1951-1952 में देश में पहले आम चुनाव कराए गए। जिसके कारण संसद एवं विधान मण्डल कार्यशील हुए। प्रशासन की दृष्टि से इन्हें श्रेणियों में विभाजित किया गया। सन् 1956 में राज्यों के पुर्नगठन के फलस्वरूप 1 नवंबर, 1956 को नए राज्य के रूप में मध्य प्रदेश का निर्माण हुआ। इस प्रदेश का पुर्नगठन भाषीय आधार पर किया गया था। इसके घटक राज्य मध्य प्रदेश, मध्य भारत, विन्ध्य प्रदेश एवं भोपाल थे जिनकी अपनी विधानसभाएं थीं। इस राज्य का निर्माण तत्कालीन सीपी एंड बरार, मध्य भारत, विंध्यप्रदेश और भोपाल राज्य को मिलाकर हुआ। इसे पहले मध्य भारत के नाम से भी जाना जाता था। भोपाल बना राजधानी1 नवंबर, 1956 को प्रदेश के गठन के साथ ही इसकी राजधानी औऱ विधानसभा का चयन भी कर लिया गया। भोपाल को मध्य प्रदेश की राजधानी के रूप में चुन लिया गया। राजधानी बनने के बाद 1972 में भोपाल को जिला घोषित कर दिया गया। मध्य प्रदेश के गठन के समय कुल जिलों की संख्या 43 थी। आज मध्य प्रदेश में कुल 52 जिले हैं। इन शहरों मे से चुनी थी राजधानी राजधानी के लिए राज्य के कई बड़े शहरों में आपसी लड़ाई चल रही थी, सबसे पहला नाम ग्वालियर फिर इंदौर का गूँज रहा था इसके साथ ही राज्य पुनर्गठन आयोग ने राजधानी के लिए जबलपुर का नाम भी सुझाया था लेकिन भोपाल में भवन ज्यादा थे, जो सरकारी कामकाज के लिए उपयुक्त थे। इसी वजह से भोपाल को मध्य प्रदेश की राजधानी के तौर पर चुना गया था। भोपाल के नवाब तो भारत से संबंध ही रखना नहीं चाहते थे, वह हैदराबाद के निजाम के साथ मिलकर भारत का विरोध करने लगे थे। देश के हृदय स्थल में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को रोकने के लिए भोपाल को ही मध्य प्रदेश की राजधानी बनाने का निर्णय लिया गया।
ये हैं मध्य प्रदेश के 10 सबसे प्रसिद्ध मंदिर …
मध्य प्रदेश पौराणिक समय से ही आस्था का केंद्र रहा है । प्रदेश की भूमि पर ऐसे कई चामत्कारिक मंदिर है जो अपने दिव्य अनुभव ,पौराणिक कथा और मंदिर की बनावट के कारण काफी प्रसिद्ध है । आज हम आपको मध्यप्रदेश के ऐसे ही 10 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे मे बताएंगे ,जहाँ जाकर आप भी दिव्य अनुभव कर सकते है साथ ही वहाँ होने वाले चमत्कारों को भी देख सकते हैं । 1 चौसठ योगिनी मंदिर – माँ नर्मदा की गोद में बसे मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में कई ऐसे मंदिर हैं जिनके इतिहास की गणना करना बहुत कठिन है। इनमें से कई मंदिर दूर-दराज के इलाकों में स्थित हैं। ऐसा ही एक मंदिर नर्मदा से थोड़ी दूर पर लगभग 70 फुट ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। विश्व प्रसिद्ध भेड़ाघाट के नजदीक स्थित चौसठ योगिनी मंदिर सभवतः भारत का इकलौता मंदिर है, जहाँ भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की प्रतिमा स्थापित है। कहा जाता है कि इस मंदिर के लिए नर्मदा ने भी अपनी दिशा बदल दी थी। हालाँकि देश के कई अन्य मंदिरों की तरह यह भी औरंगजेब के इस्लामिक कट्टरपंथ की भेंट चढ़ा, लेकिन वह मंदिर के गर्भगृह में स्थापित प्रतिमा का कोई नुकसान नहीं कर पाया। 