Aayudh

कैसे हुई सूर्यवंश और रघुकुल की उत्पत्ति, देखिए श्रीराम की सम्पूर्ण वंशावली

सूर्यवंश , रघुकुल

आने वाली 22 जनवरी को भगवान श्री राम के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा होने वाली है। समारोह को लिए अयोध्या में जोरों शोरों से तैयारियाँ की जा रही हैं। आपको यह तो पता होगा कि भगवान श्री राम का जन्म सूर्यवंश और रघुकुल के कहे जाते हैं। पर आज हम जानेंगे कि आखिर सूर्यवंश और रघुकुल की उत्तपत्ति कैसे हुई। हम यह तो जानते हैं भगवान श्री राम के पिता दशरथ थे और उनके पिता अज थे। अब हम आपको भगवान राम की वंशावली बताएंगे कि किस तरह से उनका जन्म ब्रम्हा जी की 67वी पीढ़ी में हुआ है। भगवान श्री राम का जन्म रघुकुल में हुआ था।राजा कुकुत्स्थ के पुत्र थे राजा रघु। ऐसे हुई सूर्यवंश और रघुकुल की शुरूआत राजा रघु से रघुकुल की शुरूआतहुई । रघु के पुत्र थे प्रवृध्द , प्रवृध्द के पुत्र थे नाभाग और नाभाग के पुत्र थे राजा अज। अगर बात की जाए सूर्यवंश की तो ब्रम्हा जी के पुत्र मारीचि थे और उनके पुत्र कश्यप हुए। कश्यप के पुत्र विवस्वान और उनके पुत्र थे वैवस्वत मनु । वैवस्वत से ही सूर्यवंश की उत्पत्ति मानी जाती है। वैवस्वत मनु के 10 पुत्र थे जिनमें से एक थे इक्ष्वाकु। इन्हीं राजा इक्ष्वकु से इक्ष्वाकु वंश की उत्पत्ति हुई। वह कौशल देश के राजा थे जिसकी राजधानि साकेत थी। बाद में साकेत का ही नाम अयोध्या हुआ जिसकी स्थापना राजा इक्ष्वाकु ने की। यह भी पढ़ें- प्रेमानंदजी महाराज के बचपन का ये अनसुना किस्सा जानकर हो जाएंगे हैरान

शिवराज मामा के नए घर की नेम प्लेट के क्या हैं सियासी मायने

शिवराज मामा

आपने दुनिया भर की राजनीति में राष्ट्रपति का पद तो सुना होगा लेकिन भारत इकलौता ऐसा देश है जहाँ राष्ट्रपति के साथ साथ एक व्यक्ति को राष्ट्रपिता की पदवी भी दी गई थी। वहीं अब मध्य प्रदेश की राजनीति में भी एक ऐसा बड़ा नाम है जिसे प्रदेश के मामा की पदवी मिली है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की। जिन्हें एक लम्बे कार्यकाल के दौरान मामा की पदवी उनकी ही जनता ने दी। शिवराज मामा ने घर के साथ बदली नेम प्लेट अब जब प्रदेश की सत्ता मुख्यमंत्री डॉ मोहन योदव के हाथों में तो मामा को सीएम हाउस खाली करना पड़ा। 27 दिसम्बर को शिवराज मामा सीएम हाउस से 74 बंगला में शिफ्ट हुए हैं। जहाँ शिफ्ट होते ही पूर्व सीएम ने अपनी एक नई नेम प्लेट बनवा ली। शिवराज सिंह चौहान ने अपनी नेम प्लेट पर जो लिखवाया उसे देख कर हर कोई दंग रह गया है। क्योंकि इस प्लेट पर उनका नाम शिवराज सिंह चोहान नहीं लिखा है बल्कि वह लिखा है जिसे कह कर प्रदेश का हर व्यक्ति उन्हें पुकारता है। नेम प्लेट पर नाम के जगह लिखा यह 74 बंगला वाले नए सरकारी आवास के बाहर शिवराज सिंह चौहान ने नेम प्लेट पर मामा का घर लिखवाया है। अब इस नेम प्लेट की हर कोई चर्चा करता दिखाई दे रहा है जब इस बात को लेकर पूर्व सीएम से पूछा गया तो उन्होंने जबाव दिया कि उनका तो जन्म ही जनता की भलाई के लिए हुआ है और वो हमेशा प्रदेश के व्यक्तियों के लिए मामा और भैया होने का फर्ज निभाएंगे। आगे वह कहते हैं कि उनके द्वारा चलाई गई किसी भी योजना को बंद नहीं किया जाएगा भाजपा सरकार इन सभी योजनाओं को आगे लेकर जाएगी। यह भी पढ़ें- प्रेमानंदजी महाराज के बचपन का ये अनसुना किस्सा जानकर हो जाएंगे हैरान

