राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह की पूरी जानकारी,जानिए कब क्या होगा

श्रीराम जन्मभूमि पर बने भव्य राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा सोमवार 22 जनवरी को होने वाली है। इसके पहले आज 16 जनवरी से ही इसकी शुरूआत हो जाएगी। दरअसल मूर्ति की प्रतिष्ठा से पहले कुछ विधि की जाती हैं। यह विधि 21 जनवरी तक चलेगी जिसकी जानकरी खुद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने दी। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की पूरी सूचि मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की विधि में 12 अधिवास होंगे। जिसमें 16 जनवरी को प्रायश्चित और कूर्म कुटी पूजन किया जाएगा। 17 जनवरी को मूर्ति मंदिर परिसर में लाई जाएगी। 18 जनवरी की शाम को तीर्थ पूजन और जल यात्रा होगी इसके साथ ही इस दिन जलाधिवास और गंधाधिवास होगा। 19 जनवरी को औषधाधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास और सायं काल में धान्याधिवास होगा। 20 जनवरी को प्रातः काल में शर्कराधिवास, फलाधिवास और सायं काल में पुष्पाधिवास होगा। 21 जनवरी को प्रातः काल में मध्याधिवास और सायं काल में शय्याधिवास होगा। बतादें कि सामान्य तौर पर सात अधिवास होते और न्यूनतम तीन अधिवास जरूरी होते हैं। 121 आचार्य होंगे राम मंदिर अनुष्ठान विधि में सम्मिलित मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा आगामी पौष शुक्ल कूर्म द्वादशी विक्रम संवत 2080 तदनुसार 22 जनवरी 2024 सामवार को होगी। जिसके के पूर्व विधि अनुष्ठान में 121 आचार्य होंगे। इस अनुष्ठान के संयोजक श्री गणेश्वर शास्त्री द्राविड और प्रमुख आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित होंगे। यह भी पढ़ें- राम मंदिर का शिखर निर्माण हुए बिना प्राण प्रतिष्ठा क्या शास्त्र सम्मत है ?
राम मंदिर का शिखर निर्माण हुए बिना प्राण प्रतिष्ठा क्या शास्त्र सम्मत है ?

जहाँ एक ओर कई राम भक्त इस तारीख का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं वहीं ऐसे भी कई लोग हैं जो इस तिथि का विरोध कर रहे हैं। मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए कई संतों को भी न्योता भेजा गया है पर ऐसे भी कई संत हैं जो मंदिर के शिखर के बिना प्राण प्रतिष्ठा होने को गलत बता हरे हैं। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि जब यही सवाल मुहूर्त निकालने वाले गणेश्वर शास्त्री से पूछा तो उन्होंने इसके पीछे की बात बताई। दो प्रकार से की जाती है मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तिथि का निर्धारण वाराणसी के रहने वाले गणेश्वर शास्त्री ने किया है। मंदिर का शिखर निर्माण हुए बिना प्राण प्रतिष्ठा सही है या नहीं इस सवाल पर गणेश्वर शास्त्री द्राविडजी ने कहा कि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा दो तरह से हो सकती है। एक मंदिर पूरा बनने के बाद और दूसरी मंदिर का निर्माण शेष रहने पर। क्या राम मंदिर के अधूरे निर्माण में हो सकेगी प्रतिष्ठा गणेश्वर शास्त्री का कहना है कि जहां मंदिर पूरा बनने के बाद प्राण प्रतिष्ठा होती है वहाँ मंदिर के ऊपर कलश प्रतिष्ठा संन्यासी के द्वारा की जाती है। यहाँ देव प्रतिष्ठा के साथ कलश प्रतिष्ठा