2.ओंकारेश्वर मंदिर – भगवान शिव से जुड़े द्वादश ज्योतिर्लिंगों में मध्य प्रदेश स्थित ओंकारेश्वर का चौथा स्थान आता है. यहां पर भगवान शिव नर्मदा नदी के किनारे ॐ के आकार वाली पहाड़ पर विराजमान हैं. हिंदू धर्म में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिग को लेकर कई मान्यताएं हैं. जिसमें सबसे बड़ी मान्यता ये है कि भगवान भोलेनाथ तीनों लोक का भ्रमण करके प्रतिदिन इसी मंदिर में रात को सोने के लिए आते हैं. महादेव के इस चमत्कारी और रहस्यमयी ज्योतिर्लिंग को लेकर यह भी मानना है कि इस पावन तीर्थ पर जल चढ़ाए बगैर व्यक्ति की सारी तीर्थ यात्राएं अधूरी मानी जाती है. 3.वैजनाथ मंदिर – ये मंदिर आगर मालवा के सुसनेर रोड (उज्जैन-कोटा रोड राष्ट्रिय राजमार्ग 27) पर स्थित है. मंदिर बाणगंगा नदी के तट पर बना हुआ है और उसका निर्माण कार्य 1528 में शुरु और 1536 में पूर्ण हुआ. अंग्रेज़ दंपत्ति ने 1883 में मंदिर का पुनर्निमाण करवाया. ये बेहद आश्चर्यजनक बात है कि एक अंग्रेज़ दंपत्ति ने आख़िर एक मंदिर को क्यों बनवाया, जबकि वे ईसाई धर्म का पालन करते हैं. 4.पीताम्बर मंदिर – मध्यप्रदेश के दतिया जिले में स्थित मां पीतांबरा सिद्धपीठ है। इसकी स्था.पना 1935 में की गई थी। यहां मां के दर्शन के लिए कोई दरबार नहीं सजाया जाता बल्कि एक छोटी सी खिड़की है, जिससे मां के दर्शन का सौभाग्य मिलता है। यूं तो हर समय ही यहां भक्तोंी का मेला सा लगा रहता है लेकिन नवरात्र में मां की पूजा का विशेष फल प्राप्तय होता है। कहा जाता है कि पीले वस्त्र धारण करके, मां को पीले वस्त्रश और पीला भोग अर्पण करने से भक्तज की हर मुराद यहां पूरी होती है। 5. महाकालेश्वर मंदिर –भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों को दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग के दर्शन होते हैं। महाकालेश्वर मंदिर मुख्य रूप से तीन हिस्सों में विभाजित है। इसके ऊपरी हिस्से में नाग चंद्रेश्वर मंदिर है, नीचे ओंकारेश्वर मंदिर और सबसे नीचे जाकर आपको महाकाल मुख्य ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजित नजर आते हैं। जहां आपको भगवान शिव के साथ ही गणेशजी, कार्तिकेय और माता पार्वती की मूर्तियों के भी दर्शन होते हैं। इसके साथ ही यहां एक कुंड भी है जिसमें स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं। 