Waqf Bill Becomes Law : वक्फ संशोधन विधेयक को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी

Waqf Bill Becomes Law : भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लाए गए Waqf Amendment Bill, 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी मंजूरी दे दी है। यह विधेयक संसद के दोनों सदनों – लोकसभा और राज्यसभा – में लंबी और गरमागरम बहस के बाद पारित हुआ था। राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही यह विधेयक अब कानून बन गया है, जिसे “यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट (उम्मीद) एक्ट, 2025” के नाम से जाना जाएगा। इस नए कानून के लागू होने से वक्फ बोर्ड और उसकी संपत्तियों के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की उम्मीद जताई जा रही है। Waqf Bill Becomes Law : पारित होने से लेकर, मंजूरी मिलने तक वक्फ (संशोधन) विधेयक को पहली बार अगस्त 2024 में संसद में पेश किया गया था। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और मुस्लिम संगठनों के विरोध के चलते इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया। JPC की सिफारिशों के आधार पर इसमें संशोधन किए गए और इसे बजट सत्र के दौरान संसद में पारित कर दिया गया। लोकसभा में 12 घंटे की मैराथन बहस के बाद 288 सांसदों ने इसके पक्ष में और 232 ने विरोध में मतदान किया। वहीं, राज्यसभा में 17 घंटे से अधिक की चर्चा के बाद 128 वोटों के समर्थन और 95 वोटों के विरोध के साथ यह पारित हुआ। यह राज्यसभा में अब तक की सबसे लंबी बहस में से एक थी। इसके बाद 5 अप्रैल, 2025 को विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया, और 6 अप्रैल की रात को राष्ट्रपति ने इस पर हस्ताक्षर कर इसे कानून में बदल दिया। नए कानून के मुख्य प्रावधान इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाना है। इसके तहत वक्फ परिषद में चार गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान किया गया है। जिसमें दो महिलाएं होंगी। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों यह निर्धारित करेंगे कि कोई संपत्ति वक्फ की है या सरकारी। यह कदम वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों को कम करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। इसके अलावा, 1923 के मुसलमान वक्फ अधिनियम को भी निरस्त कर दिया गया है, जो स्वतंत्रता से पहले का कानून था। सरकार का दावा और विपक्ष का विरोध केंद्र सरकार ने इस कानून को सामाजिक-आर्थिक न्याय, पारदर्शिता और समावेशी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “सीमांत वर्गों के लिए आवाज और अवसर” प्रदान करने वाला कदम बताया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह कानून गरीब मुस्लिमों के हित में है। हालांकि, विपक्षी दलों में शामिल कांग्रेस, AIMIM और AAP, ने इसका कड़ा विरोध किया है। AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, उनका दावा है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय के धार्मिक स्वायत्तता पर हमला है और संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन करता है। ALSO READ : Waqf Amendment Bill को राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतेज़ार, होंगे बड़े बदलाव WATCH : https://youtu.be/FC7T0flhV2o?si=ysMaWOSaBevvhS1b
Jabalpur Conversion : इलाज के बहाने धर्मांतरण का प्रयास…डॉक्टर गिरफ्तार

