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जानिए भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत विधि एवं परायण का शुभ मुहुर्त

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत

चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। इस वर्ष भालचंद्र संकष्टी का यह व्रत 28 मार्च को रखा जाएगा। इस दिन भगवान श्री गणेश और चंद्रमा की पूजा की जाती है। इस व्रत को सुहागिन स्त्रियां संतान प्राप्ती की कामना और संतान की लम्बी उम्र के लिए रखती हैं। इस लेख के माध्यम से जानिए व्रत की विधि, शुभ मुहुर्त एवं व्रत परायण का समय। भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत विधि इस दिन व्रत करने वाले को सर्वप्रथम स्नानादि से निवृत हो कर भगवान श्री गणेश का पूजन करना चाहिए। पहले भगवान श्री गणेश का अभिषेक करें फिर उन्हें वस्त्र धारण कराएं। तत्पश्चात फल फूलादि चढ़ाएं। भगवान को लड्डू या मोदक का भोग लगाएं। इतना करने के बाद भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा पढ़ें या सुने। प्रथम पूज्य श्रीगणेश का ऊँ गं गणपतये नम का जप कर ध्यान करें और भक्ती भाव से आरती करें। शाम को चंद्रोदय तक का इंतजार करें और चंद्रमा को अर्घ देकर व्रत का परायण करें। भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत शुभ मुहुर्त भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी तिथी का आरम्भ 28 मार्च 2024 को शाम 6 बजकर 56 मिनट पर हो रहा है। यह तिथी अगले दिन यानी 29 मार्च को रात 8 बजकर 20 मिनट तक रहने वाली है। चतुर्थी का पूजा 28 मार्च को ही होगी इस दिन चंद्रोदय 9 बजकर 9 मिनट पर होगा। चंद्रोदय समय भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने वाले को सम्पूर्ण दिन व्रत रखते हुए रात को चंद्रोदय का इंतजार करना चाहिए। इस दिन चंद्रोदय रात 9 बजकर 9 मिनट पर होगा। अलग अलग शहरों के अनुसार चंद्रोदय के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। चंद्रोदय के बाद व्रत करने वाले को विधिवत चंद्रमा और भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए। यह भी पढ़ें- बागेश्वर धाम से अनसुने रहस्मयी तथ्य आपको पता है क्या ?

हिमाचल प्रदेश में BJP ने दिया कांग्रेस के सभी बागियों को टिकट

हिमाचल

इस समय हिमाचल प्रदेश से सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। लोकसभा चुनाव सर पर हैं और इसी बीच कुछ प्रदेशों में विधानसभा चुनाव भी होने हैं जिसे लेकर तैयारी की जा रही है। इन में से एक प्रदेश है हिमाचल प्रदेश जहां होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की है इस सूची की खास बात यह है कि इसमें कांग्रेस के 6 बागी नेताओं का नाम भी शामिल हैं। कांग्रेस के बागियों को मिला हिमाचल से टिकट लोकसभा चुनाव के साथ ही हिमाचल प्रदेश में 6 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने वाले हैं। इन 6 सीटों के लिए मंगलवार को बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने 6 सीटों के लिए कांग्रेस पार्टी के 6 बागी नेताओं के नाम का ऐलान किया है। राज्यसभा में क्रॉस वाटिंग करने के कारण ये विधायक हार गए थे। सभी विधायकों ने 23 मार्च को दिल्ली के भाजपा मुख्यालय पर पार्टी की सदस्यता ली। लोकसभा में होगा कांग्रेस को नुकसान भाजपा ने धर्मशाला से सुधीर शर्मा, लाहौल से रवि ठाकुर, सुजानपुर से रजिंदर राणा, बड़सर पर इंद्र दत्त लाखनपाल, गगरेट से चैतन्य शर्मा, कुटलैहड़ से देविंदर कुमार को टिकट दिया गया है। बता दें कि अगर ये बागी नेता उपचुनाव जीत जाते हैं तो कांग्रेस पार्टी में निश्चित ही विधायकों की कमी हो जाएगी। यह भी पढ़ें- छिंदवाड़ा से नकुलनाथ पर भारी पढ़ेगी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी

छिंदवाड़ा से नकुलनाथ पर भारी पढ़ेगी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी

