लाडली बहना योजना पर कैबिनेट का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने लाडली बहना योजना में 21 वर्षीय शादीशुदा महिलाओं को भी जोड़ा.कैबिनेट ने फैसला लिया.अब 21 साल की शादीशुदा महिलाओं को भी योजना का लाभ मिलेगा.साथ ही ऐसे महिला जिनके पास ट्रेक्टर है उनको भी योजना के तहत 1000 रुपये दिए जायेंगे. लाडली बहना योजना में हुआ ये बादलाव लाडली बहना योजना में बदलाव के फैसले को मुख्यमंत्री का बड़ा कदम बताया जा रहा है.इसके साथ ही कैबिनेट ने संविदाकर्मियों की महापंचायत में की गयी घोषणा को भी मंज़ूरी दे दी. राज्यकर्मचारियों को भी DA 4% देने और उन्हें जनवरी से जून 2023 तक एरियर देने को मंजूरी दी. लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई मीटिंग का सबसे बड़ा फैसला लाडली बहना योजना में बदलाव ही रहा.इसके चलते अब 18 लाख से ज्यादा महिला योजना का हिस्सा बन जायेंगी. DR नरोत्तम मिश्रा DR नरोत्तम मिश्रा का कहना है की योजना में अब 180 रुपये लगाये गए हैं.दस महीने में योजना का भार 17000 करोड़ होगा. गया है.योजना की उम्र 23 साल से 21 करने और ट्रेक्टर वाली महिलाओं को जोड़ने के बाद फॉर्म 25 जुलाई से 20 अगस्त तक भरे जायेंगे. योजना से जुड़ी प्रक्रिया पहले जैसी होगी इसमें कोई बदलाव नहीं होगा.साथ ही 10 सितम्बर को महिलाओं के खाते में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पैसे डालेंगे कैबिनेट ने संविदा कर्मचारियों के लिए मुख्यमंत्री द्वारा की गयी घोषणाओं को मंजूरी दी. महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश, नियमित कर्मचारियों के समान वेतन, अनुकंपा नियुक्ति आदि की भी मंजूरी दी.
क्या इंसानों से बेहतर सरकार चला सकती है रोबॉट्स?

सोफिया, जो की UNDP की पहली रोबोट इनोवेशन एम्बेसडर है, उसने जेनेवा के रोबोट प्रेस कॉनफेरेंस मे कहा की क्योंकि वो इंसानों जैसे पक्षपाती या भावुक नहीं है इसलिए और कुशल तरीके से सरकार चला पाएंगे। स्विजेरलैंड के जेनेवा मे UN की टेक्नोलॉजी एजेंसी ITU (International Telecommunication Union) के द्वारा 7 July को विश्व की सबसे पहली रोबोट-ह्यूमन प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन हुआ था। इसमे मीडिया मे इंसानों ने सवाल पूछा और रोबॉट्स ने इनका जवाब दिया। इसमें 51 रोबोट्स के साथ 3000 एक्सपर्ट भी मौजूद थे। ये आर्टिफिसियल इन्टेलिजन्स (AI) के द्वारा संचालित एडवांस्ड ह्यूमनॉइड रोबोट थे। इनमे शामिल थे :• सोफिया, UNDP (United Nations Development Programme) की प्रथम रोबोट इनोवेशन राजदूत• ग्रेस, हेल्थकेयर रोबोट• देसडेमोना, रॉक स्टार रोबोट• अमीका, तथाकथित दुनिया की सबसे एडवांस्ड ह्यूमनॉइड रोबोट• गेमिनॉइड और नडीन, जो अपने निर्माताओं के जैसे दिखने वाले थे मीडिया कार्यक्रम में रोबोट के रचनाकारों का परिचय और पत्रकारों के रोबोट से प्रश्नों का दौर शामिल था, जिसमे 9 रोबोट्स को बैठाया गया था।मीडिया की एक सवाल पर सोफिया ने कहा की सरकार चलाने में रोबोट अधिक आशाजनक साबित हो सकते हैं। उसने कहा की रोबोट समान भावनाएँ नहीं रखती है जो कभी-कभी निर्णय लेने में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं। पर एक रिपोर्टर के टोकने के बाद, बयान बदलते हुए कहा की इंसानों के साथ काम करते हुए एक प्रभावी तालमेल बना सकते हैं। ग्रेस ने नौकरी पर खतरे के ऊपर जवाब देते हुए कहा की वह किसी भी मौजूदा नौकरी की जगह नहीं लेंगे और लोगों के साथ मिलकर काम करेंगे। प्रेस कांफेरेंस में दिक्कतें: पर आखिरकार ये है तो रोबोट ही तो दिक्कतें तो आनी ही थी। जहां उधर मीडिया को धीरे धीरे सवाल पूछने को कहा गया, वही जब जवाब में देरी हो रही थी तो वजह इंटरनेट बताया जा रहा था ना की रोबोट। अस्पष्ट उत्तरों के साथ ऑडियो problems का भी सामना करना पड़ा। AI FOR GLOBAL GOOD SUMMIT का उद्देश्य: इस आयोजन का उद्देश्य बीमारी और भूख जैसे मुद्दों से निपटने में आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस (AI) और इसके रोबोटिक अनुप्रयोगों की क्षमता को उजागर करना था। उसके साथ ही रोबोटिक्स की क्षमताओं और सीमाओं, दोनों को प्रदर्शित करना था और ये जानना की यू.एन. के सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) में कैसे मदद कर सकती हैं।
क्या चीन सच मे हमारे दिमाग को कंट्रोल करने के लिए हथियार बना रहा है?

