पेशाब कांड के ज़रिये RSS को बदनाम करने की साज़िश

UP की काबा फेम नेहा सिंह राठौर के खिलाफ MP पुलिस ने कसा शिकंजा मध्य प्रदेश के सीधी जिले में हुए पेशाब कांड के बाद जहाँ एक ओर विपक्षी दल इसपर सियासत कर रहे है वहीं दूसरी ओर इस पर अलग अलग नैरेटिव चलाये जारहे हैं जिनके ज़रिये कई लोग आरएसएस को बदनाम करने की साज़िश कर रहे हैं .ऐसा ही एक नैरेटिव नेहा सिंह राठौर नामक एक ट्विटर हैंडल पर भी दिखाई दिया, जिसपर एक मीम अपलोड की गई, जिसमे सीधी में आदिवासी युवक के साथ हुए अमानवीय व्यवहार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जोड़ा गया.जिसपर प्रदेश की राजधानी और इंदौर में ने उक्त ट्विटर हैंडल के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया . ये भी देखें –UCC के नाम पर आपको ठगने की तैयारी पेशाब कांड को RSS से जोड़ा .नेहा सिंह राठौर नामक ट्विटर हैंडल पर एक मीम डाली गयी जिसमे पेशाब कांड को आरएसएस से जोड़ा गया जिसपर भोपाल और इंदौर में ट्विटर हैंडल के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया जिसमे लिखा गया है कि “ट्विटर पर डाली गयी उक्त पोस्ट देखने से आदिवासी समाज और राष्ट्रीय स्वयं सेवकों के बीच आपस में शत्रुता एवं वैमनस्यता की भावना पैदा कर रही है .जिससे आदिवासी समाज और राष्ट्रीय स्वयं सेवकों के बीच रोष एवं नाराज़गी है .” साथ ही उन्होंने अनुरोध किया कि नेहा सिंह राठौर नमाक ट्विटर हैंडल के खिलाफ उचित कारवाही की जाये . “केंद्र में जो भी पार्टी विपक्ष में है, मैं उसके साथ हूं.” इस पर नेहा सिंह राठौर की भी प्रतिक्रया आई है उन्होंने ट्वीट कर कहा कि ” केंद्र में जो भी पार्टी विपक्ष में है, मैं उसके साथ हूं. सरकारें बदल जाएंगी, पर मैं विपक्ष में ही रहूंगी. एक लोक-कलाकार को जनता के पक्ष में रहकर सरकार से सवाल करना चाहिए. यही उसका धर्म है. मैं अपने धर्म के साथ हूं. मैं लोकतंत्र के साथ हूं.”
महिला कर्मचारियों को मिलेगा सात दिन का अतिरिक्त अवकाश, शिवराज सरकार ने पूरा किया वादा
मध्य प्रदेश की महिलाओं को शिवराज सरकार ने दी बड़ी सैगात . आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिला कर्मचारियों के लिए किया बड़ा ऐलान. महिला दिवस पर सीएम शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के अनुरूप महिला कर्मचारियों को 7 दिनों के अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश (CL) देने के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने आज बुधवार 5 जुलाई को आदेश जारी कर दिए है. अब महिला कर्मचारी अपनी आवश्यकता के हिसाब से इन अवकाशों को ले सकेंगी. शिवराज ने निभाया भाई का दायित्व इसके पहले शिवराज सरकार ने मुख्य मंत्री लाडली बहना योजना का भी शुभारंभ भी किया था जिसमे हर माह महिलाओं को 1000 रुपये दिए जायेंगे जो आगे जाकर बढ़ भी सकते हैं. चुनाव से पहले प्रदेश के मामा अपने बहनों को लिये लगातार योजना आ रहे हैं . महिला दिवस के मौके पर मुख्य मंत्री द्वारा ये ऐलान किया गया था कि प्रदेश की महिला कर्मचारियों को 7 दिन का अतिरिक्त अवकाश दिया जायेगा .और आज सामान्य प्रशासन विभाग ने इसका आदेश भी जारी कर दिया है .महिला दिवस पर प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि आज के दौर में महिलाएं कंधे से कंधा मिलकर चल रही है साथ ही वह घर और बच्चों की भी ज़िम्मेदारी उठाती है इसलिए हमने तय किया है कि महिला कर्मचारी को 7 दिन का अतिरिक्त अवकाश दिया जायेगा जिसे वह अपनी आवश्यकता के अनुरूप इस्तेमाल कर सकेंगी .