प्रेमानंदजी महाराज के बचपन का ये अनसुना किस्सा जानकर हो जाएंगे हैरान

प्रेमानंदजी महाराज

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक संत काफी ज्यादा मशहूर चल रहे हैं। जिनको सुनने वालों की तादाद में बुजुर्गों से भी ज्यादा युवान लोग शामिल हैं। बाबा के वचनों में एक ऐसा जादू है जो हर किसी को वैराग्य की ओर अग्रसर कर सकने में सामर्थ्य रखता है। हम बात कर रहें हैं वृंदावन के महान संत प्रेमानंदजी महाराज की। जिनके बारे में आपने ये तो ज़रूर सुना होगा कि उनकी दोनों किडनी फेल हैं जिसके कारण उनका डायलेसिस होता है। लेकिन आखिर पूज्य महाराज श्री के अंदर प्रिया प्रियतम के लिए ये अनन्य भक्ति कैसे आई किस तरह से और कब बाबा ने संत बनने का निर्णय लिया। प्रेमानंदजी महाराज का जन्म बाबा का जन्म उत्तरप्रदेश में कानपुर के पास बसे अखरी गांव में ब्राहण कुल के अंदर हुआ। परिवार में हमेशा से ही धार्मिक माहौल मिला था। उनके दादाजी भी एक संत थे। बाबा के पिता का नेम श्री शंभू पांडे और माता का नाम श्रीमति रामा देवी था। साथ ही जब पूज्य महाराज जी पांचवी कक्षा में पड़ा करते थे तब ही उन्हें करीब 15 चालीसा कंठस्थ याद थे। बचपन से थी बाबा का यह विचार वह अक्सर एक बात सोचा करते थे कि मैं सबसे अधिक माँ को प्रेम करता हूँ पर निश्चित ही एक ना एक दिन माँ भी मुझे छोड़ कर चली जाएंगी , पिताजी भी चले जाएंगे और भाई भी फिर मेरा क्या होगा मैं क्या करूंगा। तो उनके मन में फिर एक ही विचार आया कि केवल भगवान ही हैं जिससे वह संबंध बना सकते हैं क्योंकि भगवान उनसे संबंध कभी नहीं तोड़ेंगे और सदैव उनके साथ रहेंगे। 13 वर्ष की आयु में प्रेमानंदजी महाराज ने छोड़ा घर विचार करते करते ही जब वह 9 वी कक्षा में पहुँचे थे तब उनकी उम्र करीब 13 वर्ष थी इस दौरान उन्होंने अपनी माँ से भी इस विषय पर बात की पर माँ ने सोचा कि शायद बालपन के कारण वह ऐसा कह रहे थे पर एक सबह ठीक तीन बजे महाराज श्री को ऐसी उत्कंठा हुई कि वह अपने घर से भगवत प्राप्ती के उद्देष्य को साथ लेकर भाग गए। अगर आपको महाराज जी के बचपन से जुड़ी ये वीडियो अच्छी लगी हो तो हमें कॉमेंट करके ज़रूर बताए साथ ही उनसे जुड़े किसी भी सवाल को भी आप हमसे पूछ सकते हैं। यह भी पढ़ें- देखिए रामलला की मूर्ति से जुड़ी बड़ी अपडेट

