इंदौर में हिट एंड रन केस का शिकार बनी नन्हीं बच्ची

इंदौर के पास हातोद में हिट एंड रन केस का मामला सामने आया है जहां एक कार चालक ने 4 साल की बच्ची के ऊपर कार चढ़ा दी और उसके बाद घटनास्थल से कार भगाकर ले गया । जब गांव वालो ने कार का पीछा किया तो आरोपी कार छोड़कर भाग गया । हादसे मे बच्ची की मौत हो गई । घटना मंगलवार की है जिसका सीसीटीवी फोटेज बुधवार दोपहर को सामने आया है। पुलिस ने बुधवार को आरोपी अनिल भोई को गिरफ्तार कर लिया है। कैसे बनी हिट एंड रन केस शिकार घटना हातोद के कुम्हार मोहल्ले की है,जैनब अपने दादा के साथ पैदल घर आ रही थी । इस दौरान दो कार क्रास हुई,जिसमें पीछे से आ रही कार ने पहले एक बार ब्रेक मारा और फिर एक दम से 45 डिग्री पर तेज रफ्तार में कार दौड़ा दी इससे चार कदम की दूरी पर खड़ी दादा के साथ जैनब पर चढ़ गयी और दादा चपेट से दूर फिका गए और फिर घायल बच्ची को गोद में उठाकर कार के पीछे भागा । गांव के लोग भी कार के पीछे दौड़े, एक ने कार पर पीछे से पत्थर मारने की चेतावनी दी लेकिन फिर भी ड्राइवर नहीं रूका । कुछ दूर आगे जाकर आरोपी अनिल ने कार छोड़ दी और उतर कर फरार हो गया । इंदौर पुलिस ने की कार्यवाही इंदौर पुलिस ने बताया कि घटना हातोद के कुम्हार मोहल्ले की है,जैनब अपने दादा के साथ पैदल घर आ रही थी । इस दौरान दो कार क्रास हुई,जिसमें पीछे से आ रही कार ने पहले एक बार ब्रेक मारा और फिर एक दम से 45 डिग्री पर तेज रफ्तार में कार दौड़ा दी इससे चार कदम की दूरी पर खड़ी दादा के साथ जैनब पर कार चढ़ गयी और उसकी मौत हो गयी । पुलिस ने हिट एंड रन के मामले में आगे कार्यवाही करते हुए आरोपी की खोज शुरू कर दी थी और पुलिस ने घटना के आरोपी अनिल भोई को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया है और आरोपी की कार MP09ZH8104 को भी जब्त कर लिया है। यह भी पढ़े-सिरफिरे पति ने की पत्नी की हत्या
महाभारत से जुड़ी ये बात शायद ही किसी को पता होगी

श्रीकृष्ण का लीलाओं के बारे में तो हर किसा को पता है लेकिन एक लीला वह भी है जब महाभारत युद्ध के समाप्त होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिखाई थी। से कथा शायद ही हर किसी ने सुनी होगी। जिस रथ पर अर्जुन महाभारत का युध्द लड़ रहे थे उस रथ पर अकेले श्रीकृष्ण ही नहीं थे श्रीकृष्ण के साथ शेषनाग और हनुमान भी थे। जिससे की किसी भी शस्त्र का रथ पर असर ना हो। ये सारी व्यवस्था स्वयं श्रीकृष्ण ने अर्जुन के लिए की थी। क्योंकि अर्जुन धर्म के लिए युध्द कर रहे थे। जब युध्द समाप्त हो गया और अर्जुन महाभारत युध्द जीत गए। जिसके बाद अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा की पहले आप रथ से निचे उतरे फिर मैं उतरता हूं लेकिन श्रीकृष्ण ने मना कर दिया। बोले नहीं अर्जुन पहले तुम उतरो जिसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा मानकर अर्जुन रथ से पहले उतर गए। उसके बाद कृष्ण रथ से निचे उतर गए। हनुमान जी भी अंतरध्यान हो गए और शेषनाग भी रथ छोड़ पाताल लोक की ओर प्रस्थान कर गए। भगवान श्रीकृष्ण रथ से उतरने के बाद जल्द ही अर्जुन को रथ से थोड़ी दूर ले गए। जिसके बाद अर्जुन के रथ से आग की लपट निकलने लगी और रथ पूरी तरह से जल कर राख हो गया। अर्जुन ने ये सब देखने के बाद कृष्ण से पूछा भगवान ये क्या हुआ। तब कृष्ण ने बताया हे अर्जुन ये रथ तो द्रोणाचार्य, भीष्म पितामह और कर्ण के दिव्यास्त्रों से कब का जल गया था। लेकिन इस रथ पर पताखा के रूप में हनुमान और मैं स्वयं था। लेकिन अब तुम्हारा काम खत्म हो गया है तो मैंने ये रथ छोड़ दिया और ये रथ पूरी तरह से जल गया। इसी तरह भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध में एैसी कई लीलाएं दिखाई है। ये भी पढ़ें- आखिर क्यों हमारे बड़े कहते हैं कि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठना चाहिए?