CNN-News18 के हाथ एक रिसर्च रिपोर्ट लगी है जिससे साफ पता चलता है की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) और वहाँ की पीपल्स लिबरेशन आर्मी मिलकर एक न्यूरोस्ट्राइक हथियार बना रहे है। वो ये हथियार CCP BioThreats Initiatives के तहत बना रहे है| क्या है न्यूरोस्ट्राइक? न्यूरोस्ट्राइक का तात्पर्य है कॉगनिटिव एबिलिटी को ख़राब करना, स्थितिजन्य जागरूकता को कम करना और दीर्घकालिक न्यूरोलॉजिकल गिरावट के लिए विशिष्ट नॉन- काएनेटिक तकनीक का उपयोग करना।हम ऐसे हथियार की बात कर रहे है जिसमे हैंडहेल्ड बंदूक या एल्क्ट्रो मैग्नेटिक स्पेक्ट्रम जैसे स्टैंडअलोन प्लेटफार्मों के माध्यम से माइक्रोवेव या निर्देशित ऊर्जा हथियारों का उपयोग करके मस्तिष्क पर हमला या यहां तक कि उसे नियंत्रित भी किया जा सकता है।दुनिया के लिए ये एक बहुत बड़ा बायोलॉजिकल खतरा साबित होगा। वो कहते है ना रण भूमि से पहले युद्ध मन भूमि मे होता है, इसलिए चीन इन हथयारों से पहले युद्ध सेनानियों और नागरिकों दिमाग कों नियंत्रित करना चाहता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ‘न्यूरोस्ट्राइक’ और मनोवैज्ञानिक युद्ध को इंडो-पैसिफिक में अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ अपनी असिमित रणनीति के मुख्य तरीके के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध का असामान्य हिस्सा है, न कि क्षमताओं का एक अपरंपरागत सेट जिसका उपयोग केवल चरम परिस्थितियों में किया जा सकता है। चीन आगे क्या कर सकता है? 2020 और 2021 में कोरोना महामारी के सबसे तीव्र चरणों के दौरान दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर, ताइवान स्ट्रेट और चीन-भारत सीमा पर चीनी सैन्य गतिविधि में तेज से वृद्धि हुई थी। इसका परिणाम ये हो सकता है की चीन इस हथियार का उपयोग ताइवान पर पूरी तरह से काबू पाने के लिए करे जिससे अमेरिका को कोई भनक भी नहीं लगे। यह अमेरिका की श्रेष्ठता को अस्वीकार और निष्क्रिय कर देने की क्षमता रखता है।
भारत में जल्द शरू होगा 24/7 वर्चुअल अदालत

भारत मेंजल्द शरू होगा 24/7 वर्चुअल अदालत, सारे मामलों पर सनुवाई और उसका तुरंत हलअगर बात की जाए कोर्ट और कचहरी की, तो उसका काम सिर्फ़ दिन में होता हैं, परंतु अब भारत सरकार द्वाराजल्द ही शरू होगा 24/7 अदालत , और वो अदालत वर्चुअल होगा● वर्चुअल अदालत में ट्रैफिक चालान के अलावा अन्य केसों पर भी होंगी सनुवाई।● वर्चुअल कोर्ट की अवधारणा का उद्देश्य हैंकि कोर्ट में भीड़ को कम करना । हालांकि वर्चुअल कोर्ट ट्रैफिक चालान के अलावा भी कई मामलों पर निपटारा करेंगी, वर्तमान समय में वर्चुअर्चुल कोर्ट सिर्फ़ ट्रैफिक चालान को ही सभंलते हैं काननू ने इस विषय पर बहुत ज्यादा रिसर्च और स्टडी की तथा ज्यडिूडिशियल एकेडमी, लॉयनिूनिवर्सिटर्सिटी , आईआईएमएस और आईआईटी से ये प्रस्ताव को रखा गया हैं काननू मंत्रालय द्वारा इस प्रस्ताव को रखते हुए कहा ,कि इसका उद्देश्य अदालत में आम लोगों और कर्मचारियों को भौतिक स्तिथियों को कम करना और अदालत में आने वाले लोगों की सख्ंया भी कम करना है।