भोपाल और छिंदवाड़ा से गिरफ्तार हुए संदिग्ध आतंकी , NIA और ATS ने की कार्रवाई

मध्यप्रदेश में एक बार फिर एनआईए और एटीएस ने बड़ी कार्रवाई की है इस कार्रवाई में राजधानी भोपाल सहित छिंदवाड़ा से लगभग आधा दर्जन से अधिक संदिग्ध आतंकवादियों को एटीएस ने गिरफ्तार किया है । ऐशबाग इलाके से गिरफ्तार हुए 4 संदिग्ध नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी और तेलंगना एटीएस की टीम के द्वारा भोपाल और छिंदवाड़ा में सुबह दबिश देकर 11 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है एनआईए (NIA) और एटीएस की टीम के द्वारा राजधानी भोपाल के ऐशबाग इलाके से चार युवकों को पकड़ा है जिनके पास बड़ी मात्रा में कथित तौर पर देश विरोधी सामग्री भी मिली है । सूत्रों के मुताबिक एनआईए के द्वारा हिरासत में लिए गए इन युवकों का आतंकी संगठन हिज्ब-उत- तहरीर (HUT) से जुड़े होने के पक्के सबूत एनआईए और एटीएस को मिले हैं । Also Read : मणिपुर हिंसा में फंसे MP के छात्र जल्द होगी घर वापसी, राज्य सरकार ने बनाया एक्शन प्लान एनआईए के द्वारा यह कार्रवाई भोपाल के ऐशबाग, जवाहर कॉलोनी और बाग फरहत अफजा में की गई है हालांकि इस मामले में एनआईए और एटीएस ने स्थानीय पुलिस को शामिल नहीं किया गया। बताया यह जा रहा है कि इस कट्टरपंथी संगठन एच यू टी के 16 लोगों को अब तक हिरासत में लिया गया है जिनमें भोपाल और छिंदवाड़ा के 11 वही तेलंगाना के 5 संदिग्ध शामिल है इन सबके बीच बड़ी बात निकल कर सामने यह आई है कि भोपाल गैस त्रासदी की एक एक्टिविस्ट का बेटा भी इन संदिग्धों में शामिल है । खतरनाक आतंकी संगठनों से भी खतरनाक है HUT जानकारी के मुताबिक इस्लामी संगठन हिज्ब उत तहरीर सबसे खतरनाक कहे जाने वाले आतंकी संगठन आईएसआईएस से भी ज्यादा खतरनाक है । इस संगठन का साम्राज्य लगभग 50 देशों में फैला हुआ बताया जाता है और भोपाल और छिंदवाड़ा से पकड़े गए यह लोग मध्य प्रदेश की राजधानी के बीचो बीच बैठकर कट्टरपंथी इस्लामिक गतिविधियों को कथित तौर पर संचालित कर रहे थे ।
मणिपुर हिंसा में फंसे MP के छात्र जल्द होगी घर वापसी, राज्य सरकार ने बनाया एक्शन प्लान

मणिपुर में हो रहे दंगों की आंच अब मध्यप्रदेश तक पहुंचने लगी है ऐसे में मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा मणिपुर में फंसे प्रदेश के बच्चों को निकालने के लिए बड़ा एक्शन प्लान बनाया है । क्यों हो रही है मणिपुर में हिंसा दरअसल, बीते कई दिनों से मणिपुर में हिंसा भड़की हुई है। इस हिंसा में अब तक कई लोगों जान भी जा चुकी है। इस हिंसा के पीछे जो बड़ी वजह सामने आयी है वो ये कि प्रदेश में बहुसंख्यक मेइती समुदाय खुद को अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहा है जिसके विरोध में प्रदेश के आदिवासी संगठन प्रदर्शन कर रहे थे। इनमे मुख्य रूप से ऑल ट्राईबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर के द्वारा आदिवासी एकजुटता मार्च का आवाहन किया और इसी मार्च में चुराचंदपुर जिले के तोरबंग क्षेत्र में हिंसा फैल गई इस हिंसा की चपेट में पूरा मणिपुर राज्य आ गया। हालांकि, केंद्र सरकार के द्वारा