आखिर क्यों हमारे बड़े कहते हैं कि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठना चाहिए?

आप सभी जब कभी घर पर सूर्योदय के बाद सो कर उठते है तो परिवार वाले बोलते है सूर्योदय के पहले सोकर उठा करो। सुर्योदय के पहले उठने से कई लाभ होते है। आपके मन में भी ये सवाल आता होगा कि आखिर सुबह जल्दी सोकर उठने से क्या फायदे होते है क्यों हर कोई कहता रहता है कि सुबह जल्दी सोकर उठा करो चलिए हम आपको बताते है कि सुबह जल्दी सोकर उठने से क्या फायदे होते है। क्यो सुबह सोकर ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए? नम्बर एक- ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठने से व्यक्ति को सुन्दरता, धन-दौलत, बुध्दि, अच्छा स्वास्थ्य और लम्बी आयु की प्राप्ती होती है। इस मुहूर्त में उठने वाला व्यक्ति कमल की तरह खिल जाता है। नम्बर दो- सूर्योदय के डेढ़ घण्टा पहले का समय ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है। शास्त्रो के मुताबिक सुर्योदय के पहले सोकर उठने वाले लोग बुध्दिमान और उत्साहि होते है और सोते रहने वाले व्यक्ति का जीवन निस्तेज हो जाता है। वह इंसान कभी सुखी नहीं रहता है। नम्बर तीन- प्राचीन काल से ही ऋषि मुनी सुर्योदय के पहले सोकर उठ जाया करते थे और स्नान आदि कार्य खत्म करके भगवान की भक्ति में लीन हो जाते थे। ब्रह्म मुहूर्त शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक और आध्यात्मिक सभी प्रकार से महत्वपूर्ण होता है। ये भी पढ़ें- किसान आंदोलन के बीच हरियाणा और पंजाब सरकार में दिखी भिड़ंत
नहीं रहे जादूगर रेडियो प्रेजेंटर Ameen sayani 91 साल की उम्र में हुआ निधन

Ameen sayani: रेडियो की दुनिया के जादूगर कहे जाने वाले अमीन सयानी(Ameen sayani)अब हमारे बीच नहीं रहे। आवाज के जादूगर रेडियो प्रेजेंटर अमीन सयानी ने 91 साल की उम्र में इस दुनिया को छोड़ कर हमेशा के लिए चले गए। हर कोई उनको उनकी आवाज से ही पहचानता था उनकी आवाज ही उनकी पहचान थी। एैसा कहा जाता है रेडियो के जादूगर अमीन सयानी (Ameen sayani) का जीवन आसान नहीं था। इस गोल्डन आवाज के साथ पैदा होने के बाद भी अमीन सयानी ने कई कष्ट सहा और देखा है। एक समय था जब वह गायक बनना चाहते थे। लेकिन फिर वह बाद में एक फेमस बॉडस्कास्टर बग गए। 21 दिसंबर 1932 को मुंबई में इनका जन्म हुआ था। सबसे पहले उन्होनें ऑल इंडिया रेडियो में रेडियो प्रेजेंटर के तौर पर मुंबई में काम किया। शुरू के 10 साल उन्होने इंग्लिश भाषा के प्रोग्राम्स में अपने आवाज का जादू दिखाया फिर आजादी के बाद उन्होनें हिन्दी भाषा में काम किया। इसके बाद उनको एक एैसा हीट शो मिला जिससे उनकी पूरी दुनिया ही बदल गई। Ameen sayani:कैसे बदला ‘बिनाका गीत माला’ का नाम बिनाका गीत माला शो की शुरुआत 1952 में हुई थी। उस समय एक जाने माने एड कंपनी के अधिकारी रेडियो सीलोन पर ग्राहकों के लिए हिन्दी फिल्मों की गीत की एक सीरीज बनाने का प्लान कर रहे थे। एड कंपनी एक रासायनिक ग्रुप के लिए एड बना रही था, जो कई प्रकार के