Jabalpur Conversion : मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक होम्योपैथिक डॉक्टर पर नाबालिग लड़की को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने का आरोप लगा है। यह घटना तिलवारा थाना क्षेत्र का है, जहां 17 साल की एक किशोरी अपने इलाज के लिए डॉक्टर खालिद खान के पास गई थी। लेकिन इलाज के बहाने डॉक्टर ने कथित तौर पर उसे अपने धर्म को छोड़कर इस्लाम अपनाने के लिए दबाव डाला। Jabalpur Conversion : इलाज के दौरान शुरू हुआ दबाव पीड़िता के परिजनों के अनुसार, किशोरी अगस्त 2024 से अपनी बीमारी के इलाज के लिए डॉ. खालिद खान के क्लिनिक पर जा रही थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन धीरे-धीरे डॉक्टर ने इलाज के दौरान उसे धर्म परिवर्तन के लिए उकसाना शुरू कर दिया। उसने किशोरी को रोजा रखने और नमाज पढ़ने जैसी बातें सिखानी शुरू की। परिजनों का कहना है कि डॉक्टर ने किशोरी का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की, जिसके चलते वह रोजा रखने लगी थी। यह बात जब परिवार को पता चली, तो उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई। सामाजिक संगठनों का हंगामा शिकायत के बाद मामला गरमा गया। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताया और तिलवारा थाने का घेराव किया। संगठनों का आरोप है कि यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि इलाके में धर्मांतरण के लिए सुनियोजित तरीके से लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में लिया। पुलिस ने की कार्रवाई तिलवारा थाना प्रभारी ने बताया कि पीड़िता के बयान और परिजनों की शिकायत के आधार पर डॉ. खालिद खान के खिलाफ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के तहत मामला दर्ज किया गया। इस कानून के तहत जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराना गैर-कानूनी है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। जांच में यह भी पता चला कि डॉक्टर ने किशोरी को लगातार फोन कॉल्स और मैसेज के जरिए प्रभावित करने की कोशिश की थी। फिलहाल, पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह कोई बड़ा षड्यंत्र का हिस्सा है। जबलपुर का यह मामला न केवल कानूनी कार्रवाई का विषय है, बल्कि सामाजिक जागरूकता पर भी सवाल उठाता है। ALSO READ : Conversion in Jashpur : सिस्टर विंसी ने छात्रा को विदेश में नौकरी का दिया प्रलोभन WATCH : https://youtu.be/n1Gjb3c-w-c?si=ZfoOQCF4bvF6F5xk
Conversion in Jashpur : सिस्टर विंसी ने छात्रा को विदेश में नौकरी का दिया प्रलोभन

Conversion in Jashpur : छत्तीसगढ़ के जशपुर से धर्मांतरण का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। होली क्रॉस नर्सिंग कॉलेज की हिन्दू छात्रा ने कॉलेज प्रशासन द्वारा धर्मांतरण के दवाब का आरोप लगाया। छात्रा का आरोप है कि सिस्टर विंसी जोसेफ ने उसपर नन बनने का दबाव डाला। जब छात्रा ने धर्मांतरण से इंकार किया तो उसके कॉलेज में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई। छात्रा ने बताया कि उसे सिस्टर विंसी ने विदेश में अच्छी नौकरी का भी लालच दिया था। एक वर्ष पहले छात्रा को हॉस्टल से भी निकाल दिया गया था। आपको बता दें कि यह मामला छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिला जशपुर का है। छात्रा का आरोप छात्रा ने कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, पीड़ित हिन्दू छात्रा का आरोप है कि उसने होली नर्सिंग कॉलेज में फर्स्ट ईयर में दाखिला लिया था। दाखिला लेने के तीन महीने बाद से ही प्रिंसिपल सिस्टर विंसी ने उसपर नन बनने का दवाब देना शुरू कर दिया। जब उसने नन बनने से इंकार किया तब उसके साथ भेदभाव शुरू हो गए। फिलहाल छात्रा कॉलेज के फाइनल ईयर में है, छात्रा ने आरोप लगाया है कि क्लास में उसे फेल करने की धमकी दी जाती है। क्लास में होने पर भी अब्सेंट लगा दिया जाता है। अफसरों से की शिकायत छात्रा ने मीडिया को बताया कि उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। कॉलेज में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। छात्रा ने बताया कि कॉलेज प्रशासन उसका करियर बर्बाद करना चाहता है। प्रैक्टिकल परीक्षा के दौरान भी उसे बाहर रखने की कोशिश की गई थी। जब उसने अफसरों से शिकायत करने की बात कही तब जाकर उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति मिली। छात्रा ने कलेक्टर और पुलिस अधिक्षक से भी इसकी शिकायत की है। छात्रा के परिवारवालों ने सिस्टर विंसी पर तत्काल कार्रवाही की भी मांग की। सामाजिक संगठनों ने बढ़ाया हाथ इस मामले के तूल पकड़ने के बाद सामाजिक संगठनों ने भी पीड़ता से मुलाकात की। बजरंग दल के जिलाध्यक्ष विजय आदित्य सिंह ने पीड़ता से मुलाकात कर आश्वासन दिया है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि पूरा बजरंग दल छात्रा के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने हॉली क्रॉस नर्सिंग कालेज की मान्यता रद्द कर ताला लगाने की मांग की है। यदि मांगे पूरी नहीं हुईं तो विरोध प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी। ALSO READ : MP के चित्रकूट में टूटा था औरंगज़ेब का अभिमान…दे दी 8 गांवों की जागीर WATCH : https://youtu.be/n1Gjb3c-w-c?si=sw_qwznPxbsIr-Fj
MP के चित्रकूट में टूटा था औरंगज़ेब का अभिमान…दे दी 8 गांवों की जागीर

MP Chitrakoot : चित्रकूट, जिसे “अनेक आश्चर्यों की पहाड़ी” कहा जाता है, न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि यह एक ऐसी पावन भूमि भी है जिसने इतिहास के कई पन्नों को अपनी ओर आकर्षित किया। यह वह स्थान है जहां भगवान राम ने अपने वनवास के लगभग साढ़े ग्यारह वर्ष बिताए थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पवित्र नगरी ने मुगल बादशाह औरंगजेब के अभिमान को भी चूर-चूर कर दिया था? MP में औरंगज़ेब को होना पड़ा मजबूर चित्रकूट का धार्मिक महत्व रामायण काल से जुड़ा हुआ है। यह वह स्थान है जहां भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने अपने निर्वासन के दौरान निवास किया। मंदाकिनी नदी के किनारे बसा यह क्षेत्र ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है। कहा जाता है कि यहां के कण-कण में भक्ति और श्री राम बसे हैं। पौराणिक मान्यता ऐतिहासिक कथाओं के अनुसार, औरंगजेब ने चित्रकूट के मंदिरों को नष्ट करने की योजना बनाई थी। उसने अपनी सेना के साथ इस पवित्र भूमि पर आक्रमण किया, लेकिन यहां की आध्यात्मिक शक्ति उसके सामने एक दीवार बनकर खड़ी हो गई। कहा जाता है कि जब औरंगजेब की सेना ने मंदिरों को तोड़ने का प्रयास किया, तो अचानक उसकी सेना के सैनिक बेहोश होने लगे। यह देखकर औरंगजेब घबरा गया। उस समय चित्रकूट में संत बालक दास नाम के एक संत रहा करते थे। औरंगजेब उनसे मदद की भीख मांगने लगा। संत बालक दास जी ने औरंगज़ेब को सलाह दी कि वह अपनी सेना को चित्रकूट से 10 किलोमीटर दूर ले जाए और मंदिरों को नुकसान न पहुंचाने का वचन दे। संत की बात मानकर औरंगजेब ने एक ताड़ के पत्ते पर यह लिखा कि वह कभी चित्रकूट के मंदिरों को नहीं तोड़ेगा। इसके बाद संत ने उसे एक राख दी, जिससे उसकी सेना ठीक हो गई। ‘बालाजी मंदिर’ का करवाया निर्माण इस घटना ने औरंगजेब के दंभ को तोड़ दिया। इतना ही नहीं, उसने चित्रकूट में एक मंदिर का निर्माण भी करवाया, जो आज “बालाजी मंदिर” के नाम से प्रसिद्ध है। यह मंदिर इस बात का प्रमाण है कि आस्था और सत्य के सामने कोई भी नहीं टिक सकता। औरंगजेब जैसा पाखंडी शासक भी यहाँ अपनी जिंदगी की भीख मांगने लगा। इस घटना के बाद औरंगज़ेब ने आठ गांवों की 330 बीघा जमीन और राजकोष से चांदी का एक रुपया प्रतिदिन देने का फरमान जारी किया था। इस फरमान की छायाप्रति आज भी मंदिर में मौजूद है। चित्रकूट से जाने के बाद औरंगजेब ने फिर कभी इस तरफ नजर उठाकर देखने का दुस्साहस नहीं किया। ALSO READ : First Pod Hotel Of MP : भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए नई सुविधा WATCH : https://youtu.be/n1Gjb3c-w-c?si=sw_qwznPxbsIr-Fj
First Pod Hotel Of MP : भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए नई सुविधा