6. ओरछा रामराजा मंदिर – ओरछा के इस मंदिर को लेकर कई कहानियां प्रचलित है. इनमें से एक कहानी ये है कि एक बार भगवान राम ने ओरछा के राजा मधुकरशाह को सपना में दर्शन दिए थे. जिसके बाद वो राजा भगवान श्रीराम के आदेश पर अयोध्या से उनकी प्रतिमा लाए थे. वहीं राजा ने मूर्ति को मंदिर में स्थापित करने से पहले एक जगह पर रखा था और जब प्राण-प्रतिष्ठा के वक्त मूर्ति को वहां से हटाया जाने लगा तो वो ऐसा नहीं कर पाए, तभी राजा को गवान का निर्देश याद आया कि वो जिस स्थान पर विराजमान हो जाएंगे वहां से हटाए नहीं जाएंगे. यही वजह है कि रामलला सरकार महल में विराजे हैं ये देश का एकमात्र मंदिर है जहां भगवान राम राजा के रूप में पूजे जाते हैं. इसके अलावा एमपी पुलिस सुबह और शाम यहां पर बंदूकों से सलामी देती है. यही वजह है कि इस मंदिर में दूर-दूर से भक्त भगवान राम का सम्मान देखने भक्त आते हैं। 7. सास बहु मंदिर – ग्वालियर स्थित सास-बहू मंदिर, दो मंदिरों का एक समूह, एक वास्तुशिल्प रत्न है और मान मंदिर पैलेस के दक्षिण में स्थित है। मूल रूप से शाहस्त्र बाहु मंदिर के रूप में जाना जाने वाला यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसे 11वीं शताब्दी की शुरुआत में कछवाहा राजा महिपाल ने बनवाया था। यह संभवतः किला परिसर का सबसे प्राचीन मंदिर है। सहस्त्रबाहु मंदिर या सास बहू मंदिर, , जो मूर्तिकला स्तंभों और नक्काशीदार पायलटों की भूलभुलैया की प्रचुरता के लिए उल्लेखनीय है जो बहन संरचनाओं के बड़े हिस्से को सजाते हैं। सास बहू मंदिर के बड़े हिस्से पर एक लंबा संस्कृत शिलालेख है, जिसमें कहा गया है कि इसे 1098 ईस्वी में ग्वालियर के एक राजपूत राजकुमार द्वारा पूरा किया गया था। इन मंदिरों को भारत के खूबसूरत स्मारकों में शुमार किया जाता है। यह एक वास्तुशिल्प चमत्कार है, जिसके स्तंभों को मूर्तियों और दीवार की आकृतियों से सजाया गया है। 8. मतंगेश्वर मंदिर – खजराहु का मतंगेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी बाबू लाल गौतम बताते हैं कि यहां शिवलिंग 9 फीट जमीन के अंदर और उतना ही बाहर भी है. मान्यता है कि मंदिर में मौजूद इस शिवलिंग की हर साल शरद पूर्णिमा के दिन एक इंच लंबाई बढ़ती है. प्रति वर्ष कार्तिक माह की शरद पूर्णिमा के दिन शिवलिंग की लंबाई एक तिल के आकार के बराबर बढ़ती है. शिवलिंग की लंबाई नापने के लिए पर्यटन विभाग के कर्मचारी बकायदा मेजरमेंट टेप का उपयोग करते हैं. चमत्कारिक रूप से शिवलिंग पहले की तुलना में लंबा मिलता है. 9. भरत मिलाप मंदिर -भरत मिलाप मंदिर कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर स्थित है।
MP का वो नेता जो मिल के मजदूर से बना मुख्यमंत्री…
