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मिथुन चक्रवर्ती की हेल्थ खराब, कोलकाता के अस्पताल में एडमिट

मिथुन चक्रवर्ती

दादा मिथुन से जुड़ी एक बुरी खबर सामने आई है। एक्टर मिथुन चक्रवर्ती को कोलकाता के हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। एैसा कहा जा रहा है कि अभिनेता को अचानक सीने में तेज दर्द उठा और अजीब से बेचैनी महसूस होने लगी, जिसके बाद उनको फौरन कोलकाता के प्रइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। ये खबर सुनने के बाद एक्टर-पॉलिटिशयन मिथुन चक्रवर्ती के फैंस बेहद दुखी हैं। आपको बता दें दादा की उम्र 73 साल हो चुकी है। आज सुबह यानि शनिवार 10 फरवरी को अचानक इतने बिमार हो गए की उनको अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। फिल्हाल हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा है। एक्टर के बड़े बेटे मिमोह ने मीडिया से बात कर फैंस को बताया कि पापा बिल्कुल ठिक हैं। वो अपने रुटीन चेकअप के लिए अस्पताल गए थे। चिंता करने वाली कोई बात नहीं पापा ठीक हैं। मिथुन चक्रवर्ती ने जाहिर की अपनी खुशी दादा को हाल ही में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इतना बड़ा पुरस्कार मिलने के बाद एक्टर काफी खुश थे। जिमसे बाद उन्होने एक बयान में बोला,- ‘ये पुरस्कार पाकर मैं बेहद खुश हूं. मैं सभी को दिल से धन्यवाद देना चाहता हूं. मैंने आजतक कभी किसी से अपने लिये कुछ नहीं मांगा. फिर आज बिना मांगे कुछ पाने की खुशी महसूस हो रही है. ये एक अलग ही खुशी का एहसास है. मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है.’ ये भी पढ़े- मैहर में प्रेमिका के सीने पर गोली मार युवक ने किया खुद पर फायर

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को अर्पित करें ये 5 स्वादिष्ट आहार

बसंत पंचमी

भारतीय संस्कृति में मां सरस्वती को ज्ञान, कला, और संगीत की देवी माना जाता है। बसंत पंचमी का दिन उनके आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन लोग मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रसाद अर्पित करते हैं। यहां हम आपको बताएंगे कि आप किन-किन स्वादिष्ट आहारों को मां सरस्वती को अर्पित करके उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। इन स्वादिष्ट आहारों को मां सरस्वती को अर्पित करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और विद्या, कला, और संगीत में उनका आशीर्वाद सदेव आप पर बना रहता है। इसलिए, बसंत पंचमी के दिन ये स्वादिष्ट आहार मां सरस्वती के प्रसाद के रूप में दान करें और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करें। सरस्वती चालीसा के साथ मीठा प्रसाद- बसंत पंचमी के दिन लोग सरस्वती चालीसा का पाठ करते हैं। इस अवसर पर मीठा प्रसाद जैसे चावल की खीर या मिठाईयाँ मां सरस्वती को अर्पित किए जा सकते हैं। सूजी का हलवा- सूजी का हलवा एक पसंदीदा प्रसाद है जो मां सरस्वती को अर्पित किया जा सकता है। इसमें सूजी, घी, चीनी और मेवा का मिश्रण होता है जो खासकर सरस्वती पूजा में प्रस्तुत किया जाता है। केसरी पुआँ (सफेद पुआँ)- यह एक लोकप्रिय प्रसाद है जो बसंत पंचमी पर बनाया जाता है। केसरी पुआँ में मैदा, चीनी, और घी का मिश्रण होता है जिसमें केसर का उपयोग किया जाता है। यह मां सरस्वती को अर्पित किया जाता है और फिर बाद में भक्तों को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। फलों का प्रसाद- बसंत पंचमी पर फलों का प्रसाद भी मां सरस्वती को अर्पित किया जा सकता है। फलों में सेब, केला, और संतरा शामिल किए जा सकते हैं। सात्विक भोजन- बसंत पंचमी के दिन लोग सात्विक भोजन का प्रसाद भी मां सरस्वती को अर्पित करते हैं। इसमें खाड़ी शक्कर, मिश्रित दाल, सब्जियाँ, और खीर का सेवन शामिल हो सकता है। ये भी पढ़े- कब है बसंत पंचमी, क्यों पहने जाते हैं पीले रंग के वस्त्र

बसंत पंचमी पर इन खास बातों का रखें ध्यान नहीं तो….