दमोह हिजाब विवाद में एक बार फिर बच्चों को बनाया जा रहा मोहरा,बच्चों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

दमोह के चर्चित हिजाब मामले में अब स्कूल प्रबंधन एक बार फिर बच्चों को ढाल बनाकर जिला प्रशासन पर दवाब डाला जा रहा है . दरअसल गंगा जमुना स्कूल की मान्यता बहाली की मांग लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में बच्चे और उनके अभिभावक कलेक्ट्रेट पहुंचे. बच्चों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन गंगा जमुना स्कूल की मान्यता रद्द होने बाद अब स्कूल प्रबंधन मासूम बच्चों को ढाल बना रहे हैं . मंगलवार को बड़ी संख्या में बच्चे उनके अभिभावक के साथ कलेक्टर को ज्ञापन देने पहुंचे .ज्ञापन में बच्चों ने अपने विभिन्न मांगे भी लिखी .इसमें लिखा गया कि गंगा जमुना स्कूल में अच्छी पढ़ाई होती है .यहाँ गरीबों के 1208 बच्चे पढ़ते हैं.इसलिए स्कूल की मान्यता की बहाली की जाये. NCPCR अध्यक्ष ने जताई थी पूर्व में आशंका NCPCR के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने ट्विट कर पहले ही ये आशंका जताई थी कि स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों का इस्तिमाल किया जा सकता है . इसके बाद ही स्कूल प्रबंधन और बच्चों द्वारा एक रैली भी निकाली गयी थी और अब दोबारा बच्चों को ढाल बनाकर जिला प्रशासन पर दवाब डाला जा रहा है . .आपको बतादें की बच्चों के भविष्य की चिंता करते हुए पहले ही उन्हें दुसरे अंग्रेजी मीडियम स्कूल में भर्ती करा दिया है .बताया जा रहा है कि इन स्कूल में बच्चों की पढ़ाई भी मुफ्त होगी . इन सब के चलते आखिर क्यूँ अभिभावक और बच्चों को ज्ञापन देना पड़ा .अभी तक साफ़ नही हुआ कि ये घटना सचमें स्कूल के प्रति बच्चों का लगाव है या फिर स्कूल के प्रबंधन की खुद को कानून से बचाने की साज़िश.
सीखो कमाओ योजना का हुआ शुभारंभ, जानिए कैसे करें आवेदन

आज मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने युवाओं के उज्जवल भविष्य के लिए सीखो कमाओ योजना का शुभारंभ किया .प्रदेश की राजधानी भोपाल के रविंद्र भवन में योजना के पोर्टल पर युवाओं के रजिस्ट्रेशन करने की प्रक्रिया भी शुरू हुई. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने खुद भी एक युवक का रजिस्ट्रेशन किया . क्या है सीखो कमाओ योजना दरअसल इस योजना के माध्यम से मध्य प्रदेश के बेरोज़गार युवाओं को काम सिखाया जायेगा. योजना के अंतर्गत 12वी पास , आईटीआई, डिप्लोमा, ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के युवाओं को काम सीखने का मौका दिया जायेगा. योजना में 700 कार्यों की स्वीकृति दी गयी है . इतना ही नहीं युवाओं को काम सीखना का पैसा भी दिया जायेगा. जिसके कारण इस योजना का नाम सीखो कमाओ रखा गया है. आवेदन की पूरी प्रक्रिया -https://mmsky.mp.gov.in पर जाकर अभ्यर्थी पंजीयन पर क्लिक करें. -उसके बाद आपको आवश्यक निर्देशों और पात्रता से सबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ना होगा. -अगर आप सभी पात्रता को पूरा कर रहे हैं, तो अपना समग्र आईडी दर्ज करें. -आपके मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी से मोबाइल नंबर सत्यापित करें, आपकी जानकारी खुद ही प्रदर्शित की जाएगी. -आप जब एप्लीकेशन सबमिट करेंगे, तो आपको एसएमएस से यूजरनेम और पासवर्ड मिलेगा, आपको खुद ही लॉग इन करवाया जाएगा. -अपनी शैक्षणिक योग्यता दर्ज कर सम्बंधित दस्तावेजों को संलग्न करें,