देखिए रामलला की मूर्ति से जुड़ी बड़ी अपडेट

रामलला

जल्द वो घड़ी आने वाली है जिसका हर सनातनी व्यक्ति एक लम्बे अरसे से इंतजार कर रहा था। अब राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में कुछ ही दिन बाकी हैं। 22 जनवरी को रामलला का प्राण प्रतिष्ठा समारोह है जिसकी तैयारियाँ अब अपने अंतिम मोड़ पर हैं। राम मंदिर में ऐसी होगी व्यवस्था राममंदिर में लगभग 50 हजार भक्तों को रुकने की व्यवस्था की गई है। राम भक्तों के सैलाब को संभालने के लिए मंदिर में कुल 44 गेट बनाए गए हैं। जिसमें मंदिर के तल क्षेत्र में 14 गेट मौजूद रहेंगे और उपरी तल पर 12 गेट बनाए गए हैं। रामलला के दर्शन के लिए चलेंगी देश भर में इतनी ट्रेन मंदिर के निर्माण के बाद से ही रामलला के दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगने लगेगी। भक्तों की सहूलियत के लिए 25 जनवरी से 25 मार्च तक कुछ स्पेशल ट्रेन चलने वाली हैं। देश भर के 430 शहरों से 35 ट्रेने चलाई जाएगी। जिससे रोजाना करीब 50 हजार लोग अयोध्या आ सकेंगे। ऐसी होगी रामलला की मूर्ति मंदिर में विराजित करने हेतु मूर्ति का चयन भी रविवार को कर लिया गया है। बतादें कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 29 दिसम्बर को हुई मीटिंग में सदस्यों ने 3 मूर्तियों पर अपनी मोहर लगा दी है। मंदिर में रामलला की मूर्ति लगभग 51 इंच लम्बी रहेगी। इस मूर्ति में श्रीराम 5 साल के राजकुमार बालक के रूप में दिखाई देंगे। यह भी पढ़ें- अयोध्या के राम मंदिर में नहीं होंगे माँ सीता के दर्शन

NEW YEAR 2024: साल की शुरूआत में किस राशी की खुलेगी किस्मत

NEW YEAR 2024

नए साल (NEW YEAR 2024) के आने के साथ ही लोगों के मन में भी ये जानने की जिज्ञासा आती है कि यह साल उनके लिए कैसा रहने वाला है। ये साल उनके जीवन पर कितना प्रभाव डालेगा इस बात का उत्तर तो इनकी राशियाँ ही दे सकती हैं। इस लेख के माध्यम से जानिए कि ये साल किन राशियों के लिए रहना वाला है शुभ, किसको मिलेगी जीवन में तरक्की और किस के जीवन में बढ़ेंगी परेशानियाँ । मेष राशी साल 2024 (NEW YEAR 2024) मेष राशी वालों के लिए ठीक ठाक रहेगा। साल की शुरूआत से ही मेष राशी में बृहस्पति का गोचर रहेगा। यह गोचर अप्रेल के अंत तक रहने वाला है। मेष राशी के जातकों को इस दौरान उन्नति के नए अवसर मिल सकते हैं। पर दिसम्बर अंत तक जातक को अपने स्वास्थ का ख्याल रखना होगा। वृषभ राशी साल की शुरूआत में वृषभ राशी पर बुध और शुक्र दोनों की दृष्टी रहेगी । लेकिन राशी के जातकों के कार्यों की सफलता लेकर आएगी। इस राशी के जातकों को मार्च और अप्रेल के समय धन के योग हैं।जातकों के सितंबर में पढ़ाई के क्षेत्र में समस्या आ सकती है। मिथुन राशी मिथुन राशी वालों के लिए फरवरी के समय में आय के साधन कम रहेंगे। इस दौरान जातक को अधिक कार्य और कठिन परिश्रम करना पढ़ सकता है। सिंतंबर से नवम्बर महीने के बीच आय में बढ़ोतरी हो सकती है । कर्क राशी यह साल कर्क राशी वालों के लिए शुरूआत में थोड़ी समस्या लेकर आ सकता है। जातक को सलाह दी जाती है कि वह साल की शुरूआत में करीब अप्रेल तक अपने गुस्से को काबू में रखे और जल्दबाजी में कोई फैसला ना ले। साल के अंत कर कार्यक्षेत्र में सफलता मिल सकती है। सिंह राशी सिंह राशी के जातकों के लिए साल 2024 (NEW YEAR 2024) अच्छा रहने वाला है। साल की शुरूआत में इस राशी पर बृहस्पति की 5वीं और शनि की सातवी दृष्टी रहने वाली है। इस राशी के जातकों को कार्यों में सफलता मिलेगी परन्तु साल के अंत तक स्वास्थ से जुड़ी समस्या हो सकती है। कन्या राशी साल की शुरूआत में कन्या राशी पर केतु का संचार रहेगा। साल के शुरुआती चार महीनों में धन संबंधित परेशानियाँ रह सकती हैं। घर परिवार में आपसी मतभेद भी हो सकते हैं। इस साल आपको अपने रिश्तों को सहेजकर रखना होगा। यह भी पढ़ें- अयोध्या के राम मंदिर में नहीं होंगे माँ सीता के दर्शन