First Pod Hotel Of MP : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रदेश का पहला और देश का दूसरा सबसे बड़ा पॉड होटल बनकर तैयार हो गया है। यह सुविधा यात्रियों के लिए एक आधुनिक, किफायती और आरामदायक ठहराव का विकल्प लेकर आई है। भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 के पास बने इस पॉड होटल का उद्घाटन रेलवे अधिकारियों और सांसद आलोक शर्मा की मौजूदगी में धूमधाम से किया गया। Pod Hotel में मिलने वाली सुविधाएं यह Pod Hotel जापानी शैली से प्रेरित है, जिसमें छोटे-छोटे कैप्सूल जैसे कमरे बनाए गए हैं। इसमें कुल 138 पॉड्स हैं, जिनमें 118 सिंगल बेड पॉड्स और 20 फैमिली पॉड्स शामिल हैं। सिंगल पॉड्स का आकार 5 फीट गुणा 7 फीट है, जबकि फैमिली पॉड्स इतने बड़े हैं कि एक दंपति और उनके दो छोटे बच्चे आराम से ठहर सकें। प्रत्येक पॉड में आधुनिक सुविधाएं जैसे एयर कंडीशनिंग, मुफ्त वाई-फाई, टीवी, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, मेकअप मिरर और सुरक्षित लॉकर उपलब्ध हैं। इसके अलावा, होटल परिसर में CCTV निगरानी और अग्निशमन व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। सस्ते में मिलेगी अच्छी सुविधा…कैसे करें बुकिंग ? इस पॉड होटल की सबसे बड़ी खासियत इसका किफायती किराया है। यात्रियों को मात्र 200 रुपये में 3 घंटे तक ठहरने की सुविधा मिलेगी। बुकिंग की प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है। यात्री इसे ऑनलाइन IRCTC की वेबसाइट के जरिए या स्टेशन पर मौजूद रिसेप्शन से सीधे बुक कर सकते हैं। फैमिली पॉड : 3 घंटे- 400, 6 घंटे- 700, 12 घंटे – 1100, 24 घंटे- 1500, 48 घंटे-3000मल्टी बेड पॉड (जेंट्स): 3 घंटे – 200, 6 घंटे-350, 12 घंटे – 700, 24 घंटे-900, 48 घंटे- 1800मल्टी बेड पॉड (लेडीज): 3 घंटे – 200, 6 घंटे- 350, 12 घंटे – 700, 24 घंटे- 900, 48 घंटे- 1800 ALSO READ : PM मोदी को श्रीलंका में किया गया सम्मानित…इन मुद्दों पर हुई चर्चा WATCH : https://youtu.be/n1Gjb3c-w-c?si=sw_qwznPxbsIr-Fj
PM मोदी को श्रीलंका में किया गया सम्मानित…इन मुद्दों पर हुई चर्चा

PM Modi Srilanka Visit : भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्हें श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने प्रतिष्ठित ‘मित्र विभूषण पुरस्कार’ से सम्मानित किया। इस पुरस्कार समारोह का आयोजन कोलंबो में किया गया, जहां एक गरिमामय समारोह में राष्ट्रपति दिसानायके ने यह पुरस्कार पीएम मोदी को सौंपा। PM मोदी की ऐतिहासिक विदेश यात्रा प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक है। कोलंबो के इंडिपेंडेंस स्क्वायर में उनका भव्य स्वागत किया गया, जो श्रीलंका द्वारा किसी विदेशी नेता को दिया गया पहला ऐसा स्वागत था। इस दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रदान किया गया। यह स्वागत दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों का प्रमाण है। PM मोदी की श्रीलंका यात्रा का उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है। दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। 1980 के दशक में भारतीय शांति सेना (IPKF) के हस्तक्षेप के बाद से इस क्षेत्र में यह एक बड़ा कदम है। इस समझौते के तहत दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री निगरानी और रक्षा उपकरणों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे। यह समझौता श्रीलंका की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। PM मोदी ने देश की जनता को किया समर्पित प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति दिसानायके के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी की, जिसमें ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और आर्थिक सहयोग जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हुई। PM मोदी ने कहा, “भारत और श्रीलंका के बीच संबंध केवल सरकारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह दोनों देशों के लोगों के दिलों को जोड़ने वाला एक सेतु है।” 2019 के बाद PM मोदी की यह पहली श्रीलंका यात्रा है। मित्र विभूषण पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद पीएम मोदी ने इस सम्मान को भारत की 140 करोड़ जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग का प्रतीक है। ALSO READ : “Rahul Gandhi जी तेलंगाना में हमारे जंगल काटना बंद करें”, BJP नेता ने लगवाए होर्डिंग WATCH : https://youtu.be/n1Gjb3c-w-c?si=sw_qwznPxbsIr-Fj