होती है वहीं जहां मंदिर का निर्माण शेष हो वहां देव प्रतिष्ठा के बाद कलश प्रतिष्ठा किसी अच्छे मुहूर्त को देखकर की जाती है। प्रदीप ग्रंथ के 338 पत्र में लिखी है ये बात प्रदीप ग्रंथ के पत्र 338 का जिक्र करते हुए वह कहते हैं कि जब तक मंदिर में किवाड़ नहीं लगाए जाते, मंदिर के ऊपर छत नहीं होती, वास्तुशांति नहीं की जाती, ब्राहणों के भोजन नहीं होता, माषबलि और पायसबलि नहीं दी जाती तब तक मंदिर की प्रतिष्ठा नहीं होती। लेकिन ये सभी कार्य मुहूर्त को देखते हुए 22 जनवरी से पहले कर दिए जाएंगे। यह भी पढ़ें- राम मंदिर के करीब ही खरीद लिया अमिताभ ने करोड़ों का प्लॉट
राम मंदिर के करीब ही खरीद लिया अमिताभ ने करोड़ों का प्लॉट

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले श्री राम और उनकी नगरी अयोध्या का रंग फिल्मी जगत पर जोरों से चढ़ गया है। एक ओर संजय दत्त जय श्री राम का नारा लगाते दिखे तो दूसरी ओर बिग बी ने तो अयोध्या में घर बनाने की तैयारी कर ली। जी हां बॉलीवुड के बिग बी अमिताभ बच्चन अयोध्या में घर बन वा रहे हैं। अमिताभ बच्चन भी रंगे राम मंदिर के रंग में बतादें कि 22 जनवरी को होने वाले राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लिए हर कोई बेसब्री से इंतजार कर रहा है सभी के मन में एक ही आस है कि कब राम लला की प्राण प्रतिष्ठा हो और कब भक्त अपने प्रभु के दर्शन करने अयोध्या पहुँचे। इसी बीच अमिताभ बच्चन ने तो अयोध्या में बसने का प्लान बना लिया है। हिंदुस्तान टाईम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल ही में बिग बी ने अयोध्या के 7 स्टार प्रोजेक्ट द सरयू में एक प्लॉट खरीदा है। सरयू नदी के किनारे बन रहा घर द सरयू का कंस्ट्रक्शन वर्क मुम्बई के द हाऊस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा नामक डेवलपर्स को दिया गया है। बतादें कि यह जगह सरयू नदी के किनारे पर है और राम मंदिर से महज़ 15 मिनट की दूरी पर स्थित है। खबरों के अनुसार पता चला है कि अभिनेता ने यह प्लॉट 14.5 करोड़ में खरीदा है। उन्होंने बिल्डर से बात करते हुए कहा कि यह उनकी द हाऊस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा से साथ मिलकर नए सफर की शुरूआत होने वाली है। राम मंदिर से बेहद करीब है अमिताभ का नया घर वह अयोध्या की भी खूब तारीफ करते हैं कि अयोध्या एक शाश्वत आध्यात्म और संस्कृति की राजधानी है। यह शहर मेरे दिल में एक अनोखा स्थान रखता है। मैं ऐसे वैश्विक आध्यात्मिक शहर में घर बनाने का आशा कर रहा हूँ। बतादें कि द सरयू के बिल्डर ने भी अपनी खुशी ज़ाहिर की है वह कहते हैं कि यह उनकी खुशनसीबी है कि द सरयू के पहले सिटीज़न अमिताभ बच्चन हैं। बिग बी का यह नया घर राम मंदिर के साथ अयोध्या के हवाई अड्डे से भी बेहद करीब है जिस कारण भी अभिनेता ने इसे चुना। यह भी पढ़ें- मध्य प्रदेश के शहरों में राम मंदिर के लिए चल रहीं ये तैयारियाँ
मध्य प्रदेश के शहरों में राम मंदिर के लिए चल रहीं ये तैयारियाँ