अयोध्या के राम मंदिर में नहीं होंगे माँ सीता के दर्शन

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्म भूमि पर एक लम्बे अर से के बाद भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा आने वाली 22 जनवरी को होने वाली है। राम मंदिर के इस भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं। इसी बीच मंदिर से जुड़ी एक बड़ी बात सामने आई है । जिस तरह से हर मंदिर में हमें श्रीराम और मां सीता दोनों के दर्शन साथ होते हैं श्री राम मंदिर में ऐसा नहीं होगा। मंदिर में माँ सीता की मूर्ति राम के साथ नज़र नहीं आए गी। जब इस बात को लेकर मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से बात की उन्होंने इसके पीछे की वजह बताई। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव ने बताई पीछे की वजह चंपत राय का कहना है कि राम जन्म भूमि पर बनने वाले इस श्रीराम मंदिर में भगवान की बाल स्वरूप में स्थित मूर्ति विराजमान होगी । आपको बतादें कि श्रीराम के बाल स्वरूप में माँ सीता नहीं थी जिसके कारण ही मुख्य मंदिर के गर्भगृह में माँ सीता की मूर्ति मौजूद नहीं होगी। यह भी पढ़ें- कमलेश्वर डोडियार पर क्यों दर्ज हैं 16 मामले, जानिए कुछ अनसुने किस्से आगे ट्रस्ट के महासचिव ने बताया कि श्री राम का ये मंदिर 70 एकड़ परिक्षेत्र में बन रहा है। जिसमें मुख्य मंदिर 360 फिट लंबा और 235 फिट चौड़ा है। मंदिर में जिस गर्भ गृह के अंदर श्री राम लला विराजित होंगे वहां जाने के लिए 32 सीढ़ियां बनाई गई है। मंदिर का शिखर 161 फिट ऊंचा होगा। परिसर में होंगे सात और मंदिर अभी तक मंदिर का ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह से तैयार है और पहली मंजिल का भी 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है वहीं दूसरी ओर तीसरी मंजिल का काम भी जल्द ही शुरू होने वाला है। मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अलावा और सात मंदिर बनाए जा रहे हैं इनमें ब्रहर्षी वशिष्ठ, ब्रहर्षि विश्वामित्र, महर्षि वाल्मीकि, अगस्त्य मुनि, केवट , निषादराज और माता शबरी के मंदिर शामिल होंगे। यह भी पढ़ें- क्या हुआ जब पीएम मोदी अचानक पहुँच गए अयोध्या की मीरा के घर