राज्य की कानून व्यवस्था को अपने हाथ में ले लिया है जिसके बाद अब राज्य के हालात धीरे-धीरे पटरी पर आ रहे हैं । प्रदेश के छात्रों को सरकार करेगी एयर लिफ्ट इस हिंसा में खबर आ रही मध्यप्रदेश के तकरीबन 30 छात्र मणिपुर में फंसे होने की खबर जब प्रदेश सरकार को लगी तो तत्काल ही प्रदेश सरकार में राज्य के राज्यपाल और मुख्यमंत्री से फोन पर चर्चा की। जबकि केंद्रीय विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मणिपुर में फंसे छात्रों से फोन पर चर्चा करके उनका हालचाल पूछा है। सरकार के द्वारा इन बच्चों को मणिपुर से बाहर निकालने के लिए एयरलिफ्ट करने का फैसला लिया है। Also Read : रायसेन जौहर : 700 क्षत्राणियों के शौर्य की गाथा है रायसेन किले की ये घटना ! गृह मंत्री बोले जल्द वापिस आएंगे छात्र मध्यप्रदेश और मणिपुर के गृह विभाग और पुलिस के अधिकारी भी उच्चस्तर पर चर्चा कर रहे हैं। जल्द ही प्रदेश के सभी बच्चों की सुरक्षित वापसी होगी। हम सभी बच्चों से बातचीत करके उनके संपर्क में हैं, कुछ बच्चों का कहना है कि वह वापस आना चाहते हैं, जबकि कुछ बच्चों ने खुद को सुरक्षित बताया है। ऐसे में जो छात्र आना चाहते हैं, उन्हें मणिपुर से पहले कोलकाता लाया जाएगा। उसके बाद कोलकाता से मध्य प्रदेश आने वाली रूटीन फ्लाइट से भोपाल लाया जाएगा।
रायसेन जौहर : 700 क्षत्राणियों के शौर्य की गाथा है रायसेन किले की ये घटना !

भारत के गौरवशाली इतिहास में दर्जनों ऐसे उदाहरण हैं जिन्हें पढ़ और सुनकर आज भी हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं . इन उदाहरणों में जब भारतीय वीरांगनाओं की बात आती है तो याद आते हैं उनके शौर्य पूर्ण निर्णय ऐसे ही एक निर्णय का उदाहरण है. रायसेन के किले में किया गया रानी दुर्गावती का जौहर . यह जौहर मध्य प्रदेश की राजधानी के समीप रायसेन जिले के किले पर रानी दुर्गावती के साथ 700 वीरांगनाओं ने किया था . ये है जौहर की पूरी कहानी . इतिहासकारों के अनुसार आज से लगभग 991 वर्ष पहले 6 मई 1532 को यह जोहर रायसेन के किले में उस वक्त किया गया था जब रायसेन के किले पर राजा शिलादित्य की रानी दुर्गावती ने बहादुर शाह के सामने झुकने की बजाए लड़ने की बात ठानी थी.रानी दुर्गावती मेवाड़ के महाराजा राणा सांगा की बेटी थी उनका विवाह रायसेन के तोमर राजा शिलादित्य से हुआ था . विवाह के बाद से ही रानी दुर्गावती अपने पति के साथ राज्य की प्रजा की सेवा में जुटी रहती थी और राजा शिलादित्य के हर निर्णय में कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ देती थी.लेकिन 6 मई को रानी दुर्गावती ने अपने राज्य को देख दुश्मनों के सामने झुकने की बजाए 700 वीरांगनाओं के साथ जौहर कर लिया.