बसंत पंचमी

बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध त्योहार है जो सर्दियों के अंत में वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। यह पर्व सरस्वती माँ, विद्या, कला, और संगीत की देवी को अर्पित है। बसंत पंचमी को मनाने के लिए कुछ नियमों और सावधानियों का पालन करना आवश्यक है। यहाँ हम बसंत पंचमी पर क्या करें और क्या नहीं करें उन कार्यों के बारे में आपको बता रहे हैं। इन सावधानियों का पालन करके हम बसंत पंचमी को प्रसन्नता और खुशियों के साथ मना सकते हैं। यह हमें नई उत्साह और ऊर्जा के साथ नए कार्यों की शुरुआत करने की प्रेरणा देता है। बसंत पंचमी के दिन इन कार्यों को करना अनिवार्य है माँ सरस्वती की पूजा- बसंत पंचमी पर सभी लोग सरस्वती माँ की पूजा और अर्चना करते हैं। इन्हे विद्या का प्रतीक माना जाता है। सफेद कपड़े पहनें- इस खास दिन पर हर किसी को सफेद कपड़े पहनने चाहिए। सफेद रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। यह नए आरंभों का प्रतीक होता है। बच्चों को विद्या की शिक्षा दें- इस दिन बच्चों को पढ़ाई और विद्या के महत्व के बारे में शिक्षा देना अत्यंत शुभ माना जाता है। मुख्य भोजन- इस दिन के खास मौके पर सरस्वती माँ के प्रिय भोजनों को प्रस्तुत करना चाहिए जैसे मेवा, केसर हलवा, और सफेद मिष्ठन। भूल कर भी इस दिन ना करें ये कार्य काले कपड़े ना पहनें- इस दिन काले रंग के कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है। किसी को ठोकर ना लगाना- इस धार्मिक त्योहार पर किसी को ठोकर लगाना या किसी से कहानी सुनना अशुभ माना जाता है। विद्यालय न जाना- इस दिन विद्यालय न जाना अशुभ माना जाता है। इस दिन विद्यार्थियों को अपना समय शिक्षा को समर्पित करना चाहिए। ये भी पढ़े- जब प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह किसान बनकर पहुँच गए थाना

नहीं खाना चाहिए खतरनाक फास्ट फूड, आपकी शरीर पर ऐसे करता है असर

खतरनाक फास्ट फूड

आज के समय में फास्ट फूड खाने से शरीर पर कई तरह के हानिकारक प्रभाव पड़ सकते हैं। फास्ट फूड खाने में तो आपको बेहद स्वादिष्ट लगेगा लेकिन इसका असर आपकी शरीर पर अच्छा नहीं होता है। आपको लग रहा होगा अभी खा लेते हैं बाद में कुछ अच्छा खा लेंगे। फास्ट फूड का असर कुछ समय बाद आपके बॉडी पर दिखने लगता है। और धिरे-धिरे ये एक बड़ा रूप ले लेता है। जिसके बाद आपकी शरीर के लिए खतरनाक होगा और आपकी मृत्यु भी हो सकती है। भाग दौड़ के इस समय में ज्यादातर लोग फास्ट फूड खा कर ही पूरा दिन बिता देते है। आप सभी को पूरी कोशिश करनी होगी की आप कम के कम फास्ट फूड का सेवन करे और अपने परिवार वालों को भी ना करने दें। खास कर बच्चों को ये खतरनाक भोजन कभी नहीं देना चाहिए। ऐसे होता है आपकी शरीर पर फास्ट फूड का असर फास्ट फूड खाने से आपकी अस्थायी उर्जा में वृद्धी हो सकती है, जिलके बाद इसका असर आपकी बॉडी पर दिखने लगता है। जिससे व्यक्ति थकान, कमजोरी और चिड़चिड़ापन महसूस करने लगता है। इसके अतिरिक्त, फास्ट फूड में आमतौर पर सोडियम की मात्रा अधिक होती है, जो जल प्रतिधारण में योगदान देता है और संभावित रूप से रक्तचाप बढ़ाता है, जो हृदय संबंधी समस्याओं को बढ़ावा देता है। इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है फास्ट फूड इतना खतरनाक होता है कि आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। अध्ययन प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की अधिकता वाले आहार और अवसाद तथा चिंता के बढ़ते जोखिम के बीच संबंध का सुझाव देते हैं। फास्ट फूड में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है और मूड विकारों को बढ़ा सकती है। ये भी पढ़े- मुनव्वर फारुकी की जीत के जश्न में फैन ने किया एैसा काम हो, गई FIR