क्या हुआ जब पीएम मोदी अचानक पहुँच गए अयोध्या की मीरा के घर

जब प्रधानमंत्री अयोध्या के दौरे पर थे तो वह अचानक मीरा के घर राम मंदिर का आमंत्रण देने पहुँच गए। घर पहुँच कर पीएम मोदी ने मीरा से कहा कि क्या बनाया है जब मीरे ने कहा कि चाय बनी है तो यह सुनकर मोदी भी कह उठे कि जल्दी दो ठंडा मौसम भी है। इतना ही नहीं मोदी ने मीरा के बच्चों को भी खूब दुलार किया। साथ ही इस परिवार के तार रामायण के निषाद राज से भी जुड़े हुए हैं लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर ये मीरा है कौन जिसके घर पीएम मोदी अचानक से पहुँच गए। और इस परिवार का आखिर निषाद राज से क्या संबंध है। अयोध्या की मीरे के घर पहुँचे पीएम मोदी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या दौरे पर गए तो वह अचानक से एक मीरा नामक महिला से मिलने के लिए उनके घर पहुँच गए। दरअसल यह महिला उज्ज्वला योजना की लाभार्थी हैं। मीरा और उनके परिवार को बिल्कुल भी भनक नहीं थी कि प्रधानमंत्री मोदी उनके घर आएं गे। लेकिन हां उनको यह पता था कि आज उनके घर कोई नेता आने वाला है जिसके लिए उन्हों ने घर पर खाने का भी इंतजाम कर रखा था पर पीएम मोदी को आने के आधे घंटे पहले पता चला कि उनके घर खुद प्रधानमंत्री मोदी आ रहे हैं। इस खबर को सुनकर मीरा और उनके घर वालों के होश उड़ गए। चाय थोड़ी मीठी हो गई है : मोदी मोदी उनके घर आकर बैठे और परिवार का हाल चाल पूछा साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना उज्ज्वला योजना सभी के बारे में बात की और लाभ के बारे में पूछा। जब मोदी ने मीरा से पूछा कि क्या बनाया है तो उन्होंने बताया कि चाय । बस फिर क्या था चाय का नाम सुन कर मोदी ने तुरंत कहा कि जल्दी ले आओ ठंड है । ये भी पढ़ें- कमलेश्वर डोडियार पर क्यों दर्ज हैं 16 मामले, जानिए कुछ अनसुने किस्से जब मोदी ने चाय पी तो मीरा से कहा कि चाय थोड़ी मीठी हो गई है पर अच्छी है। मीरा के घर में बड़े बूढ़ों से बात करने के साथ ही मीरा के बच्चों को भी खूब लाड़ लड़ाया। मोदी ने परिवार को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी आमंत्रित किया बतादें कि मीरा और उनका परिवार रामायण काल के निषाद राज की जाती के बताए जाते हैं शायद इस कारण ही प्रधानमंत्री मोदी ने उनका घर चुना। ये भी पढ़ें- फोर्ड मोटर्स ने किया था रतन टाटा का अपमान, फिर ऐसे लिया टाटा ने बदला