देश में बुलडोज़र एक्शन का काफी ट्रेंड चल रहा है फिर चाहे वो उत्तर प्रदेश हो, मध्य प्रदेश हो या उतराखंड लेकिन बुलडोजर एक्शन के जनक न बाबा है ,न मामा और न ही पुष्कर सिंह धामी. दरअसल बुलडोज़र एक्शन के जनक हैं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल गौर. 10 वी कक्षा में इन्हें सप्ली मिली ,मजदूरी का भी किया काम और पहले चुनाव में मिली हार ,फिर कैसे बने बाबूलाल मुख्यमंत्री . शराब के धंधे से मजदूरी करना सही समझा बाबूलाल गौर का जन्म 2 जून 1930 को प्रतापगढ़ के नागोरी जिले में हुआ. बाबूलाल के पिता पहलवानी करते थे पर बाबूलाल के जन्म के डेढ़ साल बाद ही बाबूलाल पूरे परिवार सहित भोपाल रहने आगये . भोपाल में गौर के पिता शराब की दुकान चलाया करते थे पर गौर आगे जाकर ये बिलकुल नहीं करना चाहता था .गौर 16 साल में ही RSS से जुड़ गया था .शराब के धंदे से नफरत होने के कारण बाबूलाल ने दोबारा गाँव जाकर खेती करने की कोशिश की पर जब वो भी नहीं हुआ तो भोपाल की ही एक कपड़ा मिल में मजदूरी करना शुरू कर दिया . कैसे की राजनीतिक शुरुआत बाबूलाल गौर पहली बार जन संघ की ओर से पार्षद का चुनाव लड़ा इस चुनाव में बाबूलाल को हार का सामना करना पड़ा .गौर ने 1972 में पहला विधानसभा चुनाव जन संघ की ओर से भोपाल विधानसभा क्षेत्र से लड़ा और इसमें भी वो हार गए पर चुनाव के कुछ महीने बाद ही हाई कोर्ट ने इस चिनाव को अवैध घोषित कर दिया. बाद में उपचुनाव रखे गये जिसमे बाबूलाल गौर को जीत मिली . बाबूलाल गौर की काबिलियत के किस्से तत्कालीन प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ जय प्रकाश के कानों तक भी पहुंचे और जब JP भोपाल आये तो गौर अपने साथियों के साथ उन्हें कंधे पर बैठाकर ले कर आये उस वक्त जय प्रकाश ने गौर को आशीर्वाद दिया की जब तक जियो तब तक विधायक बने रहो और ये आशीर्वाद फलीभूत भी हुआ. गौर 1974 से 2013 तक लगातार 10 बार विधायक बने . जब मध्य प्रदेश में सुन्दरलाल पटवा की सरकार आई तब बाबूलाल गौर को नगरीय प्रशासन और संसदिये कार्य मंत्री बनाया गया .उस वक्त गौर ने प्रदेश को अतिक्रमण मुक्त बनाने की मुहीम चलायी तभी से गौर ने अवैध अतिक्रमण पर बुलडोज़र एक्शन की शरुआत की.गौर का बुलडोज़र एक्शन पक्ष हो या विपक्ष सबसे लिए बारबार था, गौर ने एक बार अपने ही पार्टी के नेता के अवैध अतिक्रमण पर बुलडोज़र चलवा दिया . कैसे बने गौर मुख्यमंत्री साल 2003 में दिग्विजय सिंह को हरा कर भारतीय जनता पार्टी की उमा भारती मुख्य मंत्री बनी,लेकिन मुख्य मंत्री बनने के कुछ ही दिन बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा. तब उमा भारती की जगह बाबूलाल गौर को मुख्यमंत्री बनाया गया . उमा भारती ने बाबूलाल से एक वादा लिया की वो जब कहेंगी तब गौर इस्तीफा देदे .इसके बाद बाबूलाल गौर 23 अगस्त 2004 को मुख्यमंत्री बने ,मुख्यमंत्री बनने के बाद गौर अपने तरीके से सरकार चलाने लगे .उनकी कार्यप्रणाली को आज भी प्रदेश में याद किया जाता है.
मध्यप्रदेश में लगातार सामने आ रहे इस्लामिक हिंसा के पैटर्न !