मुनव्वर फारुकी की जीत के जश्न में फैन ने किया एैसा काम हो, गई FIR

Munawar Faruqui मुनव्वर फारुकी

मुनव्वर फारुकी बिग बॉस सीजन 17 की ट्रॉफी जीतने के बाद आपने घर जीत का जश्न मनाते हुए जा रहे थे। इसके बाद अपने घर के सामने एक बड़ा सेलिब्रेशन किया। इस सेलिब्रेशन में एक फैन ने बिना परमिशन के ड्रोन से तस्वीरें लेने का प्रयास किया। पुलिस ने ड्रोन का अवैध इस्तेमाल करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज की है। अब इसके कारम मुनव्वर मुसिबत में पड़ गए है। इतनी बड़ी जीत के बाद इनके फैंस ने उनकी जीत को धूमधाम से मनाया, लेकिन अवैध तरीके से ड्रोन का इस्तेमाल करने के आरोप में उन पर FIR दर्ज किया गया है। मुंबई में सुरक्षा कारणों के चलते अनुमति के बिना ड्रोन उड़ाने पर पाबंदी है, और इस मामले में ड्रोन ऑपरेटर के खिलाफ कदम उठाया गया है। मुनव्वर फारुकी के जीत की रैली में कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन होने के कारण उनका नाम समाचारों में है।बिग बॉस सीजन 17 की जीत के बाद मुनव्वर ने अपनी तगड़ी फैन फॉलोइंग का सबूत दिया है, लेकिन ड्रोन के अवैध इस्तेमाल के मामले में उनका नाम चर्चा में है। इस घड़ी में फैंस की खुशी ने कानूनी सीमाओं को तोड़ा है, जिसका सामना मुनव्वर को करना पड़ रहा है। ये भी पढ़े- जानिए बजट 2024 से जुड़ी सारी जानकारी

जानिए बजट 2024 से जुड़ी सारी जानकारी

बजट 2024

हर साल 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश किया जाता है। इस बार भी एक फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अगले वित्त वर्ष 2024-2025 का बजट पेश करने वाली है। हर साल बजट पेश करने के एक दिन पहले सरकार इकोनॉमिक सर्वे पेश करती है। हम आपको बताएंगे कि इकनॉमिक सर्वे में क्या खास रहने वाला है किन चिजों के दाम घट सकते हैं या बढ़ सकते हैं इन सभी बातों की जानकारी कम शब्दों में आप तक पहुचाई जाएगी। बता दें कि इस इकोनॉमिक सर्वे में आने वाले बजट की पूरी जानकारी एक दस्तावेज के रूप में पेश की जाती है। इस बार का बजट मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखरी बजट है, जिसे अंतरिम बजट भी कहा जा रहा है। लेकिन पूर्ण बजट इस साल होने वाले आम चुनावों के बाद होगा। वैसे तो वित्त मंत्री निर्मला सितारमण पहले ही ये साफ कर चुकी है कि इस बजट में कोई बड़ी घोषणाए नहीं की जाएंगी लेकिन आने वाले लोक सभा चुनाव को देखते हुए ये माना जा रहा है कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का ये बजट बेहद खास होने वाला है। जिस कारण सभी की निगाहें आज के इकनॉमिक सर्वे और एक फरवरी को पेश होने वाले बजट पर टिकी हुई है। 2024 के बजट में क्या है खास इस बार का बजट गरीब, युवाओं, किसानों और महिलाओं के लिए बेहद खास हो सकता है। इसी लिए 2024 के बजट को ज्ञान के नाम से जाना जा रहा है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बात को सही साबित करते हुए बोला कि मेरे लिए देश में केवल यहीं चार जातियां हैं। जिसके बाद ये अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार का बजट इन चार वर्गों को ध्यान में रखते हुए पेश किया जाएगा। किन जिचों के दाम घटने वाले हैं आपको बता दें कि एैसा अनुमान लगाया जा रहा है कि 2024 के बजट में इलेक्ट्रॉनिक आइटम सस्ते होंगे, क्योकिं अगले बजट में केंद्र सरकार इंपोर्ट ड्यूटी को कम कर सकती है। GTRI की एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि स्मार्टफोन बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी को कम किया जाएगा। इस रिसर्च के मुताबिक केंद्र सरकार इस बार मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगी। अगर एैसा होता है तो ये निश्चित है कि स्मार्टफोन सस्ते होंगे। अगर सरकार इंपोर्ट ड्यूटी पर रोक लगा देती है तो भारत का घरेलू उत्पाद 28 प्रतिशत तक बढ़ सकता है और स्मार्टफोन प्रोडक्शन का मार्केट 82 बिलियन डॉलर तक जा सकता है। अन्नदाताओं के लिए किसान सम्मान निधि के तहत मिलने वाली रकम को 6 हजार रुपए से बढ़ाकर 8 हजार रुपय तक किया जा सकता है साथ ही महिला किसानों के लिए ये राशि सालाना 6000 से बढ़कर 12000 रुपए हो सकती है। इस बार के बजट में केंद्र सरकार इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के अनुसार मिलने वाली टैक्स छूट को बढ़ाकर 2.5 लाख रुपए कर सकती है। सेक्शन 80D के अनुसार हेल्थ इंश्योरेंस के लिए दिए गए प्रीमियम पर टैक्स छूट को बढ़ाकर दोगुना किया जा सकता है। अभी तक 80D के अनुसार पति-पत्नी और बच्चों के हेल्थ इंश्योरेंस के लिए दिए गए सालाना 25 हजार रुपए तक के प्रीमियम पर ही टैक्स की छूट मिलती है। ये राशि बढ़कर 50 हजार हो सकती है। ये भी पढ़े- रणदीप हुड्डा की फिल्म ‘वीर सावरकर’ की रिलीज डेट आई सामने