कमलेश्वर डोडियार पर क्यों दर्ज हैं 16 मामले, जानिए कुछ अनसुने किस्से

मध्य प्रदेश की सैलाना विधानसभा सीट से विधायक बने कमलेश्वर डोडियार के बारे में तो आपने सुना ही होगा ,ये वही विधायक हैं जो जब चुनाव जीते तो उन्हें राजधानी भोपाल बुलाया गया लेकिन क्योंकि इनके पास कार नही थी तो ये अपने बहनोई की मोटर साइकिल से ही भोपाल पहुंच गए। इनके विधायक बनने की कहानी तो आपने कई जगह सुनी होगी पर आज हम आपको इनसे जुड़ी कुछ ऐसे बात बताने वाले हैं जो सिर्फ उनके बेहद करीब रहने वाले लोग ही जानते हैं ।  कमलेश्वर डोडियार करते थे वेटर का काम कमलेश्वर हमेशा से ही एक बड़ा सपना देखने वाले व्यक्ति रहे हैं । बतादें कि कमलेश्वर 6 भाई और 3 बहनों में सबसे छोटे हैं । उनके माता और पिता मजदूरी करते हैं और उसी पैसों से कमलेश्वर का घर चलता है। कमलेश्वर ने विधायक बनने के लिए कई पापड़ बेले है उन्होंने कभी अपनी मां के साथ मिलकर मजदूरी की तो कहीं होटलों में वेटर का काम किया।  ये भी पढ़ें- फोर्ड मोटर्स ने किया था रतन टाटा का अपमान, फिर ऐसे लिया टाटा ने बदला कमलेश्वर ने घर में आर्थिक संकट होते हुए तो कभी अपनी पढ़ाई नहीं रुकने दी। उनकी पांचवी कक्षा तक की पढ़ाई गांव में ही हुई जिसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह सैलानाचले गए। उन्होंने अपनी 12वीं की पढ़ाई रतलाम में पूरी की और फिर वहीं से उन्होंने बीए अंग्रेज़ी की डिग्री प्राप्त हुई। कमलेश्वर ने इसके साथ ही वकालत की पढ़ाई को भी पूरा किया। कमलेश्वर ने ये सारी डिग्रियां और अपनी अब तक की जिंदगी टीन की चादर वाले कच्चे घर में रहकर ही बताई है। बराक ओबामा से प्रभावित है जीवन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि कमलेश्वर बराक ओबामा से प्रभावित हैं कमलेश्वर बताते हैं, ”मुझे उनका संघर्ष काफ़ी हद तक अपनी तरह का लगता है । उनका परिवार भी कीनिया से आकर अमेरिका में बसा और तमाम क़िस्म के भेदभाव का सामना उन्होंने किया और उसके बाद वो उस मुक़ाम पर पहुंचे”।  कमलेश्वर हमेशा से ही आदिवासी समाज के लिए एक मसीहा बनकर कार्य करते आए है। उन्होंने अब तक उनके हो साथ रहकर सभी बातों को गौर से देखा और परखा है जिसके कारण ही राजनैतिक गलियारों में उनसे जलने वालों की कतार भी बड़ी है इसी के चलते इन पर 16 मामले दर्ज हैं और ये 11 बार जेल भी जा चुके हैं। ये भी पढ़ें- राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान विशाल और बहुआयामी है