भोपाल में कुछ मुस्लिम युवकों ने एक हिन्दू लड़के को कुत्ता बनाया और उसे बेहद बुरी तरह से पीटा गया .इंदौर में ऑटो पर बजरंगदल लिखा होने के कारण एक युवक को बेरहमी से पीटा. इंदौर में एक हिन्दू लड़का अपनी मुस्लिम दोस्त के साथ घूम रहा था तो मुस्लिम युवकों ने लड़के की पिटाई कर दी और लड़की को इस्लाम के कानून बताने लगे, इतना ही नहीं ऐसा ही मामला रायसेन की मशहूर दरगाह से भी आया जहाँ एक हिन्दू लड़का अपनी मुस्लिम दोस्त के साथ सर झुकाने आया तो मुस्लिम भीड़ ने उन्हें घेर लिया और हर बार की तरह हिंसा करना शुरू कर दिया . आपको बतांदे की बीते दिनों से मध्य प्रदेश में लगातार NIA और ATS के छापे भी पढ़ रहे हैं जहाँ इस्लामिक आतंकवादियों का ISIS और HUT जैसे संगठनों से संपर्क होने की बात सामने आरही है .आइये जानते से विस्तार से. हिन्दू युवक को बनाया कुत्ता भोपाल के टीलाजमालपुर क्षेत्र में देर रात कुछ मुस्लिम युवकों ने एक हिन्दू युवक को घेर लिया . मुसलमानों ने उसके गले में बेल्ट पहनाया और उसे कुता बनकर भौंकने को कहा ,पीड़ित उनसे माफ़ी मांगता रहा पर आरोपियों ने एक ना सुनी .युवकों ने उससे इस्लाम क़ुबूल करने को भी कहा जिसपर पीड़ित कहता है कि भाई मुझे छोड़ दो मैं मियाँ भाई बनने को तैयार हूँ . बाद में पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया . बजरंग दल लिखने पर ऑटो चालक की पिटाई इंदौर में कुछ मुसलमान अक्सर लोगों से पैसा छीनते थे और एक दिन उन्होंने देखा की एक ऑटो के पीछे बजरंग दल लिखा है तो उन युवकों ने मिलकर ऑटो ड्राइवर को बेरहमी से पीट दिया साथ ही उसकी कमाई भी छीन ली . जब चालक ने पीटने का कारण पूछा तो आरोपी ने बजरंग दल का नाम लिया .बाद में इनके खिलाफ भी कार्रवाई की गयी . आवेश को मिली मुस्लिम दोस्त बनाने की सज़ा इंदौर में आवेश नाम का एक हिन्दू लड़का अपनी मुस्लिम दोस्त के साथ रेस्टोरेंट में खाना खाने आया था . दोनों को साथ गाड़ी पर देख अचानक मुसलमानों के झुण्ड ने उन्हें घेर लिया .युवकों ने पहले तो आवेश को पीटना शुरू किया साथ ही कुछ लोग उस दौरान मुस्लिम लड़की का भी विडियो बनाया . लड़की को शरिया कानून का ज्ञान दिया जा रहा था वहीं हिन्दू साथी के साथ मार पीट की जा रही थी. पुलिस ने बादमे लोगों का पता लगाया तो उनके खिलाफ करवाई की . दरगाह में सर झुकाने आये हिन्दू को पीटा इंदौर के जैसे ही रायसेन में भी हिन्दू लड़के को पीटा. दरअसल रायसेन की मशहूर दरगाह में एक हिन्दू लड़का अपनी मुस्लिम दोस्त के साथ सर झुकाने आया था. तभी वहां मौजूद मुस्लिम युवकों की भीड़ ने दोनों को घेर लिया . लड़के को मारना शुरू कर दिया और हर बार की तरह मुस्लिम लड़कियों को इस्लाम का पाठ पढ़ाने लगे . कट्टर पंथियों की हिंसा यही नहीं रुकी. राष्ट्रीय और राजकीय टेस्टिंग एजेंसी NIA और ATS के जब मध्य प्रदेश में छापे पड़े तो कट्टर पंथियों की आतंकवादी गति विधियों का भी पर्दा फाश होने लगा … जबलपुर में NIA की छापेमारी जबलपुर में 26 और 27 मई को NIA की छापेमारी हुई . ये छापा जबलपुर में 13 जगह पर हुआ था . छापे के बाद टीम ने यहाँ से 13 लोगो को पकड़ा ,इनमे से 3 की गिरफ्तारी हुई . जांच में पता चला की इन युवको का आतंकवादी संगठन ISIS से संपर्क था . ये ISIS में नए लोगों को जोड़ने का भी काम करते थे और पैसे लिया करते थे .साथ ही ये लोग ISIS के लिए फण्ड भी जमा करते थे और सोशल मिडिया के द्वारा ISIS का प्रचार भी करते थे . भोपाल छिंदवाड़ा से भी मिले आतंकी जबलपुर के साथ ही भोपाल और छिंदवाड़ा में भी छापा डाला गया जहाँ ATS द्वारा 16 लोगो को पकड़ा गया 19 मई को इनकी पेशी जिला न्यायालय में हुई जहाँ से 10 को रिमांड और 6 को जेल हुई .ये आतंकी मध्य प्रदेश को देहलाने की पूरी तैयारी कर चुके थे, साथ ही इनके निशाने पर BJP के बड़े नेता भी थे . पहले लव जिहाद ,धर्म परिवर्तन फिर लगातार हुन्दुओं पर हमले और अब ISIS और HUT जैसे संगठनो से ताल्लुक .आखिर क्यों ये कट्टरपंथी एक पैटर्न सा फोलो करते नज़र आरहे हैं. क्या इन सभी बातों का कनेक्शन मध्य प्रदेश में अशांति फैलाना है या फिर ये कुछ उससे भी बड़ा करने की तैयारी में हैं.