नकुलनाथ , गोंडवाना गणतंत्र पार्टी

लोकसभा चुनाव करीब हैं ऐसे में सभी राजनैतिक दलों के उम्मीदवार नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। मध्य प्रदेश की सबसे हॉट सीट कहे जाने वाली छिंदवाड़ा सीट से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार नकुलनाथ ने भी आज अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। प्रदेश की ये सीट पूर्व मुख्यमंत्री और नकुलनाथ के पिता कमलनाथ का गढ़ मानी जाती है। लोकसभा चुनाव 2024 में छिंदवाड़ा से कांग्रेस और नाथ परिवार को पत्ता कट सकता है क्योंकि इस बार सीट से त्रिकोणीय मुकाबला होने वाला है जिसमें कांग्रेस के लिए भारतीय जनता पार्टी के साथ गोंडवाना गणतंत्र पार्टी भी मुसीबत बनी हुई है ऐसे में पार्टी का जीतना मुश्किल हो सकता है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी बनी नकुलनाथ की मुसीबत छिंदवाड़ा से नकुलनाथ के विपक्ष में भाजपा नेता विवेक बंटी साहू हैं और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने देवराबेन भलावी को प्रत्याशी बनाया है। देवराबेन भलावी ने शुक्रवार को छिंदवाड़ा से अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया हैं। बता दें कि छिंदवाड़ा आदिवासी बाहुल्य सीट है। इस बार गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भी अपना उम्मीदवार उतार दिया है, जिसके बाद से चुनाव रोचक होता दिखाई देने लगा है। बता दें कि देवराबिन भालवी ने अमरवाड़ा विधानसभा से चुनाव लड़ा था, लेकिन वो चुनाव हार गए थे पर जीत के बेहद करीब थे जिसके कारण ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार जीजीपी अपने और जीत के बीच का ये फासला मिटाकर छिंदवाड़ा सीट पर अपना नाम लिख देगी। किया नामांकन दाखिल नकुलनाथ ने आज नामांकन दाखिल करने से पहले एक रोड़ शो किया जिसके बाद वह अपने समर्थकों के साथ अपना नामांकन दाखिल करने गए। बेटे की नामांकन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए पूर्व सीएम कमलनाथ ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की थी। कमलनाथ ने अपने साशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा है कि छिंदवाड़ा सांसद नकुलनाथ लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करेंगे। उनके साथ प्रदेशभर के कांग्रेस नेता और हज़ारों कार्यकर्ता भी शामिल होंगे। मैं और पूरा छिंदवाड़ा परिवार इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनेगा। आइये हम नामांकन की प्रक्रिया के साथ देश में एक नई राजनीति की शुरुआत करें। जय कांग्रेस, विजय कांग्रेस.. । पूरे नाथ परिवार, छिंदवाड़ा के खास लोग और बड़े नेताओं की हाजरी में आज नकुलनाथ ने अपना नामांकन दाखिल किया। यह भी पढ़ें- तीन दशक से लोकसभा चुनाव में एमपी कांग्रेस का बुरा हाल

केवल ईडी के पास है ये खास पावर, जिससे केजरीवाल भी नहीं बच सके

ईडी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस समय ईडी की गिरफ्त में हैं। 21 मार्च को कथित शराब घोटाले में केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था। ईडी ने दो महीने के अंदर ही दो राज्यों के सीएम को गिरफ्तार कर लिया है दोनों मामले में नेताओं को मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया गाय है। जिसमें केजरीवाल को 28 मार्च तक ईडी की रिमांड में रखा जाएगा और हेमंत सोरेन अभी तक कस्टडी में हैं। जानिए ईडी की वो पावर्स जो बनाती है उन्हें सीएम को भी गिरफ्तार करने में सक्षम। ईडी के पास क्या पावर्स हैं साल 1947 में एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट लागू किया गया था इसके लागू होने के बाद साल 1956 में ईडी का गठन किया गया। उस दौरान ईडी का काम केवल विदेशों के साथ एक्सचेंज मार्केट में लेन देन करने वालों की जांच करना था। ईडी को शुरूआती समय में इन्फोर्समेंट यूनिट नाम दिया गया और आगे चलकर इका नाम इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट रख दिया गया। देश में जब FEMA, FEONA,PMLA जैसे लॉ आए तो प्रवर्तन निदेशालय की पावर बड़ी गई। इसके साथ ही साल 2013 में हुए एक संसोधन ने ईडी की ताकत और बड़ा दी। दरअसल साल 2012 में मनी लॉनंड्रिंग के मामले की जांच कभी की जाती थी जब 30 लाख या उससे ज्यादा पैसों की उलट फेर हुई हो पर साल 2013 में हुए एक संसोधन के बाद इस लिमिट को हटा दिया गया है। किन नेताओं को किया गिरफ्तार ईडी ने केजरीवाल से पहले दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को पिछले साल शराब घोटाले के माले में गिरफ्तार किया था। साल 2023 के अक्टूबर महीने में आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद संजय सिंह पर शराब घोटाले के मामले में कारवाई की थी। इसी मामले में बीआरएस की एमएलसी के.कविता को भी गिरफ्तार किया गया था। जहां एक ओर हेमंत सोरेन से अपनी गिरफ्तारी क पहले ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था वहीं केजरीवाल अब भी जेल से सरकार चलाने की बातें कर रहे हैं। जेल में रहते हुए भी मुख्यमंत्री रहने वाले वह पहले सीएम हैं। यह भी पढ़ें- तीन दशक से लोकसभा चुनाव में एमपी कांग्रेस का बुरा हाल