इन दिनों देश का कोना कोना राम मय हो गया है देश भर से लोग अलग अलग तरह से राम मंदिर की होने वाली प्राण प्रतिष्ठा के लिए तैयारियाँ कर रहे हैं। और आपको जानकर हैरानी होगी इस समारोह के लिए ना केवल भारतवासी अयोध्या में उपहार भेज रहे हैं बल्की विदेशों से भी उपहार अयोध्या पहुँच रहें हैं। हर गली हर शहर भक्त अपने अपने स्तर पर तैयारियाँ कर रहें हैं ऐसे में हम आपको बताएंगे कि मध्य प्रदेश के शहरों में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के ले कैसी तैयारियाँ चल रही हैं। राजधानी भोपाल में राम मंदिर के लिए दिखा उत्साह सबसे पहले बात करते हैं राजधानी भोपाल की ,भोपाल के अशोका गार्डन क्षेत्र का मोहौल तो अभी बिलकुल देखने लायक है। शहर के क्षेत्र को पूरी तरह से राम मय कर दिया है। दरअसल यहाँ दो दिन का एक कार्यक्रम आयोजित किया जाना है जिसके चलते दो दिन क्षेत्र को ही अयोध्या माना जाएगा साथ ही लगातार दो दिन तक राम धुन क्षेत्र में अखंड रूप से चलती रहेगी। बतादें कि कार्यक्रम में साज धाज करने के लिए कारीगिर दक्षिण भारत बुलाए गए हैं ताकि कार्यक्रम में कोई कमी ना रह जाए। विदिशा में चलाई ये पहल वहीं प्रदेश के विदिशा में तो एक अनोखी ही पहल चल रही हैं। दरअसल विदिशा शहर के जागरूक हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता यहां के हर गली मुहोल्ले में घरों में रोजाना अक्षत वितरण कर रहे हैं। इस के साथ ही वह रोज शहर के नागरिकों को याद दिला रहे हैं कि बस इतने दिन और फिर राम लला अपने जन्मस्थान पर आ रहे हैं। उज्जैन से राम मंदिर को भेजे जाएंगे 5 लाख लड्डू अब बात करते हैं प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी इंदौर की। तो इंदौर के उज्जैन से बाबा महाकाल भी राम लला के लिए उपहार भेज रहे हैं। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि बाबा महाकाल की नगरी से अयोध्या के लिए 5 लाख प्रसाद के लड्डू जाएंगे। बतादें कि सीएम डॉ मोहन यादव ने खुद इस बात का ऐलान किया है। साथ ही इंदौर में 22 जनवरी के दिन विशाल दीपोत्सव मनाया जाएगा जिसके चलते शहर में 1 करोड़ 8 लाख दिए जलाए जाएंगे। यह भी पढ़ें- 32 साल से रामलला की सेवा करने वाले महंत ने चुना राम मंदिर का मुख्य पुजारी इस दिन शहर की 56 दुकानों पर रामोत्सव मनाया जाएगा। शहर में मिठाई नमकीन संगठन के द्वारा पूरे शहर में 2 हजार किलो की मिठाई बटवाई जाएगी। इस दिन शहर में दूध बेंचने वाले लोग सादा नहीं केसर वाला दूध बेंचेंगे। पैट्रोल पम्प पर गुब्बारों से सजावट होगी और होटल और मॉल भी राम मय सजावट से खिलेगे। मतलब कुल मिलाकर प्रदेश भर में राम मंदिर के लिए जोरों शोरों से तैयारियां जारी हैं। यह भी पढ़ें- एक्टर संजय दत्त ने बिहार के गया में किया माता-पिता का पिंड दान
32 साल से रामलला की सेवा करने वाले महंत ने चुना राम मंदिर का मुख्य पुजारी

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में बेहद कम समय बाकी है। आने वाली 22 जनवरी को राम लला टेंट से अपने भव्य मंदिर में विराजेंगे। बतादें कि 1992 के बाबरी विध्वंस के समय से राम लला की पूजा अर्चना टेंट में होती आई है जिसकी पूरी जिम्मेदारी आज तक मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने निभाई है। कौन बनेगा राम मंदिर का मुख्य पुजारी अब अपनी बढ़ती उम्र को देखते हुए वह अपने उत्तराधिकारी की खोज में हैं। बताया जा रहा था कि उनका उत्तराधिकारी भी मिल गया है जिसका नाम मोहित पांडे है। मोहित पांडे दूधेश्वर विद्ध्या पीठ के छात्र हैं वह उन पंडितों में शामिल हैं जिन्हें राम मंदिर की समिति द्वारा 3000 आवेदनों में से चुना गया।