प्रोडक्ट और टूथपेस्ट बनाती थी। उस समय अमीन सयानी (Ameen sayani) द्वारा अंग्रेजी गाने का एक शो रेडियो पर बहुत अच्छा चल रहा था। ऐसे में विज्ञापन कंपनी को हिन्दी फिल्मी गाने की लोकप्रियता को देखते हुए हिन्दी बाजार में कदम रखने का प्लान था। विज्ञापन कंपनी के इस प्लान के लिए काम करने के लिए कोई भी लेखक या संगीत कंपोजर तैयार नही था, क्योंकि इस काम का पैसा केवल 25 रूपया ही मिल रहा था। लेकिन अमीन के के भाई ने उनको इस काम के लिए प्रेरित किया। जिसके बाद एक अच्छी, लंबी और पुरस्कृत रेडियो यात्रा शुरू हुई। अमीन सयानी के अच्छे काम को देखते हुए इस शो का नाम ‘बिनाका गीत माला’ को बदलकर 1986 में ‘सिबाका गीत माला’ कर दिया। ये भी पढ़ें- इंडिया गठबंधन में सपा और कांग्रेस के बीच बनी सहमति
सिरफिरे पति ने की पत्नी की हत्या

ग्वालियर में सिरफिरे ड्राइवर ने की अपनी पत्नी की हत्या । वह उसके चरित्र को लेकर संदेह करता था । आरोपी ग्वालियर नगर निगम में ऑउटसोर्स ड्राइवर था । वह जब घऱ पहुंचा तो पत्नी एयरफोन लगा और हाथ में मोबाइल रखे बैठी मिली । इस बात को लेकर दोनो के बीच बहस शुरू हो गई और गुस्से से बौखलाएं हुए पति ने सिर-चेहरे पर फावड़े मारकर पत्नी कि हत्या कर दी औऱ घर पर मौजूद दो साल के बच्चे को लेकर भाग गया । पुलिस ने घटनास्थल पहुंचकर की हत्या की जांच घटना मंगलवार रात की है, पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल की जांच कर बताया कि मामला ग्वालियर के पुरानी छावनी जलालपुर पहाड़ी का है । यहां मीरा कुशवाह (32) का शव उसके ही घर में पड़ा मिला । पति बलवीर कुशवाह नगर निगम पीएचई में ऑउटसोर्स ड्राइवर है दोनों के तीन बेटे हैं। उसके (10) और (8) साल के बेटे ट्यूशन गए थे और छोटा लड़का (2) साल का बेड पर लेटा हुआ था । जब वह घर पहुंचा मीरा के हाथ में मोबाइल और कान में एयरफोन था । उसे लगा कि वह किसी से बात कर रही हैं इसी गुस्से में उसने डंडा के बाद फावड़े से सिर-चेहरे पर वार किया जिससे पत्नी की मौत हो गई । पिता को फोन कर बताई थी मारपीट की बात पड़ोस में रहने वाली मीरा की देवरानी घर पहुंची, तब वारदात का पता चला । इधर, आरोपी के ससुर ने उसे फोन कर बेटी के बारे में पूछा तो उसने मार दिया कहकर फोन काट दिया । बताया जा रहा है कि घटना के कुछ देर पहले ही मीरा ने पिता को फोन कर झगड़े की जानकारी दी थी । घटनास्थल से पुलिस को मोबाइल,एयरफोन और खून से सना फावड़ा मिला है । पुलिस ने बताया चरित्र संदेह को लेकर की हत्या सीएसपी नागेंद्रसिंह सिकरवार, टीआई मौके पर पहुंचे । पुलिस ने बताया था कि दोनो की शादी 2010 में हुई थी । चरित्र संदेह को लेकर अक्सर दोनों के बीच झगड़े होते थे । स्थानीय लोगों ने बताया कि मीरा पास में रहने वाले युवक से ज्यादा बात करती थी,जो बलवीर को पसंद नहीं था । एएसपी शियाज केएम का कहना है कि हत्या के पीछे की वजह चरित्र संदेह आ रही है, आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और जांच की जा रही है । यह भी पढ़े-आखिर कौन हैं संदेशखाली मामले का मुख्य आरोपी शाहजहां शेख