फोर्ड मोटर्स ने किया था रतन टाटा का अपमान, फिर ऐसे लिया टाटा ने बदला

आपने फिल्मों में भी कई बार सुना होगा कि किस तरह हीरो अपनी मेहनत और लगन से अपने बिगड़ते हुए काम को भी बनाने में सफल हो जाता है। साथ ही किस तरह वह अपने दुश्मनों को मज़ा चखा देता है। कुछ ऐसी ही कहानी टाटा ग्रुप के मालिक रतन टाटा की भी है। ये भी पढ़ें- श्री कृष्ण के भक्तों के लिए एक अद्भुत खबर, द्वारका नगरी के दर्शन अब आसान दरअसल जब शुरूआती दिनों में टाटा मोटर्स की सेल अच्छी नहीं हुआ करती थी तब टाटा मोटर्स के पैसेंजर कार डिवीजन को बेचने की नौबत आ गई थी उस वक्त इसे बेचने के लिए रतन टाटा ने अमेरिकन कंपनी फोर्ड मोटर्स के मालिक से बात की लेकिन बदले में उन्होंने रतन टाटा का ही मज़ाक उड़ा दिया जिसका बदला रतन ने 9 साल बाद लिया था। रतन टाटा का फोर्ड मोटर्स के मालिक ने उड़ाया मज़ाक बात 90 के दशक की है जब टाटा द्वारा इंडिको लॉन्च किया गया लेकिन उसकी खरीददारी उम्मीद के अनुसार नहीं हो पाई जिसके बाद टाटा ग्रुप ने टाटा मोटर्स के पैसेंजर कार डिवीजन को बेचने का फैसला कर लिया था । उसे बेचने के लिए रतन टाटा ने कार बनाने वाली अमेरिकन कंपनी फोर्ड मोटर्स के मालिक बिल फोर्ड से बात की जिस पर बिल ने रतन से कुछ ऐसा कह दिया कि टाटा ने अपना फैसला ही बदल दिया दरअसल बिल फोर्ड ने कहा कि तुम कुछ जानते नहीं हो , तुमने पैसेंजर कार डिवीजन की शुरूआत ही क्यों की , अगर मैं तुम्हारे साथ ये डील करता हूँ तो ये तुम पर बहुत बड़ा एहसान होगा। बस फिर क्या था बिल की यह बात सुनकर रतन ने अपना पैसेंजर कार डिवीजन बेचने का फैसला बदल दिया और टाटा ने इस तरह लिया था बदला वह दिन रात उसी को आगे बढ़ाने पर लगे रहे और देखते ही देखते उनकी कार की मांग दुनिया भर में बढ़ने लगी । इस किस्से के 9 साल बाद तो यह स्थिति थी कि दुनिया की टॉप कार्स की लिस्ट में भी उनकी कारों का नाम शामिल था। वहीं फोर्ड मोटर्स को दिन प्रतिदिन असफलता देख नी पड़ रही थी जिसके बाद फोर्ड कंपनी को मदद करने का जिम्मा टाटा ने लिया और उनकी जैगुआर और लैड रोवर कार खरीद ली इस तरह से टाटा ने भी अपना बदला पूरा कर लिया । बतादें कि इस डील को करने के लिए टाटा अमेरिका नहीं गए बल्कि बिल को भारत बुलाया डील होने के बाद बिल फोर्ड ने खुद कह कि आपने मुझ पर बड़ा एहसान किया है। ये भी पढ़ें- नए साल में अपनाएं नए लक्ष्य

इस्तीफा देते समय जेपी नड्डा के लिए क्या बोले कैलाश विजयवर्गीय

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री बने कैलाश विजयवर्गीय ने अब अपने राष्ट्रीय महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया है। बतादें कि उनके कैबिनेट मंत्री बनने के बाद से ही उनके महासचिव के पद से इस्तीफा देने की चर्चा चल रही थी। कैलाश विजयवर्गीय ने इस्तीफा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा की मौजूदगी में दिया। इस नीति के तहत दिया इस्तीफा बतादें कि यह फैसला बीजेपी के सिद्धांत एक पद एक व्यक्ति के तहत लिया है। इस सिद्धांत के मुताबिक पार्टी में एक व्यक्ति एक समय पर एक ही पद पर रह सकता है। जिसके कारण जब कैलाश विजयवर्गीय को प्रदेश में कैबिनेट मंत्री के पद पर बैठाया तो उन्होंने अपने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया। कैलाश विजयवर्गीय ने जताया आभार इस्तीफा देते समय उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया उन्होंने उनकी टीम के साथ काम करने से बहुत कुछ सीखने की बात कही।बतादें कि कैलाश विजयवर्गीय महासचिव के पद पर रहकर बीजेपी के लिए बंगाल समेत कई राज्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। यह भी पढ़ें- मशहूर अभिनेता और राजनेता विजयकांत ने कोरोना के कारण तोड़ा दम उन्होंने बंगाल के चुनाव में बीजेपी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिसके बाद से ही वह एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार थे और पार्टी ने भी यह देखते हुए उन्हें मध्य प्रदेश के इंदौर-1 से टिकट दिया और वह जीते भी। इन सब के बाद अब विजयवर्गीय मोहन सरकार में कैबिनेट मंत्री पद की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यह भी पढ़ें- सीएम मोहन यादव ने गुना RTO अधिकारी और सीएमओ को किया सस्पेंड