सावान के महीने में ज्योतिर्लिंग के दर्शन क्यों हैं ख़ास , जानिए मध्य प्रदेश के ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा

भगवान भोलेनाथ को समर्पित सावन का महीना शुरू हो चुका है, ऐसे में यदि कोई भक्त शिव शम्भू की ज्योतिर्लिंग का दर्शन करे तो उसे अधिक फल प्राप्त होता है. भोलेनाथ के कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं इनमें से दो ज्योतिर्लिंग अकेले मध्य प्रदेश में ही स्थित है.प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर और खंडवा में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग हैं. आज इस लेख के माध्यम से जानेंगे कि क्या है महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर से जुड़ी पौराणिक कथा. महाकालेश्वर उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा का वर्णन शिव पुराण में मिलता है . उसमे बताया गया है कि एक बार उज्जैन में चंद्रसेन नामक राजा राज्य करता था वो भगवान शिव का भक्त था .चंद्रसेन की मित्रता शिव के एक गण से हो गई थी जिसका नाम था मणिभद्र . मणिभद्र ने राजा को एक चिंतामणि दी जिसके मिलते ही राजा की कीर्ति और यश चारो दिशाओं में फैलने लगे .राजा चंद्रसेन का वैभव देख अन्य राज्यों के राजा चिंतामणि के लालच में आगये और राजा चन्द्रसेन पर आक्रमण कर दिया . चंद्रसेन राज्य से भागकर महाकाल की शरण में आ गया और भगवान शिव की तपस्या करने लगा ,तभी राजा को तपस्या करता देख एक विधवा स्त्री का बेटा भी भोलेनाथ की तपस्या करने लगा . तपस्या में लीन हो जाने के कारण माँ की आवाज़ भी सुनाई नहीं दी ,तब माँ ने गुस्से में पूजा की सामग्री फैकना और पुत्र को मारना शुरू कर दिया .उसी समय सबके देखते ही देखते उस स्थान पर एक मंदिर प्रकट हो गया और उसमे स्वयंभू शिवलिंग का भी प्राकट्य हुआ यह . यह सब सुनकर राजा चंद्रसेन भी शिवलिंग के दर्शन करने यहां आये.उस वक्त जितने भी राज्यों के राजाओं ने हमला किया था वो भी युद्ध का मार्ग छोड़कर बाबा महाकाल की शरण में आगये. ओंकारेश्वर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में इंदौर के पास स्थित है . ओंकारेश्वर से जुड़ी पौराणिक कथा ये है कि एक बार शिवपुरी नामक पर्वत पर मांधाता राजा ने तपस्या की ,राजा की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिया .राजा के कहने पर भगवान् शिव वहीँ शिवलिंग के रूप में रहने लगे. तभी से इस पर्वत को मान्धाता पर्वत कहने लगे . बताया जाता है कि आज भी भगवान शिव और माता पार्वती यहाँ हर रात शयन के लिए आते हैं .मंदिर में हर रात चौसर की बिसात रखी जाती है जो सुबह मंदिर खुलने पर बिखरी हुई मिलती है और आज तक कोई भी इसका रहस्य नहीं जान पाया है . यहाँ मंदिर को दो भागों में बांटा गया है एक है ओंकारेश्वर और दूसरा है ममलेश्वर महादेव .यह मंदिर ओम की आकार वाली पहाड़ पर स्थित है जिसके कारण इसका नाम ओंकारेश्वर रखा गया .यह पर्वत चारो ओर से पार्वती और कावेरी नदी से घिरा हुआ है .