आखिर कौन हैं संदेशखाली मामले का मुख्य आरोपी शाहजहां शेख

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली से तृणमूल कांग्रेंस का वो नेता जिसकी पुलिस भी गुलामी करती हैं। जी हाँ हम बात कर रहे है संदेशखाली में गुंडा राज करने वाले शाहजहां शेख की जिसकी पुलिस भी जी हजूरी करती है । आखिर क्यों बंगाल में रहने वाली 18 की हो या 40 की महिलाएं कोई भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती है । क्यों महिलाओं को मौत से ज्यादा सताता हैं शाहजहां का भय । महिलाओं ने बताई शाहजहां शेख की दास्तान संदेशखाली की महिलाएं बोली कि शाहजहां ने किसी को नहीं बख़्शा,13 साल हो गये यह सब सह रहे है । 18 की हो या 40 की जो भी महिला पसंद आती है उसे पार्टी मीटिंग के बहाने ऑफिस बुला लेता है और जो महिलाएं नहीं आती है उन्हें घऱ से उठवा लेता है। जब तक मन होता है दो-तीन-चार दिन तक ऑफिस मे ही रखता है और शारीरिक शोषण करता है । जो महिला नहीं आती है उसके पति को उठवा लेता और उसके साथ मारपीट करता है तो मजबूरी में आखिरकार उसको भी शोषण के लिए आना ही पड़ता है । शाहजहां और उसके दो साथियों शिबू हाजरा और उत्तम सरदार पर आरोप है कि इन तीनों ने मिलकर महिलाओं के साथ जबरदस्ती गैंगरेप किया । शिकायत करने पर सपोर्ट की जगह डराते पुलिस अधिकारी शाहजहां शेख के खिलाफ महिलाओं ने सेक्शुअल हैरेसमेंट की कई बार शिकायत कर दी है लेकिन सेक्शुअल हैरेसमेंट की सिर्फ एक एफआईआर दर्ज हुई है,जिससे आप खुद समझ सकते हैं कि किस तरह पुलिस भी शाहजहां शेख की वफादारी एक वफादार कुत्ते की तरह निभा रही हैं । महिलाओं ने बताया कि पुलिस टीम मे शामिल अधिकारी एक ही बात को बार बार पूरी डिटेल में बताओ कैसे-कैसे क्या-क्या हुआ था,कोई जाँच कराई क्या या फिर कोई मेडिकल रिपोर्ट नहीं है । सपोर्ट की जगह पुलिस यहीं सब सवाल घुमा-घुमाकर पूछती है और मदद की जगह डराती है । एसपी बोले-शाहजहां के खिलाफ शिकायत नहीं बसीरहाट के एसपी हुसैन मेहदी रहमान ने शनिवार को कहा था कि संदेशखाली केस में शाहजहां शेख के खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली है। टीएमसी नेता शिबू हाजरा की गिरफ्तारी के साथ मामले में गिरफ्तार किए गए लोगो की संख्या 18 हो गई है । इन्हें गैंगरेप की धारा 370 डी और हत्या की कोशिश धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया गया है । यह भी पढ़े-फिल्म आर्टिकल 370 को लेकर कश्मीर में क्या बोले पीएम मोदी
धार के मनावर में नगर पालिका कर्मचारी की गोली मारकार हत्या

कर्मचारी की हत्या
कौन है जैन धर्म के अगले आचार्य मुनिश्री समय सागर जी महाराज