बताया जा रहा है कि मोहित पांडे में वो सभी खूबियाँ हैं जो राम मंदिर के मुख्य पुजारी में होनी चाहिए और वह मौजूदा पुजारी सत्येंद्र दास को भी बहुत पसंद आए हैं। यह भी पढ़ें- कौन है मुन्नन खाँ जिसने सत्ता का गलत इस्तेमाल कर कारसेवकों की करी हत्या मोहित पांडे रोज सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाते हैं और भगवान की पूजा पाठ इत्यादि में संलग्न हो जाते हैं। वह रोजाना ध्यान भी करते हैं और रामानंनीय सम्प्रदाय की पूजा पद्दति से भी बखूबी वाकिफ हैं। इतना ही 22 साल के पुजारी मोहित पांडे सभी प्रकार के सोशल मीडिया प्लेटफार्म से भी कोसों दूर रहते हैं। मोहित पांडे के ज्ञान और वैराग्य को देखते हुए ही उन्हें मुख्य पुजारी के तोर पर चुना गया। मोहित पांडे के मुख्य पुजारी बनने की खबर का सच लेकिन आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे कि ये सारी खबर ही फेक है क्योंकि बीते कुछ दिन पहले ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए इन खबरों को गलत बताया है। उनका कहना है कि कुछ पुजारियों को चुना गया है पर अभी उनकी ट्रेनिंग चल रही है। साथ ही मुख्य पुजारी के पद पर अभी भी सत्येंद्र दास ही रहेंगे। अभी उनके उत्तराधिकारी को चुनने जैसे कोई बात नहीं हुई है। ये हैं राम मंदिर के मुख्य पुजारी आपको बतादें कि सत्येंद्र दास 32 सालों से राम लला की सेवा कर रहे हैं। बाबरी विध्वंस के समय उन्होंने अपने आप को राम लला को समर्पित कर दिया था। उस समय उन्हें प्रतिमाह 100 रूपए मिला करते थे जो बढ़कर 13000 हो गए थे। बतादें कि सत्येंद्र दास जी को मुख्य पुजारी बनाने वाले भाजपा के पूर्व सांसद विनय कटियार और विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख रहे अशोक सिंघल थे। जब बाबरी विध्वंस हुआ उस वक्त भी सत्येंद्र वहाँ मौजूद थे उन्होंने उस वक्त राम लला की प्रतिमा को दूर ले जाकर रख दिया। यह भी पढ़ें- रावण और राजा जनक ने भी भेजा राम मंदिर के लिए उपहार
युवा दिवस: कैंसर के मरीजों में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की

स्वामी विवेकानंद ने भारत के युवाओं को एक संदेश दिया था कि हम जो भी है वह अपनी सोच की वजह से हैं इसलिए इस बात का ध्यान ऱखना चाहिए कि आप क्या सोचते हैं, वहीं आज की युवा पीढ़ी की सोच तो स्वतंत्र है ही नहीं क्योंकि वो तो नशे के वशीभूत हो चुकी है, जो उनकी सोच में एक ट्रेंड बन गया है। आज युवा दिवस के मौके पर पत्रिका की एक रिपोर्ट के ज़रिए आज हम आपको बताएंगे कि कैंसर जैसी बड़ी बीमारी के मरीजों में सबसे ज्यादा तादाद युवाओं की ही है। 60 फीसदी कैंसर मरीजों में युवा शामिल आज हम अपने आस पास देख सकते हैं कि आज का युवा प्रारम्भिक स्कूल से ही तम्बाकू, बीडी. सिग्रेस जैसी लतों में उलझ जाता है। शुरू में तो ये सब उसके लिए खेल होता है या ट्रेंड को देखते हुए वो ये नशे कर ने लगता है पर कुछ ही सालों में ये ही नशे उसकी जिंदगी बनने का उम्र में जिंदगी खत्म कर देते हैं। भोपाल के एम्स की एक रिपोर्ट इस तथ्य को साबित करती है । जिसमें बताया गया है कि कैंसर से पीड़ित 60 फीसदी मरीजों की आयु 15 से 28 साल के बीच देखी गई है। ओरल कैंसर के ज्यादातर मरीज युवा ही ब्रिटिश मेडिकल जनरल में एम्स के ओरल और मैक्सिलो फेशियल सर्जन डॉ अंशुल की रिसर्च में बताया गया है कि कम मुंह खुलने यानी ओरल सबम्यूकस फाईब्रोसिस के ज्यादातर मरीज युवा ही होते हैं। जिन्होंने बेहद कम उम्र से ही तम्बाकू, गुटखा या सुपारी खाई हो।