मध्य प्रदेश का पहला आदिवासी मुख्यमंत्री जिसने महज़ 13 दिन में दिया इस्तीफा…
13 दिनों के प्रधानमंत्री को तो आप जानते ही होंगे पर क्या आप जानते हैं मध्य प्रदेश में एक मुख्यमंत्री की सरकार भी 13 दिन तक रही यही नहीं इस मुख्यमंत्री से एक और ऐतिहासिक तथ्य जुड़ता है कि ये प्रदेश का पहला आदिवासी मुख्यमंत्री था .ये नाम है सारंगढ़ रियासत के आखिरी राजा नरेश चन्द्र का . MP में विद्युत के जनक कहे जाने वाले नरेश सिर्फ 13 दिन के लिए मुख्यमंत्री बन पाए थे. लेकिन क्या कारण था जिस वजह से महज 13 दिन में राजा नरेश चन्द्र को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा .. सारंगढ़ रियासत के आखिरी राजा राजा नरेश चन्द्र का जन्म तत्कालीन मध्य प्रदेश की सारंगढ़ रियासत में हुआ था ,ये रियासत के आखिरी राजा थे . 1948 में सारंगढ़ रियासत का मध्यप्रदेश में विलय हुआ था .राजा नरेश तत्कालीन मध्यप्रदेश की पुसोर विधानसभा के 15 बार विधायक बने , यह 17 बार मंत्री बने और 13 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने जिसके बाद इनने राजनीति से संन्यास ले लिया . तत्कालीन कांग्रेस नेताओं ने रचा ये षड्यंत्र जब सारंगढ़ रियासत का विलय मध्यप्रदेश में हुआ तब राजा नरेश और उनके परिवार ने कांग्रेस से नाता बना लिया . साल 1967 में राजमाता सिंधिया ने तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद से अनबन के चलते कांग्रेस छोड़ दी और जनसंघ से जुड़ गयी .सिंधिया की ही तरह पार्टी के कई नेताओं को द्वारिका प्रसाद से परेशानी. इनमे से एक है गोविन्द नारायण सिंह . गोविन्द एक बार राजमाता से मुलाकात करने आते हैं और कहते हैं कि अब वो कांग्रेस में नहीं रहना चाहते तब गोविन्द सिंह अपने साथ 35 और विधायकों को अपने साथ जनसंघ में ले आये.उस समय द्वारिका प्रसाद मिश्र की सरकार अस्थिर हो गयी और राजमाता सिंधिया ने मौका देखकर संयुक्त विधायक दल का गठन कर लिया और संयुक्त सरकार बना ली . जब प्रदेश के मुख्यमंत्री की बात आई तो लोगों ने राजमाता का ही नाम लिया पर राजमाता ने गोविन्द नारायण सिंह को मुख्यमंत्री बनाया .गोविन्द की सरकार भी सिर्फ 19 महीने ही चल पाई जिसके बाद 10 मार्च 1969 को गोविन्द नारायण ने इस्तीफा दे दिया . इस्तीफा देने के पीछे कई कारण बताये जाते है जिनमे मुख्य है सिंह की नेताओं से अनबन . राजमाता ने रखी थी शर्त जब गोविन्द नारायण सिंह ने इस्तीफा दिया तब राजा नरेश चन्द्र राजमाता के पास जाकर कांग्रेस पार्टी छोड़ने और राजमाता के साथ होने की बात करते है तो राजमाता एक शर्त रखती हैं, वो कहती है कि उनको को गोविन्द की तरह ही अपने साथ और कार्यकर्ताओं को लाना होगा . नरेश किसी कार्यकर्ता को अपने साथ नहीं ला पाए पर वो कांग्रेस छोड़ चुके थे इसलिए उन्हें 13 मार्च 1969 को मुख्यमंत्री बनाया गया लेकिन सिर्फ 13 दिन ही प्रदेश की बागडोर संभाल पाए . दरअसल जब राजा नरेश चन्द्र मुख्यमंत्री बने तब गोविन्द नारायण सिंह का दोबारा कांग्रेस के प्रति प्रेम जाग गया और उन्होंने दोबारा उन 35 कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस में वापसी कर ली. इसके बाद प्रदेश के पहले गोंड जनजाति के मुख्यमंत्री राजा नरेश चन्द्र को इस्तीफा देना पड़ा .इस्तीफा देने के बाद राजा नरेश ने राजनीति से संन्यास ले लिया . बताया जाता है कि आज भी उनकी बेटियां चुनाव लड़ा करती है .