जैन धर्म के सबसे श्रेष्ठ गुरू आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने 17 फरवरी शनिवार की रात 2:35 बजे हम सब को अलविदा कह महा समाधि में लीन हो गए। रविवार की दोपहर को महाराज जी की पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया था। जिकसे बाद आज यानि 20 फरवरी को उनकी अस्थि संचय होगी। इस बड़ी घटना के बाद सबके जहन में यहीं चल रहा होगा की आखिर आचार्य विद्यासागर महाराज जी के बाद आचार्य की उपाधि किसे दी जाएगी। आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने पहले ही त्याग दिया आचार्य का पद आपको बता दें कि जैन संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने 6 फरवरी को मुनि योग सागर से मिलने के बाद इस विषय पर चर्चा किए और उसके बाद आचार्य पद से त्याग कर दिया था। उन्होंने मुनि समय सागर जी महाराज को आचार्य पद देने की घोषणा भी की थी। जिसके बाद मुनि समय सागर महाराज के चंद्रगिरी तीर्थ पहुंचने के बाद विधिवत सभी नियमों के साथ उन्हें आचार्य की गद्दी सौंपी जाएगी। विद्यासागर महाराज के उत्तराधिकारी बनाए गए मुनि समय दिन मंगलवार को मध्य प्रदेश के रावल वाड़ी पहुंच गए। मुनि समय महाराज 43 साधुओं के साथ पैदल यात्रा कर 22 फरवरी को बालाघाट से डोगरगढ़ पहुंचेंगे। वहां उन्हें नियम अनुसार आचार्य की गद्दी सौंप दी जाएगी। कौन है आचार्य समय सागर जी महाराज समय सागर महाराज जी जैन संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के शिष्य है। प्रथम मुनि महाराज मुनिश्री समयसागर जी महाराज अभी 65 साल के हैं जो आचार्य विद्यासागर जी महाराज के सांसारिक जीवन के छोटे भाई और शिष्य भी हैं। ये मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले हैं। इनका जन्म स्थान कर्नाटक के वेलगाम में है। दरअसल आचार्य समय सागर जी महाराज पहले शांतिनाथ जैन के नाम से चर्चित थे। महाराज जी के पिता का नाम मल्लप्पाजी जैन है। इनकी मां का नाम श्रीमंति जी जैन है। जैन धर्म के अगले आचार्य संत शिरोमणि आचार्य समय सागर महाराज जी अपने छह भाई-बहनों में छठे नंबर पर है। संत शिरोमणि आचार्य समय सागर महाराज जी ने ब्रह्मचर्य व्रत दो मई 1975 को अपनाया। इसके बाद 18 दिसंबर 1975 को उन्होंने झुल्लक दीक्षा ली है और 31 अक्टूबर 1978 को एलक दीक्षा जैन सिद्ध क्षेत्र नैनागिरी जी के छतरपुर मध्य प्रदेश में ली इसके बाद मुनि दीक्षा 8 मार्च 1980 को जैन सिद्ध क्षेत्र द्रोणगिरी जी, छतरपुर मध्य प्रदेश में ली है। जैन संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज इनके सांसारिक जीवन के भाई और दीक्षा गुरू भी है। अब अपने दीक्षा गुरू की जगह वह स्वयं लेंगे। ये भी पढ़ें- Kalki Dham: कौन हैं आचार्य प्रमोद कृष्णम जिसे पीएम मोदी से मिली तारीफ
UP police paper leak 2024 को लेकर हुआ एक बड़ा खुलासा

UP police paper leak 2024: उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टोबल भर्ती परीक्षा पिछे दिनों में संपूर्ण हो गई है। इसी बीच उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के संबंध में पेपर लीक भी अफवाहें फैलाई जा रही हैं। इन अफवाहों का आयोग ने मीडिया के सामने खंडन किया है। आयोग का कहना है कि ये फर्जी खबरों बिल्कुल सही नहीं हैं। आयोग ने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा और प्रोन्नति बोर्ड ने जनता को दिलासा दिया कि परीक्षा बिना किसी परेशानी के