ऐसे सो मे से 10 से 12 मरीजों को कैंसर की बीमारी होती है वहीं ऐसे भी कई केस होते हैं जिसमें मरीज को मुंह खुलने की तख्लीफ ना होते हुए भी कैंसर हो जाता है। भोपाल में ओरल कैंसर के कुल मरीजों में से 14.3 % पुरूष हैं और 4.6 % महीलाँए हैं। ओरल कैंसर के होते हैं ये चार ग्रेड वहीं आपको बतादें कि ये ओरल कैंसर की चार ग्रेड होती हैं। इनमें पहली और दूसरी ग्रेड के मरीज एस्सरसाईज और हल्दी शहद की मदद से ठीक हो जाते हैं पर तीसरे और चौथे ग्रेड के मरीजों को सर्जरी ही करानी होती है। बतादें कि नशे के इस जाल से युवा पीढ़ी तब तक नहीं बच सकती जब तक युवा इसे अपनी प्रतिष्ठा या शान मानता रहेगा। प्रतिमाह पान मसाला की होती है इतनी खपत आपको जानकर हैरानी होगी कि शहर में पान मसाला के कारोबार से प्रतिमाह 50 करोड़ रूपए से ज्यादा की कमाई होती है जिसमें भी जर्दा का पाऊच सबसे ज्यादा चलन में है। और इसके बाद सिग्रेट, बीड़ी, तम्बाकू और सुपारी की खपत होती है। आपको ये भी जानना चाहिए कि सादा पान मसाला भी ओरल कैंसर जैसे रोगों को बड़ावा देता है। यह भी पढ़ें- शाजापुर में राम फेरी पर पथराव करने वालों पर हुआ बड़ा एक्शन अगर इतना सब सुनने के बाद भी आपको अपनी जान की फिक्र नहीं है तो इक बार अपने परिवार के बारे में ज़रूर सोचे। और ये भी सोचें कि युवाओं के लिए जितनी बड़ी परेशानी बेरोजगारी नहीं उससे भी ज्यादा बड़ी और खतरनाक परेशानी उनका नशा है जो ना केवल उनको बल्की इस समाज को भी दीमक की तरह खत्म करने का सामर्थ्य रखता है।
शाजापुर में राम फेरी पर पथराव करने वालों पर हुआ बड़ा एक्शन
देश के अलग अलग जगह श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर जोरों शोरों से तैयारियाँ की जा रही हैं। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में अक्षत वितरण के लिए श्रीराम फेरियाँ लगाई जा रही हैं। एक ओर देश भर के अलग अलग इलाकों में इन फेरियों पर फूल बरसाए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के शाजापुर में इन राम भक्तों पर पथराव होने की बात सामने आई थी। जिसके बाद आरोपियों पर प्रशासनिक कारवाई की जा रही थी साथ ही अब जिहादी मानसिकता के मुख्य आरोपी के घर पर बुलडोजर कारवाई की गई है। शाजापुर में हुआ था राम फेरी पर हमला बतादें कि 8 जनवरी की शाम शाजापुर में श्रीराम फेरी निकाली जा रही थी इस दौरान एक बड़ी संख्या में हिंदू कार्यकर्ता फेरी में सम्मिलित हुए थे। फेरी में भगवान राम के भजनों की धुन चल रही थी। जब फेरी शहर के हररायपुर क्षेत्र की एक मस्जिद से पास पहुँची तो जिहादियों द्वारा नाराए तकदीर अल्हाह हू अकबर के नारे लगाते हुए राम भक्तों पर अचानक से पथराव शुरू हो गया। मुस्लिम बच्चे और महिलाँए भी थी शामिल यह पथराव मुस्लिम बहुल क्षेत्र के घरों से किया गया था। मुस्लिम महिलाँए और बच्चे भी इस पथराव में शामिल थे साथ ही इस दौरान कुछ लोग तलवार लेकर राम भक्तों पर हमला करने लगे थे। इस हमले में कई कार्यकर्ता गम्भीर रूप से घायल हुए। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पता चला है कि जब श्रीराम फेरी मुस्लिम बहुल क्षेत्र में पहुँची तो कुछ मुस्लिम लोगों ने हिंदू कार्यकर्ताओं को धमकाते हुए कहा कि यह मुस्लिमों का क्षेत्र है यहाँ श्रीराम फेरी नहीं निकल सकती। जब राम भक्तों ने बात नहीं मानी तो जिहादी मानसिकता के लोगों द्वारा श्रीराम फेरी पर हमला किया गया। अब हुआ आरेपी के घर बुलडोजर एक्शन हमला होने के बाद पुलिस द्वारा सभी हमलावरों को ढूंढकर उनपर प्रशासनिक कारवाई की जा रही थी जिसके बाद अब मुख्य आरोपी के घर पर बुलडोजर कारवाई की गई है। बतादें कि मामले का दूसरे दिन ही हिंदू संगठन के लोगों ने बड़ी रैली निकाली थी और जिन घरों से पथराव हुआ उनके घरों पर बुलडोजर कारवाई करने की मांग कर रहे हैं। जिसके बाद आज उनकी मांग पूरी होती दिखाई दी है। यह भी पढ़ें- शाजापुर में श्रीराम फेरी पर हुआ हमला, जिहादियों ने घरों से बरसाए पत्थर
कौन है मुन्नन खाँ जिसने सत्ता का गलत इस्तेमाल कर कारसेवकों की करी हत्या

राम मंदिर आंदोलन में कारसेवा देने वाले कई कारसेवकों के बारे में तो आप जान ही गए होंगे। पर आज हम उस व्यक्ति के बारे में बताएंगे जिसने सत्ता का गलत इस्तमाल करते हुए ना जाने कितने कारसेवकों की हत्या की थी। बतादें कि ये नाम मुन्नन खाँ का है जो जीवित बचे कई कारसेवकों द्वारा कई बार लिया गया है। इन नेताओं से था मुन्नन खाँ का संबंध एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राम मंदिर आंदोलन के समय अयोध्या में तैनात रहे एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने भी मुन्नन खाँ का नाम लिया। अधिकारी ने अपनी पहचान छिपाते हुए बताया कि उस समय वह बलरामपुर का विधायक था। पुलिस को जानकारी मिली थी वह कारसेवकों पर हमला करने वाला है पर वह उस समय का बड़ा और जाना माना नेता था। उसके कांग्रेस पार्टी और समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं से अच्छे संबंध थे जिस कारण उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता था। बस में बैठाकर ले जाता था मुन्नन रूदौली के कुछ कारसेवकों ने बताया कि उस समय मुन्नन खाँ अपने साथियों के साथ पुलिस की वर्दी पहनकर घूमता था साथ ही अपने साथ बस लेकर चलता था । वह रास्ते से पैदल जाते कारसेवकों से कहता कि आओ बस में बैठ जाओ तुम्हें अयोध्या का प्रसाद दिला दें। उस समय पुलिस पैदल चलने वाले कारसेवकों को भी गिरफ्तार कर रही पर मुन्नन खाँ को इसकी इजाज़त किसने दी यह किसी कारसेवक को नहीं पता। साल 2009 में हो चुकी है कारसेवकों के हत्यारे की मौत कारसेवकों ने बताया कि विधायक अपने साथ लाई बस में कई कारसेवकों को लेकर जाता था जिनके साथ क्या हुआ वह कहाँ गए किसी को नहीं पता। साल 1989 से 1991 तक वह बलरामपुर का विधायक रहा। साल 2009 में मुन्नन खाँ की मौत हो चुकी है। यह भी पढ़ें- राम मंदिर आंदोलन में इस कारसेवक ने दिए थे नारे: बाबा सत्यनारायण
राम मंदिर आंदोलन में इस कारसेवक ने दिए थे नारे: बाबा सत्यनारायण