मध्य प्रदेश के हनुमान मंदिर के चमत्कार देखकर आप भी रह जायेंगे दंग…

मध्य प्रदेश अपने गौरवपूर्ण इतिहास के कारण देश भर में अपनी ख्याति फैलाये हुए है साथ ही प्रदेश में ऐसे चमत्कारी हनुमान मंदिर भी मौजूद है जिनको देखने विदेशों से भी भक्त आते हैं. इन राम भक्त हनुमान के मंदिरों से जुड़े रहस्य और चमत्कार भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं .आज इस लेख के माध्यम से हम आपको ऐसे ही चमत्कारी मंदिरों के बारे में बतेयेंगे . 1. छींद वाले हनुमान जी यह मंदिर रायसेन जिले के बरेली तहसील ग्राम छींद में स्थित है. करीब 200 साल पुराने इस मंदिर की प्रतिमा दक्षिणमुखी है. छींद वाले हनुमान जी को रोगों से बचाने वाले हनुमान जी भी कहा जाता है.बताया जाता है कि 200 साल पहले ये प्रतिमा एक किसान को मिली थी तब उसने हनुमान जी के लिए एक छोटी सी मढ़िया बनाई और आज यहाँ दादाजी महाराज के चमत्कार के कारण भव्य मंदिर मौजूद है . 2. सिद्धवीर खेड़ापति हनुमान सिद्धवीर हनुमान मंदिर शाजापुर जिले के बोलाई ग्राम में स्थित है. यह मंदिर बेहद चमत्कारी माना जाता है . मंदिर बोलाई स्टेशन से 1 किमी की दूरी पर है बताया जाता है कि मंदिर के पास आते ही ट्रेन की स्पीड कम हो जाती है .खेड़ापति मंदिर में हनुमान जी भक्तों का भविष्य बताते हैं. भक्तों को यहां आकर उनके भविष्य का पूर्वाभास हो जाता है. 3. हड्डी जोड़ने वाले हनुमान यह मंदिर मध्य प्रदेश के कटनी जिले से 35 किमी दूर मोहास गाँव में स्थित है .इस मंदिर में भक्त टूटी हड्डियों के साथ आते हैं और बिलकुल ठीक हो कर जाते हैं . इस चमत्कार के कई लोग साक्षी हैं . मंदिर में वैसे तो हमेशा ही भक्तों की भीड़ रहती है पर मंगलवार और शनिवार के दिन सर्वाधिक लोग आते हैं. 4. अर्जी वाले हनुमान यह मंदिर जबलपुर के ग्वारीघाट क्षेत्र में स्थित है ,इस मंदिर को रामलला मंदिर कहा जाता है साथ ही इसका एक नाम अर्जी वाले हनुमान जी भी है .यहाँ भक्तों की अर्जी लगायी जाती है जिसे हनुमान जी पूरी करते हैं. मंदिर की मुख्य प्रतिमा छोटे आकार की और बाल स्वरूप की हैं . भक्तों को मुख्य प्रतिमा के दर्शन साल में एक बार हनुमान जन्मोत्सव पर ही होते हैं. 5. जामसांवली मंदिर राम भक्त हनुमान का यह मंदिर छिंदवाडा जिले में स्थित है .इस मंदिर में हनुमान जी निद्रा अवस्था में हैं कहा जाता है कि प्रतिमा के नीचे खज़ाना है जिसकी रक्षा में हनुमान जी वहां लेटे हुए हैं .जामसांवली मंदिर की एक खास बात ये भी है कि यहां विराजमान हनुमान जी की मूर्ति की नाभि से जलधारा निकलती है. पानी कहां से आता है इसके स्रोत के बारे में किसी को नहीं पता. 6. बागेश्वर धाम बागेश्वर धाम मंदिर में हनुमान जी की बालाजी स्वरूप में प्रतिमा है .यह मंदिर छत्तरपुर जिले में मौजूद है . यहाँ भक्त अपनी परेशानियाँ लेकर आते हैं और अर्जी लगते है . बालाजी महाराज उनके सभी कष्टों को हर लेते हैं . यहाँ दरबार भी लगाया जाता है जिसमे यहाँ के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री भक्तो के प्रश्न बिना पूछे ही पर्चे पर लिख देते हैं जो बिलकुल सही निकलता है . 7. पंडोखर सरकार धाम पंडोखर सरकार धाम छतरपुर के पंडोखर नामक ग्राम में स्थित हैं. यहाँ भक्त अपने हर प्रकार के कष्टों का निवारण करने के लिए आते हैं .यहाँ दरबार लगाया जाता है जिसमे भक्तों के बिना कुछ बताये ही उनकी परेशानियां और उसका समाधान पर्चे पर लिख दिया जाता है .