First Hindu Village in MP : बागेश्वर धाम में बनेगा देश का पहला हिन्दू गांव…Congress को लगी मिर्ची

First Hindu Village in MP : मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम में देश का पहला हिन्दू गांव बनाने की नींव रख दी गई है। कथावाचक और बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार अगले दो सालों में यह हिन्दू गांव बनकर तैयार हो जाएगा। धीरेन्द्र शास्त्री ने 4 अप्रैल, 2025 को विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के भूमिपूजन कर इस गांव की नींव रखी। इस परियोजना के तहत लगभग 1,000 हिंदू परिवारों के लिए एक गांव बसाया जाएगा। एक तरफ हिन्दू समुदाय इस मुहीम का समर्थन कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने मुस्लिम, सिख और ईसाई गांव बसाने की बात कही है। Hindu गांव में मिलने वाली सुविधाएं इस गांव में एक संस्कृत विद्यालय, गौशाला और यज्ञशाला की स्थापना की जाएगी, जो इसे एक धार्मिक और शैक्षिक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। धीरेन्द्र शास्त्री का कहना है कि यह परियोजना हिंदू समाज को संगठित करने और हिंदू राष्ट्र की नींव रखने की दिशा में एक पहला कदम है। उनका कहना है कि पहले हिंदू परिवार मजबूत होंगे, फिर हिंदू समाज और अंततः हिंदू ग्राम से हिंदू राष्ट्र की ओर बढ़ा जा सकेगा। Hindu Village : तीन कैटगरी में मिलेंगे फ्लैट गांव में फ्लैट्स धर्म के नाम पर मिलेंगे। गांव में मिलने वाले फ्लैट्स को तीन कैटगरी में बाँटा गया है। ग्राउंड फ्लोर के फ्लैट की कीमत 17 लाख रुपये होगी। फर्स्ट फ्लोर के फ्लैट की कीमत 16 लाख और सेकंड फ्लोर के फ्लैट की कीमत 15 लाख रुपये तय की गई है। जानकारी के अनुसार मकानों की फाइनल बुकिंग होने पर 5 लाख रुपये एडवांस देने होंगे, बाकी की राशि एक साल के भीतर जमा करना होगा। गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित इस गांव की एक खास बात यह है कि यहां जमीन बागेश्वर धाम जनसेवा समिति द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी, लेकिन इसे खरीदा या बेचा नहीं जा सकेगा। शास्त्री ने यह भी घोषणा की है कि इस गांव में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित होगा, जिसने इसे विवादों के केंद्र में ला दिया है। धीरेन्द्र शास्त्री का मानना है कि यह गांव न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बनेगा। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि हर गांव में सच्चे हिंदुओं को तैयार करने का अभियान शुरू किया जाएगा, जिसके लिए बागेश्वर धाम से टीमें पहले ही रवाना हो चुकी हैं। कांग्रेस ने की मुस्लिम और ईसाई गांव की मांग कांग्रेस पार्टी ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि यदि हिंदू ग्राम बनाया जा रहा है, तो मुस्लिम, ईसाई और सिख समुदायों के लिए भी अलग-अलग गांव बनाए जाएं। उनका कहना है कि यह परियोजना संविधान के समानता के सिद्धांत के खिलाफ है और इससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं, धीरेन्द्र शास्त्री के समर्थकों का कहना है कि यह एक निजी धार्मिक पहल है, जिसमें किसी को जबरदस्ती शामिल नहीं किया जा रहा। ALSO READ : पश्चिम बंगाल में ममता दीदी को लगा बड़ा झटका, HC ने दी अनुमति WATCH : https://youtu.be/Nxw71-XItRE?si=KKYa9zP3Zul3sM81
PM मोदी और मोहम्मद यूनुस की मुलाकात…क्या भारत करेगा स्वीकार ?