आपने राम मंदिर के हर कारसेवक में ज़ुबान पर क नारा ज़रूर सुना होगा। “रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनांएगे” यह नारा देने वाले व्यक्ति हैं बाबा सत्यनारायण मौर्य। जिन्हें राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए निमंत्रण भी दिया गया है। कौन हैं राम मंदिर आंदोलन में नारा देने वाला ये कारसेवक राम मंदिर आंदोलन के दौरान मशहूर हुए नारे जैसे “रामलला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे” के प्रणेता बाबा सत्यनारायण मौर्य हैं। बतादें कि ये भी एक कारसेवक हैं जिसने अपने आप को पूरी तरह से श्रीराम मंदिर को समर्पित कर दिया था। घुमक्कड़ बाबा के नाम से मशहूर इस कारसेवक ने एक ओर अपनी चित्रकला से राम मंदिर आंदोलन की अलक जगा कर रखी तो दूसरी ओर मंच से कारसेवकों को भी आत्मविश्वास दिया। जितना प्रभाव इनके द्वारा उकेरे गए चित्र डालते थे उतनी ही ऊर्जा का संचार इनके शब्दों से होता था। राम मंदिर के लिए बाबा सत्यनारायण ने छोड़ दी ने पढ़ाई बाबा सत्यनारायण मूल रूप से राजगढ़ के रहते वाले हैं। उनके पिता शिक्षक थे और उनके भाई बहन भी शिक्षक ही हैं।कारसेवक गोल्डमेडिलिस्ट थे पर उन्होंने शिक्षक बनने की जगह राम सेवक बनने को चुना। वह अपनी चित्रकला के माध्यम से दीवारों पर रामलला की आकृति बनाते थे। जैसे ही उन्हें मौका मिला वह कारसेवा के लिए अयोध्या चल दिए। अयोध्या की गली गली में बाबा ने आंदोलन की अलक जलाई। बाबा ने अपने साथियों के साथ मिलकर बाबरी ढांचे की जगह बैनर के कपड़े से अस्थायी मंदिर बनाया था। बाबा सत्यनारायण ने दिए ये मशहूर नारे कारसेवक ने राम मंदिर आंदोलन के समय “सौगंध राम की खाते हैं हम मंदिर वहीं बनाएंगे “नारा दिया । आगे जाकर जिसके साथ “रामलला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे” जैसी पंक्ति जुड़ गई। साथ ही “रक्त देंगे प्राण देंगे मंदिर वहीं बनाएंगे” जैसे नारे भी काफी मशहूर हुए। यह भी पढ़ें- रावण और राजा जनक ने भी भेजा राम मंदिर के लिए उपहार
रावण और राजा जनक ने भी भेजा राम मंदिर के लिए उपहार

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की देश भर में जोरों शोरों से तैयारियाँ चल रही हैं। प्राण प्रतिष्ठा समारोह जनवरी 2024 की आने वाली 22 तारीख को होने जा रहा है। राम मंदिर के लिए देश और विदेश के अलग- अलग कोनों से लोग उपहार भेज रहे हैं। राम लला के ससुराल से आया ये उपहार माँ जानकी की जन्मभूमि और राम लला की ससुराल से भी कई उपहार भेजे जा रहे हैं। माँ जानकी का जन्म नेपाल के जनकपुर में हुआ था। जनकपुर धाम के रामजानकी मंदिर की ओर से अयोध्या के लिए 30 वाहनों का काफिला निकला है। इन वाहनों में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए 3000 से भी अधिक तौहफे भेजे जा रहे हैं। इन तौहफों में भगवान राम के लिए चांदी के जूते, आभूषण, वस्त्र और अन्य वस्तुएं भेजी जा रही हैं। रावण की नगरी से आया तौफा बतादें कि जब रावण ने माँ सीता का हरण किया तो उन्हें अपनी लंका के अंदर अशोक वाटिका में रखा। इसी वाटिका में माता से राम भक्त हनुमान की भेंट हुई थी। यह वाटिका आज के श्रीलंका देश में मौजूद है। श्रीलंका के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी हाल ही में अयोध्या धाम का दौरा किया । वह अपने साथ राम मंदिर के लिए तौहफे में अशोक वाटिका की चट्ठान लेकर आए हैं। यह भी पढ़ें- राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में नहीं होंगे ये दिग्गज नेता शामिल