स्टडी में बताया गया हैं कि वर्चुअल कोर्ट का मैनेजमेंट जज ही करेंगे, तथा ऐसे करके वर्चुअल कोर्ट का क्षेत्र बहुत सारे राज्यों में बढ़ाया जा सकता हैं 17 राज्यों मेंशरू होगा वर्चुअल अदालत● 17 राज्यों और 21 केन्द्र शासित प्रदेशों मेंशरू होगा वर्चुअल कोर्ट, कार्मशिर्मशियल अदालत के परफॉर्मेंसर्में के हि साब से बताया गया हैंकि कमर्शि यर्शि ल केस का समय सीमा के अदं र ही खत्म कर दि या जायेगा।● काननू मंत्रालय ने अब तक 2.5 करोड़ सेज्यादा मामलों को दर्ज कि या गया है, और 33 लाख मामलों में 360 करोड़ रूपये से अधिक वसूली भी
आरिफ के उकसाने पर युवती ने खाया कीटनाशक

आरिफ खान ने युवती पर डाला आत्महत्या करने का दवाब , किया कीटनाशक खाने को मजबूर मध्य प्रदेश के दमोह जिले में हटा थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित ग्राम कुआंखेड़ा में शुक्रवार को एक नाबालिग युवती बेहोशी की हालत में मिली है। जिसके बाद युवती को जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया ।युवती ने बताया कि आरिफ खान नामक एक युवक की प्रताड़ना और दवाब के कारण उसने कीटनाशक का सेवन कर लिया. क्या है पूरी कहानी शुक्रवार को कुआंखेड़ा ग्राम में नाबालिग युवती बेहोशी की अवस्था में पड़ी हुई थी। जिसकी सूचना स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी थी। पुलिस ने युवती को उपचार के लिए हटा अस्पताल में दाखिल कराया था। जब घटना स्थल पर युवती के पास पड़े बैग की तलाशी ली गई तो उसमें से जहर की 1 शीशी बरामद हुई है। हटा नायब तहसीलदार शिवराम चढ़ार को दिए गए बयान में युवती ने बताया कि वह ग्राम हिनौती की रहने वाली है। प्रतिदिन बस से पढ़ाई करने के लिए कुम्हारी आवागमन करती थी। वह जिस बस से आया जाया करती थी उसी बस में ही काम करने वाला आरिफ खान नाम का एक युवक उसे आत्महत्या करने के लिय बीते कुछ दिनों से उकसाकर परेशान कर रहा था। पिछले कुछ दिनों से यह युवक इस कदर युवती को परेशान कर रहा था कि वह युवती अपनी पढ़ाई भी ठीक से नहीं कर पा रही थी। इसके साथ साथ आए दिन यह युवक इस पीड़ित नाबालिग युवती के माता-पिता को जान से मारने की धमकी दे रहा था। युवती ने यह कबूल किया है कि युवक द्वारा ही नाबालिग युवती को कीटनाशक मुहैया कराया गया था साथ ही युवक द्वारा ही युवती पर दबाव बनाकर एक चिन्हित स्थान पर जाकर कीटनाशक का सेवन कर लेने की बात कही गई थी। जिसके बाद प्रताड़ित होकर नाबालिग युवती ने कीटनाशक का सेवन कर लिया है। आरिफ दे रहा था धमकी बाद में उसे गंभीर हालत में उपचार हेतु जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि आरिफ खान युवती को बीते कुछ समय से ब्लैकमेल कर रहा था। ब्लैकमेलिंग के दौरान युवती को आत्महत्या के लिए आरोपी युवक द्वारा उकसाया जा रहा था साथ ही युवक के द्वारा नाबालिक युवती को लगातार धमकी दी जा रही थी। कि अगर उसके द्वारा आत्महत्या नहीं की जाती है तो उसके माता पिता की हत्या कर दी जाएगी। जिसके कारण से युवती ने अपने आप को असहज महसूस करते हुए यह आत्मघाती कदम उठाया है। युवती की हालत बिगड़ने पर उसे हटा से दमोह जिला अस्पताल रैफर किया गया है। नायब तहसीलदार शिवराम चढ़ार नायब तहसीलदार शिवराम चढ़ार ने बताया है कि आरिफ खान नाम का युवक बहुत दिनो से युवती को परेशान