PM Modi Meets Muhammad Yunus : शुक्रवार (4 अप्रैल, 2025) को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में एक ऐतिहासिक मुलाकात हुई, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस से मुलाकात की। यह बैठक BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान हुई, जो दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह पहली बार था जब दोनों नेता आमने-सामने बैठे, खासकर उस समय जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में खटास देखी जा रही थी। बांग्लादेश और भारत के रिश्तों में खटास की वजह ? पिछले साल अगस्त में बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी, जिसके बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली। इस बदलाव के बाद से भारत-बांग्लादेश के संबंधों में तनाव बढ़ा, खासकर अल्पसंख्यकों पर हमलों और बांग्लादेश के चीन के साथ बढ़ते संबंधों को लेकर। भारत ने कई बार बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई थी, जिसका जवाब ढाका ने यह कहकर दिया था कि यह उसका आंतरिक मामला है। हाल ही में यूनुस की चीन यात्रा और वहां एयरबेस निर्माण की पेशकश ने भारत की चिंताओं को और बढ़ा दिया था। ऐसे में यह मुलाकात दोनों देशों के बिगड़े संबधों को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या हुआ बैठक में ? मोहम्मद यूनुस और PM मोदी के बीच हुई यह बैठक करीब 40 मिनट तक चली। दोनों नेताओं ने आपसी हितों, क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, PM मोदी ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया, जबकि यूनुस ने भारत से शेख हसीना को वापस करने की मांग दोहराई। इस मुलाकात में औपचारिक रूप से हाथ मिलाते हुए दोनों नेताओं की तस्वीरों ने सुर्खियां बटोरीं। ALSO READ : Manoj Kumar Passes Away : भारतीय सिनेमा ने खोया एक नायाब सितारा…’पाकिस्तान में हुआ था जन्म’ WATCH : https://youtu.be/RnP-YJxflDA?si=2RHATJwDnxiChQu7
Joy School के प्रिंसिपल ने Whatsapp के जरिये भगवान राम का किया अपमान

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित Joy स्कूल का एक मामला अब देशभर में सुर्खियां बटोर रहा है। Joy स्कूल के प्रिंसिपल पर आरोप है कि उन्होंने Whatsapp स्टेटस पर भगवान राम को लेकर एक आपत्तिजनक टिपण्णी की है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस स्टेटस के जरिये भगवान राम को जानबूझकर अपमानित किया गया है। जब इस मामले की जानकारी सामाजिक संगठनों के लोगों को मिली तो उन्होंने इसका विरोध किया। संगठन के लोगों ने स्कूल पहुंचकर भी तोड़फोड़ की। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है जिसके बाद ईसाई समाज के लोगों ने भी SP ऑफिस का घेराव किया। Joy स्कूल के बाहर किया प्रदर्शन सामजिक संगठन को जब इस पूरे मामले की जानकारी मिली, तो उन्होंने स्कूल के बाहर पहुंचकर इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विजयनगर स्थित Joy स्कूल के प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाही की भी मांग की है। ईसाई समाज के लोगों ने भी एसपी ऑफिस पहुंचकर विरोध किया। सामाजिक संगठन के लोगों ने लगातार हो रहे धर्मांतरण का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने Joy स्कूल के प्रिंसिपल अखिलेश मावेन से माफ़ी मांगने के लिए भी कहा है। ALSO READ : Abdul Rehman Death : Hafiz Saeed का करीबी रिश्तेदार अब्दुल रहमान मारा गया… WATCH : https://youtu.be/jOXem1NdceI?si=fdRbEhQcvkURnMud