तीन दशक से लोकसभा चुनाव में एमपी कांग्रेस का बुरा हाल

लोकसभा चुनाव

लोकसभा चुनाव 2024 शुरू होने में एक महीने से भी कम समय है जिसके कारण बीजेपी ने पहले ही अपने सभी उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी थी पर कांग्रेस के अभी भी आधे से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार घोषित नहीं हुए हैं, जो ये बताता है कि शायद कांग्रेस डरी हुई है। पार्टी का ये हाल अभी से नहीं है बल्कि पिछले तीन दशक से है, जिस बीच मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी का ग्राफ लगातार गिरता हुआ नज़र आया है। लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन आज हम आपसे कांग्रेस के इसी खराब चुनावी प्रदर्शन पर बात करेंगे। जब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ एक था, तब लोकसभा की 40 सीटें थीं। 90 के उस दशक में मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का दबदबा रहा करता था और इसी बीच में बीजेपी ने उठना शुरू कर दिया था।फिर 90 के दशक के बाद से एमपी और छत्तीसगढ़ में बीजेपी का ग्राफ बढ़ता गया है। जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी उस दौरान भी लोकसभा चुनावों बीजेपी की पकड़ एमपी में रही थी। यह तब भी हुआ, जब 1993 से 2003 तक एमपी में दिग्विजय सिंह की सरकार थी। साल 2009 में हुआ सुधार दिग्विजय सिंह के कार्यकाल के दौरान तीन लोकसभा चुनाव हुए। इन तीनों चुनाव में बीजेपी का ही दबदबा दिखा है। यह चुनाव 1996, 1998 और 1994 में हुए थे। इसके साथ ही केंद्र में 2004 से 2014 तक यूपीए की सरकार थी। साल 2004 के लोकसभा चुनाव में भी प्रदेश में बीजेपी को 29 में से 25 सीटें मिली थी। हालांकि 2009 में कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार हुआ था और केवल इस साल बीजेपी के ग्राफ में गिरावट हुई। कांग्रेस को 12 सीटें आई थी और बीजेपी के 16 सीटें मिली थी। इस दौरान अन्य को एक सीट पर जीत मिली थी। बीते तीन दशक में यह बीजेपी का सबसे कमजोर प्रदर्शन था लेकिन कांग्रेस के लिए एक सुधार की ओर कदम। लोकसभा चुनाव में बीजेपी का बड़ा ग्राफ 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन सबसे दमदार रहा है। बीजेपी ने एमपी की 29 में से 28 सीटों पर जीत हासिल की इस वक्त कांग्रेस केवल कमलनाथ के गढ़ यानी छिंदवाड़ा की ही सीट जीत पाई थी। वहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 27 सीट पर जीत हासिल की थी।दरअसल, 1991-2019 के बीच हुए लोकसभा चुनाव के रेकॉर्ड को देखें तो पता चलता है कि बीजेपी का ही बोलबाला है। साथ ही यह साफ होता है कि कही ना कही कांग्रेस अपनी जमीन खो रही है। अगर 2009 के प्रदर्शन को नज़रंदाज़ करें तो कांग्रेस का ग्राफ लगातार एमपी में नीचे गिरता दिखाई दे रहा है। यह भी पढ़ें- भोजशाला के ASI सर्वे को लेकर क्या बोल गए दिग्विजय सिंह