कर रहा था। तथा उसके माता-पिता को जान से मारने की धमकी दे रहा था। इसी कारण से उसने जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया है। थाना प्रभारी मनीष मिश्रा हट थाना प्रभारी मनीष मिश्रा का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। युवती बेहोशी की अवस्था में पड़ी मिली थी। उसके बैग से जहर की 1 शीशी भी बरामद की गई है। जिस युवक पर आरोप लगाए हैं उसका नाम आरिफ खान है। पुलिस मामले की जांच कर रही है जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जावेगा।
ऐसा नेतृत्व और ऐसी संवेदनशीलता किसी अन्य दल में संभव नही
कल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री निवास के दृश्य लगभग पूरे देश में चर्चा का केंद्र बने रहे l कैसे एक प्रदेश का मुखिया, सीधी में हुई एक घटना से पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने, उसका सम्मान पुनः लौटाने का हर संभव प्रयास करता है और प्रदेश के सभी जाति वर्ग के लोगों को सामाजिक समरसता व लोक आचरण का एक सारगर्भित पाठ पढ़ा जाता है l इससे पूर्व ही मुख्यमंत्री ने एक दिन पहले ट्वीट कर अपने मन की पीड़ा व्यक्त की थी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा था “कि जबसे मैंने सीधी की घटना का वीडियो देखा, अंतर्मन अत्यधिक व्याकुल और हृदय पीड़ा से भरा हुआ है। मैं तबसे ही दशमत जी से मिलकर उनका दुःख बांटना चाहता था और यह विश्वास भी दिलाना चाहता था कि उनको न्याय मिलेगा। कल उनसे और उनके परिवार से भोपाल में अपने निवास पर मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करने के साथ परिवार को ढांढस बंधाऊंगा।” उनके इस कथन के बाद से ही मीडिया और सोशल मीडिया में अनेकों प्रकार के कयास लगाये जा रहे थे l पर जिस प्रकार से प्रदेश के मुखिया का एक मानवीय पक्ष समाज के सामने आया है, वह अकल्पनीय है l जो मुख्यमंत्री निवास के वीडियो सभी मीडिया व सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर दिख रहे हैं, उसमें वे खुद दशमत जी को लेकर आवास के अंदर आए l उन्हें कुर्सी पर बैठाकर खुद समक्ष कुर्सी पर ना बैठकर एक छोटी मेज पर जा बैठे l जिसके बाद एक थाली बुलाई गई व सीएम ने अपने हाथों से उनके पैर धोए। इसके बाद सीएम ने शॉल ओढ़ाकर तिलक लगाकर व भगवान गणेश की एक प्रतिमा भेंट में देकर उनका सम्मान भी किया। और उन्होंने कहा, “कि मैं दशमत जी से माफी मांगता हूं। मेरे लिए जनता ही भगवान है।” इसके अलावा मुख्यमंत्री महोदय ने दशमत जी से अनेक विषयों पर चर्चा भी की। दशमत से पूछा कि क्या करते हो, घर चलाने के क्या साधन है, कौन-कौन सी योजनाओं का लाभ मिल रहा है? यहां तक उन्होंने दशमत को सुदामा भी कहा। सीएम ने कहा कि दशमत अब मेरे दोस्त हैं। एक तरफ इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष अनर्गल आरोप लगाकर हाय तौबा मचाये हुए है l आखिर मचाये भी क्यों ना, वंशवाद परंपरा के अधीन चल रही पार्टी के नेताओं और उनके पुत्रों के लिए ऐसे दृश्य मात्र कल्पना में ही पूर्ण हो सकते हैं l जिन्होंने कभी गरीबी स्वप्न में भी ना देखी हो, उनके लिए किसी पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति के सम्मान