चुनावी वॉर से पहले शुरू हुआ पोस्टर वॉर….
मध्य प्रदेश में चुनाव के नजदीक आते ही एक ओर जहाँ विपक्षी दल एक दूसरे पर तंज कसते नज़र आ रहे है तो वहीं अब पोस्टर वॉर भी शुरू हो गयी है .दरअसल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष कमलनाथ के कथित आपत्तिजनक पोस्टर लगाए गए है. पोस्टर पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि ये कांग्रेस पार्टी की जूतमपैजार और पुत्रों को आगे बढ़ाने की लड़ाई का नतीजा है . क्या है पूरा मामला भोपाल के मनीषा मार्केट क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्य मंत्री कमलनाथ के आपत्तिजनक पोस्टर लगे हुए है . ये पोस्टर बिलकुल कर्नाटक विधानसभा के दौरान लगे वहां के पूर्व मुख्यमंत्री के पोस्टर जैसे है . पोस्टर में कमलनाथ को करप्शन नाथ का नाम दिया गया है. पोस्टर में ऊपर की ओर wanted लिखा गया है और नीचे कमलनाथ की तस्वीर बनी हुई है जहां उनका नाम करप्शन नाथ दिया है . इन पोस्टर में तस्वीर के साथ QR स्कैनर भी बना हुआ है ,बताया जा रहा है की इसमें कमलनाथ के करप्शन के राज छुपे हैं . पोस्टर में कमलनाथ के इन घोटालों का है ज़िक्र – *25000 करोड़ का किसान कर्ज़ माफ़ी घोटाला किसने किया ? – करप्शन नाथ *2400 करोड़ का हेलीकाप्टर घोटाला किसने किया ?- करप्शन नाथ *1178 करोड़ का गेंहू बोनस घोटाला किसने किया ?- करप्शन नाथ *600 करोड़ का खाद घोटाला किसने किया ?- करप्शन नाथ * 350 करोड़ का CD घोटाला किसने किया ?- करप्शन नाथ *63 करोड़ का मोबाइल घोटाला किसने किया ?- करप्शन नाथ “कांग्रेस पार्टी का पुत्रों को आगे बढ़ाने की लड़ाई का नतीजा”- विष्णुदत्त शर्मा प्रदेश के BJP अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने पोस्टर राजनीति पर कहा कि पोस्टर में QR है जिसमे करप्ट नाथ की चरित्रावली है ,भारतीय जनता पार्टी का इसमें कोई हाथ नहीं है ,ये तो कांग्रेस पार्टी को सोचना चाहिए कि ये कही उनकी ही पार्टी में जो अंतर्द्वंद है या फिर ये पार्टी में जूतमपैजार और पुत्रों को आगे बढ़ाने की लड़ाई का नतीजा है इसीलिए किसी दूसरे युवा ने इस कारण से ही ये पोस्टर लगाये हों. भारतीय जनता पार्टी का इसमें कोई हाथ नहीं है, हम सकारात्मक राजनीति करते है ,हम विकास की बात करते हैं.