भोजशाला के ASI सर्वे को लेकर क्या बोल गए दिग्विजय सिंह

भोजशाला , दिग्विजय

मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह हमेशा से अपने हिंदू विरोधी बयानों के कारण सुर्खियों में रहते हैं। जहां कही भी हिंदू धर्म का कोई कार्य हो रहा हो और दिग्गी राजा ना बोले ऐसा कैसे हो सकता है। फिलहाल मध्य प्रदेश के धार जिले के भोजशाला में एएसआई सर्वे चल रहा है जिसकी शुरुआत बीते दिन ही हुई है। अब इस सर्वे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बड़ा बयान दे दिया है। भोजशाला पर दिग्विजय ने दिया बड़ा बयान दिग्विजय सिंह ने कहा कि “इनके पास कोई मुद्दा है नहीं हर चुनाव में ये लोग हिंदू मुस्लिम करते हैं।अभी सर्वे करने की बात सूझी है। ये सर्वे का सही समय है?” पूर्व सीएम ने भोजशाला के इस सर्वे को भी राजनीति से जुड़ दिया है। बता दें कि लोकसभा चुनाव आने वाले हैं और दिग्गी राजा अब भोजशाला के मुद्दे को राजनैतिक बता रहे हैं। नेता सर्वे में कानून और संविधान की बात भी कर रहे हैं कि सर्वे संविधान के अनुसार होना चाहिए लेकिन हम आपको ये साफ कर देते हैं कि भोजशाला का एएसआई सर्वे कराने का फैसला किसी राजनैतिक पार्टी का नहीं हैं ये फैसला हाई कोर्ट द्वारा किया गया है और संविधान के हिसाब से लिया गया है। कोर्ट के द्वारा ही सर्वे की डेट और उसकी रिपोर्ट सबमिट करने की डेट तय की गई हैं। दिग्विजय के बयान का दिया जवाब अब जब दिग्विजय सिंह ने इस पर सियासी बयान दिया तो बीजेपी के नेता इस का जवाब कैसे न दे, नेता के इस बायान के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि “सर्वे पर आपत्ति करना दिग्विजय की तुष्टिकरण की राजनीति है।” यह भी पढ़ें- क्या है भोजशाला का पूरा इतिहास, जानिए पूरा विवाद

World water day: मोहन नागर मध्य प्रदेश के ‘जल पुरुष’

world water day

आज विश्व जल दिवस (World water day) है। आज के जलवायु परिवर्तन को देखते हुए अक्सर जनता को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाता है। इसी तरह की जागरुकता फैलाते हैं मध्य प्रदेश के बैतूल के रहने वाले समाज सेवक मोहन नागर जो लगातार 32 वर्षों से बैतूल में जल संरक्षण से जुड़ी सेवाएं दे रहे हैं। नागर ने अब तक कई जल संरक्षण अभियानों पर काम किया है और कई नदियों को पुनर्जीवित किया है। इस विश्व जल दिवस (World water day) पर आयुध की टीम ने प्रदेश के जल पुरुष कहे जाने वाले मोहन नागर से बात की। प्रश्न- आपको जल संरक्षण करने की प्रेरणा कैसे मिली? मोहन नागर- मैं जब बैतूल जिले में आया तो देखा कि क्षेत्र में बारिश तो पर्याप्त है पर जल का संरक्षण करने का कोई साधन नहीं हैं जिसके कारण जल पहाड़ों से बहकर नालों में चला जाता है ,उस वक्त मेरे मन में जल संरक्षण करने का विचार आया। जिसके बाद हम गांव गांव जाकर चौपाल लेते थे ताकी लोगों को इसके प्रति जागरूक कर जल संरक्षण का कार्य आगे बढ़ांए। हम ने सबसे पहले नदियों में बोरी बंधन का कार्य किया और लोगों को इस के फायदे बताए। इसके बाद हमने पहाड़ों पर जल संरक्षण के लिए गंगावतरण अभियान चलाया जिससे हम पहाड़ों पर बारिश के पानी को इक्ट्ठा कर सकें। प्रश्न- अभी तक किन अभियानों पर कार्य कर चुके हैं? मोहन नागर- हमारे मुख्य अभियानों में गंगावतरण अभियान है। भारत के 75वे अमृत महोत्सव में हमने 75 पहाड़ों पर गंगावतरण अभियान किया था। हमने नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए भी कई अभियान चलाए हैं साथ ही मां ताप्ती के लिए अभियान चलाया जिसमें हमने ताप्ती बेसिन के पास वृक्षारोपण और बीजारोपण किया। प्रश्न- आपने ऐसे जनजाती क्षेत्रों में कार्य किस तरह किया जहां आदिवासी समुदाय से संपर्क करना मुश्किल माना जाता है? हम जब ऐसे क्षेत्रों में जाते थे तो लोगों को जागरुक करते थे कि उनके क्षेत्र में होने वाली जल की कमी को वह खुद ही पूरा कर सकते हैं। हमने उनके लिए जल संरक्षण का काम किया और आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी तो जनजाती क्षेत्रों में लोगों को हम पर विश्वास होने लगा जिसके बाद लोग सैकड़ों की संख्या में उनका साथ देने आने लगे। प्रश्न- वर्तमान में जल संरक्षण के लिए क्या कार्य कर रहे हैं और भविष्य में क्या करने वाले हैं? हम और हमारी भारती संस्थान गांव में बच्चों की शिक्षा और नदी संरक्षण का कार्य कर रहे हैं। क्षेत्रों में बीजारोपण और वृक्षारोपण का कार्य कर रहे हैं। हमने पहाड़ियों को हरा भरा करने का लक्ष्य लिया था, इन पहाड़ियों पर पहले घने जंगल हुआ करते थे पर अब ऐसा नहीं है जिसके पास हमने साल 2016 में इन पहाड़ियों को हरा भरा करने का संकल्प लिया था और आज वो पहाड़ी हरी भरी होने की राह पर है। लोगों को खुद जल के संरक्षण के लिए अब कार्य करना होगा जिसके लिए हम लगातार उन्हें जागरुक करने का कार्य कर रहे हैं। यह भी पढ़ें- क्या है भोजशाला का पूरा इतिहास, जानिए पूरा विवाद