की चिंता कल्पना का ही एक रूप है l दूसरी तरफ मुख्यमंत्री का यह नया संवेदनशील रूप लोगों द्वारा अत्याधिक सराहा जा रहा है l जहां उन्होंने दशमत के मनोभाव से उस घटना को विस्मृत करवाने का हरसंभव प्रयास किया व उससे व्यक्तिगत स्तर पर सुख दुख भी बाटें l पूर्व में भी एक ऐसा ही संवेदनशीलता का वाक्य सितंबर 2021 में आया था l जब एक प्रदेश का मुखिया कितना सहज और सरल होना चाहिए, ये जनता को देखने को मिला था । जब खंडवा जिले में सीएम की यात्रा पंधाना के बलरामपुर गांव पहुंची तो भाषण के दौरान गांव की एक बेटी ने मुख्यमंत्री को अपनी व्यथा से भरी चिट्ठी सौंपी थी। सीएम ने भाषण के दौरान ही कलेक्टर को चिट्ठी में लिखी समस्या देखने को कहा था और साथ ही कलेक्टर को तुरंत आर्थिक मदद जारी करने के निर्देश दिए। दरसल उस बालिका के पिता की चार माह पहले कोरोना से देहावसान हुआ था। सीएम का ये अंदाज उस वक्त भी ग्रामीणों को खूब भाया था और अब सीधी मामले में उनके व्यक्तित्व का यह मानवीय पहलू की चारों ओर लोगों द्वारा निरंतर प्रशंसा की जा रही है उदयभान सिंह (स्वतंत्र लेखक)
खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नु किस डर से छिपा हुआ है?

5 जुलाई को ये खबर आई थी की पन्नु की कैलिफोर्निया मे कार हादसे मे मौत हो गई। पर अब कई पत्रकार इसे एक अफवाह बता रहे है ।गुरपतवंत सिंह पननु एक प्रतिबंधित खालिस्तानी अलगाववादी संगठन “सिख्स फॉर जस्टिस” का संस्थापक था। उसकी एक वीडियो सामने आई है जिसमे UN HQ NEW YORK के बाहर सिखों से Khalistan Refrendum पर वोट करने को कह रहा है और अपने सहयोगी निज्जर की मौत के लिए भारतीय राजनयिकों को जिम्मेदार ठहराया।ये वीडियो 5 जुलाई की बताई जा रही है।सभी का मानना है की वो अभी डर से छिपा हुआ है।पर डर किस बात की? दरअसल पिछले 45 दिनों मे 3 बड़े खालिस्तानी आतंकवादि विदेश मे मारे गए ।• हरदीप सिंह निजजर को अमेरिका के वैनकुवर सिटी मे उसके ट्रक मे 18 जून को गोली मार दी गई थी।• 7 मई को पाकिस्तान के लाहौर मे परमजीत सिंह पँवार की मॉर्निंग वाक करते हुए गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।• और किसी अनजान वजहों से 15 जून को ब्रिटेन के अस्पताल मे अवतार सिंह खंडा की मौत हो गई थी। भारत का पक्ष गुरपतवंत सिंह पन्नू यूएपीए की धारा 51(ए) के तहत वांछित खालिस्तानी आतंकवादी है। कथित तौर पर पन्नू पर भारत में राजद्रोह के 3 मामलों सहित 22 आपराधिक मामलें है।खालिस्तान का ख़तरा जल्द ख़त्म होने वाला नहीं है; दो दिन पहले सैन फ्रांसिस्को में भारत के दूतावास में आग लगा दी गई थी जबकि कनाडा में खालिस्तानियों ने दो देसी राजनयिकों को निशाना बनाया था. कनाडा में अगले सप्ताह खालिस्तान स्वतंत्रता रैली आयोजित करने की भी चर्चा है। हालाँकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि न तो अमेरिका के अधिकारियों और न ही भारतीय सरकार के अधिकारियों ने उसके निधन की पुष्टि की है। पर वो कनाडा सरकार से लगातार सवाल उठा रहे है।इन सभी के बीच भारतीय सुरक्षा बाल के किसी बड़े अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को बयान दिया की पननु सच मे मार गया है। देश विदेश के सभी लोगों मे संशय अभी भी बना है की खालिस्तानी आतंकवादी अब किस एम्बसी को अपना निशाना बनाएंगे ।