UCC के नाम पर आपको ठगने की तैयारी

बीते हफ्ते से UCC का ज़िक्र देश भर में हर किसी की जुबां पर बना हुआ है . एक ओर सभी राजनीतिक पार्टियों अपनी राय रखती हुई नज़र आरही हैं तो वहीं समाज के अन्य लोग भी इसपर अपना मत देते हुए दिखाई देरहे हैं . इसी बीच विधि आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जनता की राय मांगी है लेकिन कुछ लोग UCC की आड़ में जनता के साथ फ्रॉड कर रहे हैं. जानिए पूरी जानकारी … UCC के नाम पर फ्रॉड दरअसल कुछ लोग सोशल मीडिया पर ऐसे मेसेज सर्कुलेट जिसमे वो UCC के लिए सपोर्ट मांग रहे हैं. सपोर्ट करने के लिए उनके द्वारा दिए गए नंबर पर मिस्ड कॉल करना होता है . देश प्रेम का हवाला देकर और सांप्रदायिक भावनाओं का सहारा लेकर ये जालसाज़ अपना उल्लू सीधाकर रहे हैं . जैसे ही आप नंबर पर मिस्ड कॉल करेंगे तो ये अपना काम निकाल लेंगे जिसमें हो सकता है कि आपकी निजी जानकारी या बैंक की जानकारी भी उन तक पहुँच सकती है. ये है मेसेज 1 मेसेज में लिखा है कि “ अगर आप अत्यधिक व्यस्तता के कारण, अभी तक कॉमन सिविल कोड (UCC) का फॉर्म ऑनलाइन नहीं भर सके हैं तो, 9090902024 पर मिस्ड कॉल कर सकते है और इस बिल का समर्थन कर सकते हैं और अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए ,सभी से कॉल करने का आग्रह भी करें ! वंदे मातरम!! मेसेज 2 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे भारतवासियों को। यू.सी.सी. समान नागरिक संहिता लाना चाहते हैं. इसके लिए देश के नागरिकों से अपनी राय देने को कहा गया है. दो दिन में ही 04 करोड़ मुसलमानों और 02 करोड़ ईसाइयों ने यूसीसी के खिलाफ वोट किया है. इसलिए, समय सीमा 6 जुलाई से पहले, देश के सभी हिंदुओं से यूसीसी के पक्ष में मतदान करने का अनुरोध किया जाता है। कृपया यूसीसी का समर्थन करने और देश को बचाने के लिए 9090902024 पर मिस्ड कॉल दें। आपकी कॉल रिकॉर्ड की जाएगी और यूसीसी को समर्थन के रूप में स्वीकार की जाएगी। कृपया यह जानकारी सभी हिंदुओं के साथ साझा करें। 9090902024 पर मिस्ड कॉल देने वाले सभी लोगों को शुभकामनाएं। भारत माता की जय. यदि आप इस संदेश को 100 से अधिक लोगों तक साझा करते हैं, तो आप उस देश की बहुत बड़ी सेवा करेंगे. आप भी रहे सतर्क यदि आपके या आपके परिवार के पास इस तरह का कोई भी मेसेज आता है तो उसे तुरंत रिपोर्ट करे और उसे फॉरवर्ड न करें ,साथ ही अपने दोस्तों और परिचितों को भी जानकारी दें .इस तरह से आप अपने और अपने परिचितों को फ्रॉड से बचा सकते हैं.
मध्य प्रदेश के चमत्कारी देवी मंदिर …

भारत के ह्रदय प्रदेश मध्य प्रदेश पर एक ओर भारत माता का आशीर्वाद है वहीँ दूसरी ओर माँ दुर्गा का, जो प्रदेश की रक्षा और खुशहाली का कारण हैं.प्रदेश में ऐसे कई मंदिर है जहाँ का इतिहास और उससे जुड़े रहस्य भक्तों को आकर्षित करते हैं. देवी के इन मंदिरों के दर्शन करने से भक्तों के हर मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं .आज इस लेख में हम आपको प्रदेश के ऐसे ही देवी मंदिरों के बारे में बताएँगे . 1.मैहर माता मंदिर माँ शारदा का ये मंदिर सतना जिले के मैहर ग्राम में स्थित है. मंदिर त्रिकूट पर्वत पर बना हुआ है . मंदिर तक पहुँचने के लिए 1101 सीढ़ियां बनी हुई है. सीढ़ियों के अलावा रोड वे भी बनाया गया है. मैहर मंदिर में सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं जिसके कारण ये मंदिर प्रदेश का सबसे प्रसिद्ध देवी मंदिर है. 2.बिजासन माता मंदिर यह मंदिर सीहोर जिले के सलकनपुर में स्थित है. बीजासेन माता सलकनपुर में ऊँची पहाड़ी पर प्रकृति के बीच विराजित हैं. यहाँ जाने के लिए सीढियां और रोड वे दोनों हैं. इस स्थान को मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा भी बढ़ावा दिया जा रहा है .हालही ही में प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सलकनपुर मंदिर में सलकनपुरलोक बनाने की बात भी कही थी . ३.शीतला देवी मंदिर शीतला माता मंदिर मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से 18 किमी की दूरी पर स्थित है .