रणदीप हुड्डा की फिल्म ‘वीर सावरकर’ की रिलीज डेट आई सामने

रणदीप हुड्डा

रणदीप हुड्डा ने मंगलवार को अपनी फिल्म ‘वीर सावरकर’ की रिलीज डेट घोषित की। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नायक वीर सावरकर की बायोपिक, जो इसके पहले पिछले साल ही रिलीज होनी थी, अब मार्च में रिलीज होगी। फिल्म में सावरकर का किरदार रणदीप हुड्डा निभा रहे हैं।रणदीप हुड्डा की फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ का टीजर पिछले साल शेयर किया गया था, जिसमें उनका शानदार ट्रांसफॉर्मेशन लोगों को प्रभावित किया था। फिल्म की नई रिलीज डेट को लेकर हुड्डा ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। इस बायोपिक में वीर सावरकर का किरदार निभाने के साथ-साथ, हुड्डा ने ही फिल्म का डायरेक्टिंग भी किया है।‘वीर सावरकर’ का इंतजार कर रहे दर्शकों के लिए खुशखबरी है कि फिल्म मार्च में रिलीज होगी। हुड्डा ने इस खुशखबरी को एक वीडियो क्लिप के साथ अपने इंस्टाग्राम पेज पर साझा किया। फिल्म का रिलीज दिन मार्च के शहीदी दिवस के रूप में चयन किया गया है।फिल्म के टीजर में दावा किया गया था कि सावरकर ‘सबसे भयानक क्रांतिकारी’ थे, जो ‘भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और खुदीराम बोस के प्रेरणास्त्रोत’ भी थे। इस दावे पर सुभाष चंद्र बोस के पड़पोते चंद्र कुमार बोस ने खंडन किया था। ये भी पढ़े- ये भी पढ़े- न्यूयॉर्क में भी बज रहा महात्मा गांधी (mahatma gandhi) के नाम का ढंका

ऐसा था Kalpana Chawla का जीवन, महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

Kalpana Chawla

Kalpana Chawla, जिनका जन्म 17 मार्च 1962 को करनाल, भारत में हुआ था, एक अग्रणी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं। उनकी प्रेरक यात्रा पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में डिग्री और टेक्सास विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री के साथ शुरू हुई। 1997 में, कल्पना ने अंतरिक्ष शटल कोलंबिया पर एक मिशन विशेषज्ञ के रूप में अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली भारतीय मूल की पहली महिला बनकर इतिहास रच दिया। अंतरिक्ष अन्वेषण के प्रति उनके समर्पण और जुनून के कारण उन्हें 2003 में दूसरे मिशन, एसटीएस-107 के लिए चुना गया। दुख की बात है कि मिशन तब आपदा में समाप्त हो गया जब अंतरिक्ष शटल कोलंबिया पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करते समय विघटित हो गया। 1 फरवरी, 2003 को इस विनाशकारी घटना में कल्पना चावला और उनके साथी अंतरिक्ष यात्रियों की जान चली गई। अंतरिक्ष अन्वेषण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के अलावा, कल्पना का जीवन और उपलब्धियाँ दुनिया भर में महत्वाकांक्षी वैज्ञानिकों और महिलाओं के लिए एक प्रेरणा के रूप में काम करती हैं। उनकी विरासत छात्रवृत्तियों, पुरस्कारों और उनके सम्मान में नामित संस्थानों के माध्यम से जीवित है, जो एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके स्थायी प्रभाव पर जोर देती है। Kalpana Chawla की कहानी लचीलेपन, दृढ़ संकल्प और किसी के सपनों की खोज का उदाहरण है, जो उन्हें सितारों तक पहुंचने वाली अदम्य मानवीय भावना का एक शाश्वत प्रतीक बनाती है। ये भी पढ़े- Martyrs day पर जानिए (महात्मा गांधी) Mahatma Gandhi के प्रेरक प्रसंग