मंदिरों पर टैक्स लगाने के पीछे कर्नाटक सरकार का उद्देश्य

कर्नाटक

लोकसभा चुनाव के पहले कर्नाटक की सिद्धरमैया सरकार ने मंदिरों पर टेक्स लगाने का प्रवधान बना दिया है। जिसके अनुसार मंदरों को वहां भक्तों के द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे का 10 प्रतिशत सरकार को देना होगा। क्या है ये कानून जानिए इसका मंदिरों पर क्या होगा प्रभाव। किस कानून के तहत लिया फैसला सबसे पहले आपको ये बताते हैं कि आखिर ये कर किस कानून के तहत लगाया जा रहा है- दरअसल बुधवार को सिद्धरमैया सरकार ने एक विधियक विधानसभा में पास कराया है,इसका नाम है हिंदू धार्मिक संस्थाएं और धर्मार्थ बंदोबस्ती विधेयक 2024, आपको बता दें कि ये बिल विधानसभा में तो पास हो चुका है लेकिन अभी पूरी तरह से कानून नहीं बना है। इस के मुताबिक राज्य के ऐसे मंदिर जहां 1 करोड़ रूपए से ज्यादा का चढ़ावा आता है उन मंदिरों को इसका 10 प्रतिशत सालाना सरकार को देना होगा। वहीं ऐसे मंदिर जिनमें 10 लाख से लेकर के 1 करोड़ तक का चढ़ावा आता है उन्हें सरकार को सालाना इसका 5 फीसदी कर के रूप में देना होगा। कर्नाटक सरकर का उद्देय राज्य सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य ‘ए’ कैटेगरी के मंदिरों के अधिकार क्षेत्र में तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षा उपलब्‍ध करना है। लेकिन केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता राजीव चंद्रशेखर ने इस विधेयक को लेकर राज्य की कांग्रेस सरकार पर जमकर हमला किया है। उन्‍होंने कहा कि ऐसा करके पार्टी एक नये निचले स्तर तक गिर गई है। साथ ही बीजेपी कर्नाटक सरकार पर मंदिरों के पैसों से अपना ‘खाली खजाना’ भरने की कोशिश करने का आरोप लगा रही है। यह भी पढ़ें- अरविंद केजरीवाल को आज भी नहीं मिली HC से राहत