सुचारू रूप से हुई है। आपको बता दें कि इस बार यह भर्ती 60244 कांस्टोबल पदों के लिए निकली है। पुलिस ने 287 लोगों को किया गिरफ्तार उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा पेपर लीक की फर्जी खबरों पर आयोग ने बड़ा एक्शन लिया है। जिस जिन परीक्षा का आखिरी दिन था, उस दिन पेपर लीक मामले से जुड़े 93 लोगों को पुलिस मे गिरफ्तार किया है। उसके बाद 15 फरवरी से नकल रोकने, पेपर सॉल्वरों, सॉल्वर गिरोह के सदस्यों और पेपर लीक के आरोपीयों को पकड़ने के लिए एक ऑपरेशन शुरू किया था जिसके बाद पुलिस ने 287 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पेपर लीक आरोपियों से पूछ-ताछ जारी उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार ने बतााया कि राज्य के सभी 2385केंद्रों पर दोनों दिन लागातार परीक्षा शांतिपूर्ण और स्वच्छ तरीके से संपन्न हुई है। पुलिस प्रशासन के बड़े अधिकारियों ने सभी जिलों का दौरा करते रहे है। आपको बता दें कि परीक्षा में कुल 48 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए है। परीक्षा के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों से पूछताछ चल रही है। ये भी पढ़ें- पड़ौसी ने काम के बहाने बुला कर की नाबालिग से जबरदस्ती
धरती पर मिले भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि के चार सबूत

जब-जब पृथ्वी पर पाप और अन्याय बढ़ा है तब-तब पापियों का नास करने स्वयं भगवान विष्णु ने धरती पर अवतार लिया है। कुछ एैसा ही कलयुग में होगा जब स्वयं भगवान विष्णु धरती पर भगवान कल्कि का अवतार लेंगे। दोस्तों महाभारत काल के बाद जब श्रीकृष्ण ने अपना देहत्याग किया तो उनके सुदर्शनचक्र ने खुद को पृथ्वी के अंदर समाहित कर लिया था। एैसा कहा जाता है कि जब भगवान कल्कि का धरती पर अवतार होगा तब यही सुदर्शनचक्र भगवान कल्कि धारण करेंगे। लेकिन ये सोचने वाली बात है कि कलयुग में वह सुदर्शनचक्र से कैसे युध्द करेंगे तो आपको बता दें कि ये सब उनको स्वयं भगवान परशुराम सिखाएंगे। भगवान परशुराम आज भी धरती पर भगवान कल्कि की प्रतिक्षा कर रहे हैं। सुदर्शनचक्र के साथ कर्ण का अमोख कवच और कुंडल भी इस कलयुग के युध्द में भगवान कल्कि की सुरक्षा करेंगे। महाभारत काल के बाद आज भी समुंद्र देव और सुर्यदेव इस कवच और कुंडल की सुरक्षा कर रहे हैं और काली पुरुष के खिलाफ होने वाले इस युध्द में भगवान कल्कि का सबसे बड़ा हथियार ब्रह्म पदार्थ होगा। वही ब्रह्म पदार्थ जो भगवान जगन्नाथ की मूर्ती में है। धर्म विद्वानों की माने तो ब्रह्म पदार्थ में असीमित शक्तियां और कलयुग काल में इसी ब्रह्म पदार्थ की मदद से भगवान कल्कि युध्द में काली पुरूष को पराजित करेंगे। भागवत पुराण के स्कन्ध 12 के अध्याय 2 में एक कथा के मुताबिक उत्तर प्रदेश के सम्भल गावं में भगवान कल्कि का जन्म होगा और वह अपनी माता-पिता की पाचवीं संतान होंगे। इस कथा में ये भी बताया गया कि भगवान कल्कि की दो पत्नीयां होंगी। ये भी पढ़े- पड़ौसी ने काम के बहाने बुला कर की नाबालिग से जबरदस्ती