दरअसल गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह नजर हमेशा से ही रायसेन के किले पर थी जिसके बाद उसने रायसेन के किले पर हमला करने के योजना बनाई और प्रदेश के मांडू में पड़ाव डाला. जिसके बाद राजा शिलादित्य को अपने कैंप में बुलाकर धोखे से मांडू में ही कैद कर लिया और अपनी सेना के साथ राजा शिलादित्य के भाई लक्ष्मण राय की देखरेख में जब यह अकेला था तब इसके लिए को घेर लिया . घेराबंदी के बाद भी जब सुल्तान रायसेन के किले में सेंध नहीं मार पाया . लेकिन इस इस दौरान बहादुर शाह किले को जीतने की जद्दोजहद में लगा रहा शत्रुओं की सेना की संख्या अधिक होने के कारण राजा शिलादित्य की हार तय थी लेकिन फिर भी राजा ने किले में पहुंचकर रानी दुर्गावती और अपने भाई से कहा कि किसी भी हालत में हमें झुकना नहीं है हर हाल में लड़ना है रानी दुर्गावती ने अपने सैनिकों से कहा था कि “झुको मत लड़ो” . रानी ने लिया एक समय भोजन करने का निर्णय बहादुर शाह के साथ जब रायसेन किले की सेना का युद्ध शुरू हुआ तो युद्ध में बारूद की कमी और सैनिकों की कमी के साथ-साथ धीरे-धीरे अनाज की भी कमी महसूस होने लगी उस वक्त रानी दुर्गावती ने फैसला लिया कि वह एक समय ही भोजन करेंगे देखते देखते रायसेन की सारी महिलाएं एक समय भोजन करने लगीं .ऐसे में राजपूत सेना ने बहादुर शाह की सेना से लड़ाई जारी रख आत्मघाती युद्ध शुरू तो कर लिया लेकिन इस युद्ध में राजा शिलादित्य और उनके भाई की मृत्यु हो गई जिसके बाद रानी दुर्गावती ने 700 राजपूतनियों के साथ रायसेन के किले में बनी एक कुंड में जाकर जोहर कर लिया.इस घटना की जानकारी जैसे ही शिलादित्य के बेटे भूपति राय को लगी तो वह अपने युद्ध अभियान से वापस लौटा और बहादुर शाह के सामंत को मार भगाया जिसके बाद एक बार फिर रायसेन के किले पर राजपूत राजाओं का कब्जा हो गया . जिले के गजेटियर में मौजूद हैं ऐतिहासिक प्रमाण इस ऐतिहासिक घटना से अधिकांश लोग अनभिज्ञ हैं लेकिन आज भी इस गौरवशाली घटना का उल्लेख रायसेन जिले के गजट ईयर में मौजूद है वरिष्ठ पुरातत्वविद नारायण व्यास जी के अनुसार रायसेन के किले में रानी दुर्गावती के जोहर के कई ऐतिहासिक प्रमाण मिले हैं उनके मुताबिक इतिहास को अगर देखा जाए तो मध्यकाल में रायसेन के किले की महत्वपूर्ण भूमिका रही है संदर्भ – वरिष्ठ पत्रकार अम्बुज माहेश्वरी द्वारा प्रकाशित न्यूज रिपोर्ट और रायसेन जिले का गजेटियर
अचानक वानरों के जैसे उछलने लगे बागेश्वर धाम सरकार जाने क्यों ?

छतरपुर – मध्यप्रदेश के बागेश्वर धाम सरकार महेंद्र धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के हजारों वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं जिनमें उनके द्वारा कही गई तरह-तरह की बातें और बुंदेली चुटकुले होते हैं लेकिन इस बार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है जिसमें वे वानरों के जैसे उछलते हुए नजर आ रहे . क्या है वीडियो में दरअसल यह वीडियो छतरपुर के बागेश्वर धाम सरकार का ही बताया जा रहा है जब महेंद्र धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने भक्तों को दर्शन देने दिव्य दरबार हॉल से बाहर आने लगे तो वह अचानक से वानर के जैसे उछल कूद करने लगे इसी दौरान किसी भक्तों के द्वारा शास्त्री की हरकत को फोन में रिकॉर्ड कर लिया और अब यह वीडियो फेसबुक टि्वटर और इंस्टाग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जमकर वायरल हो रहा है .
खत्म करनी पड़ेगी डॉक्टरों को हड़ताल ! हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश !

भोपाल – मध्य प्रदेश में चल रही डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर एमपी हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है, हाईकोर्ट ने डॉक्टरों की हड़ताल को अवैध ठहराया है . दरअसल मध्य प्रदेश के लगभग 15000 डॉक्टर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे हुए हैं जिसकी वजह से प्रदेश कई अस्पतालों में मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. डॉक्टरों की हड़ताल से गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज ज्यादा परेशान हैं .हालात ऐसे हैं कि प्रदेश के 12 सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती 228 मरीजों के ऑपरेशन टाल दिए गए हैं . हाईकोर्ट ने हड़ताल को ठहराया अवैध वहीं मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने डॉक्टरों की हड़ताल को अवैध बताया है. दरअसल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि हड़ताल पर बैठे सभी डॉक्टर तत्काल अपने काम पर लौटे, अस्पताल में मौजूद अंतिम मरीज का भी इलाज करें .साथ ही साथ हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि बिना अनुमति के भविष्य में हड़ताल ना करें .बता दें कि यह याचिका पूर्व पार्षद इंद्रजीत कुमार पाल ने लगाई थी इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस रवि मलिमथ और जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने यह बात कही है इस मामले की पैरवी संजय अग्रवाल राहुल गुप्ता और नीरजा अग्रवाल के द्वारा की गई है
बजरंग दल की तुलना PFI से करने पर आगबबूला हुए CM और वीडी शर्मा , कमलनाथ ने किया समर्थन

भोपाल – कांग्रेस ने कर्नाटक में अपने घोषणा पत्र में बजरंग दल पर बैन लगाने की घोषणा क्या की उसके बाद से पूरे देश का राजनीतिक पारा बढ़ गया है . और अब मध्यप्रदेश में भी इस विषय को लेकर जमकर राजनीति शुरू हो चुकी है . कर्नाटक चुनावों में कांग्रेस की घोषणा पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री गृहमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने जमकर निशाना साधा तो वही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने भी इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया दी है . कांग्रेस की मति मारी गई है ,जो बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की बात कर रही है – सीएम शिवराज सीएम शिवराज ने कांग्रेस की इस घोषणा का विरोध करते हुए कहा है कि “जाको प्रभु दारुण दुख देही,ताकी मति पहले हर लेही”कांग्रेस की मति मारी गई है जो बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की बात कर रही है.सीएम ने कहाकी बजरंग दल एक प्रखर राष्ट्रवादी संगठन है जो आतंकवाद का विरोध करता है, लव जिहाद का विरोध करता है, सामाजिक सेवा करता है अपने धर्म और संस्कृति के जागरण की बात करता है ऐसे राष्ट्रवादी संगठन की तुलना कांग्रेस ने PFI से की है. ये वही कांग्रेस से जो अयोध्या में राम मंदिर का विरोध करती है , ये वही कांग्रेस है जिसने राम सेतु को काल्पनिक बताया है आज कांग्रेस का चेहरा पूरी तरीके से बेनकाब हो गया है . यही नहीं सीएम ने कांग्रेस को सिमी खाद पानी देने वाला बताया है . कांग्रेस को कर्नाटक में अपनी हार दिख इसीलिए बजरंग दल पर बैन लगाने की बात कर रही है – वी डी शर्मा वहीं इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा ने भी कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से तुष्टिकरण की राजनीति करती है. कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस को अपनी हार दिख रही है, इसलिए देश में अपनी समाजिक और धार्मिक भूमिका निभाने वाले बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की बात कर रही है. इसी मामले को लेकर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पीसीसी चीफ कमलनाथ को पत्र लिखकर बजरंग दल की तुलना पीएफआई से करने पर जवाब मांगा है . कमलनाथ ने किया कर्नाटक कांग्रेस का समर्थन कर्नाटक कांग्रेस के द्वारा उठाए इस कदम का मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने समर्थन करते हुए कहा है कि जो नफ़रत फैलाए चाहे व्यक्ति हो या संगठन उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, यह तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। किसी को टारगेट नहीं करना है .