अरविंद केजरीवाल को आज भी नहीं मिली HC से राहत

अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की शराब घोटाले मामले में आज हिसकोर्ट में सुनवाई हुई। और आज भी सीएम को कोर्ट से राहत नहीं मिली बल्कि उनके वकील के द्वारा नेता की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी गई। आज की इस सुनवाई ने कोजरीवाल के केस को अलग ही मोड़ दे दिया है आज इस लेख में हम बात करेंगे कि सुनवाई में क्या कुछ खास रहा। हो सकती है अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी सुनवाई में दोनों ही पक्षों की दलीलें पेश की कई। इस दौरान सीएम वहा उपस्थित नहीं हुए और उनकी जगह उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी और विक्रम चौधरी पेश हुए। बता दें कि केजरीवाल ने शराब नीति केस में money laundering मामले में ईडी के द्वारा दिए गए समान को चुनौती दी थी जिसे लेकर आज ये सुनवाई हुई। इस सुनवाई में केजरीवाल के वकील ने अदालत से उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी लेकिन हाईकोर्ट ने ये मांग नहीं मानी ,पर हां इस मामले को लेकर कोर्ट ने ईडी से जवाब मांगा है। वकील ने संजय सिंह का दिया उदाहरण कोर्ट ने जब पूछा कि अरविंद केजरीवाल कोर्ट में पेश क्यों भी हो रहे है क्या बात है जो उन्हें ऐसा करने से रोक रही है ,इसके जवाब में उनके वकील कहते है कि वो पेश हो जायेंगे लेकिन उन्हें इसके लिए सुरक्षा की जरूरत है। इस दौरान वह संजय सिंह के मामले का उदाहरण देते हैं और कहते है कि केजरीवाल को भी ईडी ऐसी ही गिरफ्तार कर लेगी। ईडी से कोर्ट ने पूछा कि क्या अभी कोई सामान जारी हुआ है तो वकील ने बताया कि कल के लिए समन जारी हुआ है ।जब कोर्ट में पूछ गया कि कल वो हाजिर होंगे तो वकील ने इंकार कर दिया, और कहा कि चार्जशीट दायर हो चुकी है तो अब ईडी को कोई समन भेजने की जरूरत नहीं है। कब होगी अरविंद केजरीवाल की अगली सुनवाई इसी मामले में कोर्ट ने ईडी से भी बात की हाईकोर्ट ने ईडी को मौजूदा याचिका पर जवाब देने के लिए दो हफ्तों का समय दिया है । ईडी ने नेता को अपना जवाब रखने के लिए 1 हफ्ते का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी, देखना ये है कि बाकी दिनों की तरह ही क्या 1 महीने के बाद रखी इस सुनवाई में भी क्या केजरीवाल उपस्थित नहीं होंगे। यह भी पढ़ें- पीएम मोदी पर 24 घंटे के अंदर हुई दो शिकायतें

कर्नाटक में हनुमान चालीसा मामले में प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है

हनुमान चालीसा

कर्नाटक बेंगलुरू में एक हिंदू युवक की हनुमान चालीसा बजाने पर बेरहमी से पिटाई कर दी गई। मामला बेंगलुरू के नगरथपेट क्षेत्र का है जहां मुकेश नाम का एक हिंदू युवक अपनी दुकान में हनुमान चालीसा बजा रहा था तभी लगभग आधा दर्जन लोगों ने मिलकर उसकी जमकर पिटाई कर दी जिसमें युवक को गम्भीर चोट आई। जिसके बाद बीजेपी नेताओं सहित व्यापारी के परिजनों ने मिलकर चालीसा पढ़ कर प्रदर्शन किया जिसमें पार्टी के कई नेताओं को जेल भेज दिया गया। क्या है हनुमान चालीसा से जुड़ा पूरा मामला मामला कर्नाटक के नगरथपेट का है जहां शाम करीब 6 बजे मुकेश नामक एक युवक अपनी मोबाईल की दुकान में बैठा था।उसने अपने म्यूजिक सिस्टम में हनुमान चालीसा चलाया जिसके बाद लग भग आधा दर्जन युवक वहां आ गए। उन्होंने मुकेश से चालीसा बंद करने को कहा लेकिन मुकेश ने मना कर दिया तो युवकों ने उनके साथ मारपीट करना शुरू कर दिया। कथित तौर पर कहा जा रहा है कि मुकेश अज़ान के समय हनुमान चालीसा बजा रहा था जिससे भीड़ नाराज़ हो गई और मारपीट पर उतर आए। प्रदर्शन पर उतरे लोग व्यापारी के साथ हुई मारपीट का विरोध करने के लिए बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन में बीजेपी के कई नेता भी मोजूद रहे सभी ने हनुमान चालीसा पढ़ कर प्रदर्शन किया जिसमें दो नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। वहीं मामले में अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है वहीं कुछ आरोपी अब भी फरार हैं जिनकी पुलिस खोज कर रही है इसी देरी के कारण प्रदर्शन थम नहीं रहा है और लोग जय श्री राम के नारे लगा कर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह भी पढ़ें- पीएम मोदी पर 24 घंटे के अंदर हुई दो शिकायतें