यह मंदिर विशेषकर प्रदेश के क्षत्रियों के लिए आस्था का केंद्र है.शीतला माता के दर्शन के लिए श्रद्धालु ग्वालियर से पैदल चलकर देवी के मंदिर जाते हैं. 4.बगलामुखी माता मंदिर बगलामुखी त्रिशक्ति माता मंदिर नलखेड़ा तहसील में लखुंदर नदी के तट पर स्थित है .बताया जाता है कि इस मंदिर का सम्बन्ध द्वापर युग से है साथ ही ये भी कहा जाता है कि युधिष्ठिर जी ने इस मंदिर का निर्माण श्री कृष्ण के कहने पर किया था. उन्होंने इसे महाभारत युद्ध जीतने के लिए बनवाया था. 5.चामुंडा और देवी तुलजा माता मंदिर चामुंडा और देवी तुलजा माता मंदिर देवास के पास एक वैशिनी नामक पर्वत पर स्थित है .इस पर्वत को टेकरी भी कहा जाता है. यहाँ चामुंडा माता ,तुलजा माता और कालिका माता का मंदिर है. इनमे मुख्य चामुंडा माता और तुलजा माता मंदिर हैं.चामुंडा माता को छोटी माता और तुलजा माता को बड़ी माता कहा जाता है. कहा जाता है कि यहाँ माता जागृत स्वरूप में विराजित हैं. 6.पीताम्बर माता मंदिर माँ पीताम्बर मंदिर एक शक्तिपीठ है जो दतिया में बीचों बीच स्थित है .यहाँ माता दिन के तीनों प्रहार में अलग अलग स्वरूप में दर्शन देती हैं .इस मंदिर की स्थापना 1935 में की गयी थी. ये एक चमत्कारी करी है साथ ही यहाँ मांगी हर मनोकामना पूरी होती है . 7.भादवा माता मंदिर भादवा माता मंदिर नीमच जिले में स्थित है .यह मंदिर चमत्कारी मंदिरों में से एक है . भक्त यहाँ दूर दूर से माता के दर्शन के लिए आते है .इस मंदिर में माता महामाया भादवा हैं और उनके साथ देवी के नवदुर्गा स्वरूप भी मौजूद है.यहाँ माता की मूर्तियां संगमरमर से बनाई गई हैं. 8.रतनगढ़ माता मंदिर दतिया जिले से लगभग 60 किमी की दुरी पर स्थित रतनगढ़ माता मंदिर एक लोकप्रिय दुर्गा मंदिर है। जो की सिंध नदी के तट पर स्थित है, यह माता मंदिर चम्बल क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध है। हर साल लाखों भक्त माता के दर्शन कर अपनी मनोकामना पूर्ण करते है।
जानिए मध्य प्रदेश के गौरवशाली इतिहास की कहानी …
मैं हूँ भारत का ह्रदय कहे जाने वाला मध्य प्रदेश . मैंने अपने 66 सालों में बहुत कुछ देखा ,सहा है .मैं लगातार तरक्की की राह पर भी अग्रसर हूँ . और आज आपको इस लेख के माध्यम से मेरे इतिहास और वर्तमान की कहानी बताने जा रहा हूँ .इसे धैर्य और समवेत से सुनिए . ऐसे हुआ मेरा जन्म मुझे याद है 1 नवंबर 1956 का वो दिन। जिस दिन मध्य प्रदेश के रूप में मेरा जन्म हुआ था । दरअसल हुआ यूँ कि इस दिन के करीब 9 वर्ष पहले 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ था। तभी से भारत लगा हुआ था कि कैसे अपने बिखरे-बिखरे राष्ट्र को राज्यों की सीमा में बांधे और अपने विकास को दिशा दे। बाद में तय हुआ कि राज्यों का गठन भाषा के आधार पर हो। इसी दिन भाषायी आधार पर कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब और केरल का भी जन्म हुआ। और चूंकि देश के मध्य में हिंदी ही प्रमुख भाषा थी, इसलिए मुझे अर्थात मध्य प्रदेश को हिंदी भाषी राज्य के रूप में गठित किया गया। छत्तीसगढ़ को किया अलग मेरा जो पहला नक्शा बना, उसे देखकर देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बोले – ‘यह तो ऊंट जैसा लगता है। दरअसल, उस समय छत्तीसगढ़ भी मेरा अंग था, जो ऊंट की टांग जैसा लगता था और ग्वालियर-चंबल वाला हिस्सा ऊंट की ऊंची पीठ जैसा…इसीलिए तो नेहरू ने मुस्कुराते हुए मुझे यह संज्ञा दी थी। बहरहाल, 20वीं सदी पूरी होते ही वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ मुझसे विलग हो गया। मुझे लगा जैसे मेरा अंग-भंग हो गया, कलेजे का टुकड़ा कटकर दूर हो गया। किंतु समय की गति और जनता की जरूरतों के अनुसार छत्तीसगढ़ का अलग होना ज़रूरी था। जबलपुर, इंदौर और भोपाल में अंतत: भोपाल को मेरी राजधानी चुना गया। शुक्ल बने पहले मुख्यमंत्री उस समय अन्य राजनीतिक दल शैशव अवस्था में थे। जो भाजपा आज प्रचंड होकर सत्ता में है, तब उसका जन्म नहीं हुआ था। यद्यपि इस पार्टी की विचारधारा तब भारत के हृदय में जड़ें जमा रही थी। मुझे याद है कि 1 नवंबर 1956 को पंडित रविशंकर शुक्ल मेरे प्रथम मुख्यमंत्री बने और सत्ता की कमान कांग्रेस के हाथ में आई . मेरा जन्म होते ही मेरा विकास-क्रम आरंभ हुआ। शुरुआती पांच वर्ष में ही एक राज्य के रूप में मैंने अपनी व्यवस्था को सुचारू बना लिया। राजकाज ठीक से चलने लगा और जनता के काम होने लगे। पर लगातार मुख्यमंत्री बदलते रहे . रविशंकर शुक्ल के बाद, भगवंतराव मंडलोई, कैलाशनाथ काटजू, फिर से मंडलोई, उनके बाद द्वारका प्रसाद मिश्र… मुख्यमंत्री हुए .