Martyrs day पर जानिए (महात्मा गांधी) Mahatma Gandhi के प्रेरक प्रसंग

Martyrs day Mahatma Gandhi

Martyrs day: अहिंसा और शांति के पुजारी महात्मा गांधी की आज 75वीं डेथ एनिवर्सरी (Martyrs day) है। बापू के विचारों को आज भी लोग उतना ही महत्व देते है जितना आजादी के पहले देते थे। यूं ही नहीं इनको ‘राष्ट्र पिता’ की उपाधि दी गई है। वे मानवता और शांति के प्रतीक हैं। वैसे तो इनका नाम मोहनदास करमचंद गांधी है पर इनको महात्मा गांधी, बापू, अहींसा के पुजारी और राष्ट्रपिता के नाम से भी जाना जाता है। गांधी को याद करना मतलब बदलती दुनिया के लिए कालातीत ज्ञान। आज महात्मा गांधी की 75वीं पुण्य तिथि (Martyrs day ) है और इस प्रतिष्ठित व्यक्ति की स्थायी विरासत पर विचार करने का एक उपयुक्त अवसर है। भारत के अहिंसक स्वतंत्रता आंदोलन के नेता गांधीजी अपने पीछे बहुमूल्य विचारों का खज़ाना छोड़ गए जो पीढ़ियों तक गूंजता रहेगा। एक शक्तिशाली आयुध के रूप में अहिंसा- गांधी के दर्शन के मूल में “अहिंसा” का सिद्धांत था। वह शांतिपूर्ण प्रतिरोध की परिवर्तनकारी शक्ति में विश्वास करते थे, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सच्ची ताकत शारीरिक शक्ति में नहीं बल्कि अटूट साहस और नैतिक दृढ़ता के साथ प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता में निहित है। अहिंसा पर उनकी शिक्षाओं ने विश्व स्तर पर नागरिक अधिकार आंदोलनों को प्रेरित किया, जिसने इतिहास की दिशा को आकार दिया। सत्याग्रह – सत्य की शक्ति- गांधी ने “सत्याग्रह” की अवधारणा पेश की, एक दर्शन जो अहिंसक तरीकों से सत्य की खोज की वकालत करता था। इसने व्यक्तियों को ईमानदारी और दृढ़ विश्वास के साथ अन्याय के खिलाफ खड़े होने के लिए प्रोत्साहित किया। यह सिद्धांत उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई में आधारशिला बन गया, जिससे साबित हुआ कि सच्चाई की ताकत सकारात्मक बदलाव ला सकती है। सादगी और विनम्रता- अक्सर भौतिक गतिविधियों से प्रेरित दुनिया में, गांधी का जीवन सादगी और विनम्रता का उदाहरण है। वह संपत्ति संचय करने के बजाय उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने में विश्वास करते थे। न्यूनतम जीवन शैली अपनाकर उन्होंने प्रदर्शित किया कि सच्ची खुशी दूसरों की सेवा और उच्च आदर्शों की खोज में मिलती है। सर्वोदय – सभी के लिए कल्याण- गांधी ने एक ऐसे समाज की कल्पना की जहां हर व्यक्ति की भलाई को प्राथमिकता दी जाए। उनकी “सर्वोदय” की अवधारणा का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक समानता पर जोर देते हुए सभी का उत्थान करना था। यह दृष्टिकोण समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की वकालत करने वाले आंदोलनों को प्रेरित करता रहता है। चरित्र के लिए शिक्षा- गांधीजी के लिए, शिक्षा का अर्थ केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं बल्कि चरित्र निर्माण करना था। उन्होंने ऐसे व्यक्तियों को आकार देने में शिक्षा के महत्व पर जोर दिया जो न केवल बौद्धिक रूप से कुशल हों बल्कि नैतिक रूप से भी ईमानदार और दयालु हों। शिक्षा के प्रति उनका समग्र दृष्टिकोण जिम्मेदार नागरिकों को विकसित करने के लिए एक शाश्वत मार्गदर्शक बना हुआ है। ये भी पढ़े- अपने व्यस्त जीवन में टेंशन और डिप्रेशन से बाहर आने के लिए ये उपाय अपनाएं