Kunal Kamra पर दर्ज़ हुए तीन FIR, माफ़ी मांगने से किया इंकार

Kunal Kamra Controversy : स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार मज़ेदार जोक्स की वजह से नहीं, बल्कि एक बड़े विवाद के कारण हैं। इस बार उनके निशाने पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हैं, जिनके खिलाफ कुणाल ने अपने हालिया शो में एक पैरोडी गीत के जरिए तंज कसा। इस गीत में उन्होंने शिंदे को “गद्दार” कहकर संबोधित किया, जो 2022 में उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत और शिवसेना के विभाजन का जिक्र करता था। इस टिप्पणी ने शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं को नाराज कर दिया, जिसके बाद कुणाल के खिलाफ मुंबई के खार पुलिस स्टेशन में तीन मामले दर्ज किए गए। कैसे शुरू हुआ विवाद ? यह विवाद तब शुरू हुआ जब कुणाल ने अपने शो का एक क्लिप सोशल मीडिया पर अपलोड किया। इस क्लिप में उन्होंने फिल्म “दिल तो पागल है” के गाने “भोली सी सूरत” को पैरोडी बनाकर शिंदे पर तंज कसा। इसके बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं ने खार के हैबिटैट स्टूडियो में तोड़फोड़ की, जहां यह शो रिकॉर्ड किया गया था। नाराज कार्यकर्ताओं ने स्टूडियो पर हमला बोला और वहां मौजूद सामान को नुकसान पहुंचाया। इस घटना के बाद, पुलिस ने कुणाल के खिलाफ मानहानि और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसे आरोपों में तीन FIR दर्ज कीं। कुणाल की मुश्किलें यहीं नहीं रुकीं। उन्हें खार पुलिस ने पूछताछ के लिए दो बार समन जारी किया, लेकिन वह अब तक पेश नहीं हुए। इसके जवाब में, कुणाल ने मद्रास हाईकोर्ट में ट्रांजिट अग्रिम जमानत की मांग की, जिसमें उन्होंने कहा कि वह तमिलनाडु के निवासी हैं और मुंबई में उनकी जान को खतरा है। कोर्ट ने उन्हें 7 अप्रैल तक अंतरिम जमानत दे दी। कुणाल ने यह भी दावा किया कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं, जिसके चलते वह डरे हुए हैं। इस बीच, शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं ने कुणाल की टिप्पणियों को अपमानजनक बताया और कार्रवाई की मांग की। Kunal Kamra ने माफ़ी मांगने से किया इंकार एकनाथ शिंदे को लेकर छिड़े इस विवाद में कुणाल ने माफी मांगने से इनकार कर दिया और कहा कि वह वही कह रहे हैं जो दूसरों ने पहले कहा है। उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर उनका बचाव किया, वहीं उनके आलोचकों का कहना है कि यह हास्य की आड़ में व्यक्तिगत हमला है। यह पहली बार नहीं है जब कुणाल विवादों में घिरे हैं। इससे पहले भी वह अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए निशाने पर आ चुके हैं। इस घटना ने एक बार फिर हास्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस छेड़ दी है। जहां कुछ लोग इसे कलाकार की आजादी मानते हैं, वहीं अन्य इसे नेताओं के सम्मान पर हमला बताते हैं। फिलहाल, कुणाल को सोमवार (31 मार्च, 2025) को पुलिस के सामने पेश होना है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला कानूनी दांवपेच में उलझता है या शांत पड़ जाता है। ALSO READ : Salman Khan की घड़ी पर छिड़ा विवाद, Rameshwar Sharma ने दिया जवाब WATCH : https://youtu.be/pFor5MQAsM8?si=O_SL1GZr5pOQE94k