इस बीच 1977 में मुझे पहली बार राष्ट्रपति शासन के हवाले कर दिया गया। इसी कालखंड में मैंने 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के दौर में मेरी स्वतंत्रता का अपहरण हुआ था, मेरे देशप्रेमी बच्चों को जबरन जेल में ठूंस दिया गया था। कानून के डंडे के आगे मेरा लोकतंत्र विवश हो गया और इस तरह मैंने आपातकाल की त्रासदी और क्रूरता भी झेली। जनता पार्टी का आया दौर आपातकाल के बाद जब सत्ता बदली तो मध्य प्रदेश में पहली बार भारतीय जनता पार्टी आई . उस वक्त 1977 में कैलाश चन्द्र मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने उनके आते ही काम काज का तरीका बदलने लगा .फिर वीरेंद्र कुमार सकलेचा और सुंदरलाल पटवा भी जनता पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री बने। मैं यह सब देख मुस्कुरा ही रहा था कि तभी 18 फरवरी 1980 से 8 जून 1980 तक फिर राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। जिसकी वजह से फिर मुख्यमंत्री बदला और अब कांग्रेस पार्टी के अर्जुन सिंह को प्रदेश का मुखिया बनाया . उस वक्त प्रदेश की अर्थव्यवस्था ठीक नहीं थी और ना ही जनता की अच्छी आई थी पर जब 1992 में अर्थव्यवस्था को मुक्त किया गया , तो सब ठीक होने लगा । किंतु इसी बीच अयोध्या के विवाद के चलते 16 दिसंबर 1992 को एक बार फिर मुझे राष्ट्रपति शासन के हवाले कर दिया गया। इस वक्त की राजनीति को मैंने विस्फुरित नज़रों से बदलते हुए देखा था . मामा रहे लम्बे समय तक मुख्यमंत्री अब मध्य प्रदेश का अन्धकार युग आया , दरअसल इस समय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बने उनके कार्य काल में राजनीतिक विकास तो हुआ पर प्रदेश पानी ,बिजली और सड़क जैसे विकास में पीछे रह गया . फिर 8 दिसम्बर 2003 को उमा भारती ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली पर कुछ समय बाद ही उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा . उमा ने बाबूलाल गौर को पद की शपथ दिलाई . गौर मुख्यमंत्री बन प्रदेश की समस्याओं पर नजर डाल ही रहे थे की तभी दोबारा सत्ता बदल गयी . अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर पांव -पांव वाले भैया यानी शिवराज सिंह चौहान को बैठाया . चौहान के उदार ,संवेदनशील व्यक्तित्व को देख कर राजनितिक पंडितो को आशंका हुई की चौहान पद संभाल पाएंगे या नहीं. पर शिवराज ने ये कर दिखाया और अब तक के सबसे लंबे कार्यकाल के मंत्री भी बने .बीच में 17 दिसंबर 2018 से 20 मार्च 2020 तक कांग्रेस के कमल नाथ सत्ता में रहे, पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी कुछ और मंत्रियों के साथ मिलकर कांग्रेस का दामन छोड़ दिया और बीजेपी को अपनाया .जिससे कमलनाथ की बनी बनाई सरकार गिर गयी और दोबारा शिवराज का राज आ गया . गौरवशाली यात्रा से हूँ प्रसन्न 66 वर्षों में मैंने कई दौर देखे जिनमे कुछ अच्छे तो कुछ बुरे भी रहे । पर मैं कभी रुका नहीं बस आगे बढ़ता गया .मैंने लगातार कृषि कर्मण अवार्ड जीते। मेरा लाडला बेटा इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है। मेरी प्राचीन नगरी,या कहें महाकाल की नगरी उज्जैन का वैभव श्री महाकाल महालोक के कारण विश्व में और बढ़ गया है। मेरे जंगलों में बाघ की दहाड़ और हाथी की चिंघाड़ के साथ अब चीतों की पदचाप भी सुनाई देती है। मैं अपनी अब तक की यात्रा से प्रसन्न् हूं। उम्मीद है मेरी गौरव यात्रा यूं ही चलती रहेगी।
बागेश्वर धाम से अनसुने रहस्मयी तथ्य आपको पता है क्या ?

इन दिनों देश में बागेश्वर धाम चर्चा का विषय बना हुआ है . बागेश्वर धाम से जुड़ी ऐसी कई आश्चर्यजनक बातें है जिनको समझना किसी साधारण मनुष्य के बस से बहार है . बागेश्वर धाम में पवन पुत्र हनुमान जी महाराज का मंदिर जिन्हें सभी बागेश्वर बालाजी के नाम से जानते हैं. यहाँ हर प्रकार से परेशान भक्त आते हैं जिनकी अर्जी लगायी जाती है और उनके कष्टों का निवारण किया जाता है . आज हम आपको बागेश्वर धाम से जुड़ी तमाम जानकारी इस लेख के माध्यम से देंगे . क्या है बागेश्वर धाम बागेश्वर धाम मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में गंज नाम के कस्बे से 35 किलो दूरी पर स्थित है . बागेश्वर धाम में बालाजी का मंदिर है जिन्हें बागेश्वर बालाजी कहा जाता है. यह मंदिर एक चमत्कारिक स्थान है . इसकी स्थापना 1986 में हुई थी . 1987 में यहाँ संत सेतु लालजी महाराज का आगमन हुआ . साल 2012 से यहां भक्तों के कष्टों का निवारण करने के लिये दरबार लगाना शुरू हुआ . वर्तमान में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री हैं .धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री दरबार में सभी भक्तों की परेशानियों का निवारण करते हैं . कौन है पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर हैं यह देश और विदेश में अलग अलग जगह जाकर कथाएँ करते हैं. फिलहाल देश में शास्त्री जी के अधिक संख्या में भक्त है . शास्त्री अक्सर धर्म और हिन्दू राष्ट्र की बातें करते है जिसके कारण ये अक्सर चर्चा में रहते हैं. इनके अलग अलग शहरों में दरबार लगते है जहाँ समस्याओं से परेशान लोग अर्जी लगाते और बालाजी के चरणों का ध्यान करते हैं .शास्त्री भक्तों के मन की बात,उनके बिना बताये ही पर्चे पर लिख देते हैं, जो एक दम सही होती है . साथ ही जिस किसी व्यक्ति को प्रेत बाधा होती है वो दरबार में आते ही झूमने लगते है ,चीखने चिल्लाने लगते है . इन सभी परेशानियों का निवारण बागेश्वर बालाजी की कृपा से पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री द्वारा होता है .बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री अपने साथ हमेशा एक मुद्दल लिए होते है जिनसे उन्हें बागेश्वर बालाजी की आज्ञा प्राप्त होती है . कैसे पहुंचे बागेश्वर धाम अगर आप बागेश्वर धाम जाना चाहते हैं तो आप रोड ,ट्रेन और हवाई मार्ग से जा सकते हैं .भोपाल से बागेश्वर धाम की दूरी 365 किलो है. अगर आप ट्रेन से जाना चाहते है तो आपको पहले खजुराहो रेलवे स्टेशन या छतरपुर रेलवे स्टेशन पहुंचना होगा .स्टेशन से आपको बस या टैक्सी मिल जाएगी .अगर आप रोड के माध्यम से जाना चाहेंगे तो भी आपको पहले खजुराहो आना पड़ेगा और फिर पन्ना रोड पर मौजूद एक छोटे से कस्बे गोंज पहुंचना होगा .कस्बे से 35 किलो दूर है बागेश्वर धाम .जहाँ आप आसानी से किसी भी साधन से पहुंच सकते हैं.