जापान मे लगातार 12 साल से घट रही है जनसंख्या

जब पूरे दुनिया मे आबादी इतनी तेजी से बढ़ते जा रही है तो ये खबर आपको जरूर चौका सकती है।पिछले 12 साल से जापान के मृतसंख्या मे बढ़ोतरी आ रही है और जन्म दर मे कमी। इससे देश की अर्थ व्यवस्था से लेकर अस्तित्व तक पर संकट आ सकता है ।जापान मे हाल ही मे आए सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक 2022 मे 124.49 मिलियन हो गई है जो पिछले साल से 556,000 काम है । 2022 में जापान में नवजात शिशुओं की संख्या घटकर 800,000 से नीचे आ गई, जबकि मौतों की संख्या 1.57 मिलियन से अधिक हो गई।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जापान में जन्म दर सबसे कम और जीवन प्रत्याशा सबसे अधिक है। 2020 में, जापान में 1500 लोगों में से लगभग 1 की उम्र 100 या उससे अधिक थी। पर ऐसा क्यों हो रहा है?• हमारी तेजी से बदलती लाइफस्टाइल• ज्यादा लंबे समय तक काम करते रहना• बढ़ती महंगाई इन कारणों से कई जापानी युवाओं के लिए परिवार शुरू करना बहुत महंगा हो गया है।2022 मे एक जापानी रिपोर्ट के मुताबिक एक बच्चे को पालने के लिए जापान दुनिया के सबसे महंगे शहरों मे से एक है।कोरोना महामारी ने जापान की जनसांख्यिकीय चुनौतियों को बढ़ा दिया है, हाल के वर्षों में कम शादियों के कारण कम जन्महुआ है और अधिक मौतों के लिए मूल रूप से COVID-19 जिम्मेदार है।जापान की सरकार इस संकट से निपटने के लिए कुछ उपाय अपनाने वाली है, जिसमें बच्चों के पालन-पोषण, प्रीस्कूल शिक्षा, नर्सिंग देखभाल सेवाओं और वर्क्प्लैस मे सुधारों के लिए अधिक वित्तीय सहायता शामिल है।बेबी बोनस को बढ़ाकर 500,00 येन करने की तैयारी की गई है और ये भी कहा जा रहा है की प्रसवोत्तर आवश्यकताओं की लागत को कवर करने में मदद के लिए 100,000 येन का एक वित्तीय सहायता पैकेज तैयार किया जाएगा।अप्रैल 2023 में, जापान ने अपनी नई चिल्ड्रेन एंड फ़ैमिलीज़ एजेंसी लॉन्च की, जो अधिक डेकेयर सेंटर स्थापित करने और काउंसिलिंग जैसी युवा सेवाएं प्रदान करने और माता-पिता का साथ देने के उपायों पर केंद्रित है।
Threads क्या है जिसे सब Twitter किलर बता रहे है

META के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग ने आखिरकार ट्विटर का प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म निकाल ही लिया है।थ्रेडस ट्विटर जैसा ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है जिसपर लोग सभी से आपस मे बात-चित कर पाएंगे और खबरों की जानकारी ले पाएंगे।इसे इंस्टाग्राम के ही टीम ने डिजाइन किया है । उनका कहना है कि ये इंस्टाग्राम जैसा ही है, फर्क बस इतना है की ये टेक्स्ट–बेस्ड एप है। यहाँ लोग 500 कैरेक्टर्स मे पोस्ट कर पाएंगे और साथ ही फोटो, विडिओ और लिंक्स भी डाल सकते है । और ट्विटर के तरह ही इसपर लोग लाइक, शेयर और कमेन्ट कर पाएंगे। कहते है ना लोहा जब गर्म हो तभी हथौड़ा मारना चाहिए, ठीक वैसा ही किया है मार्क जुकरबर्ग ने।ट्विटर में किये गए विवादित बदलावों के बाद पिछले साल के मुकाबले उसकी मार्केट वैल्यू काफी घट चुकी है। पिछले साल ट्विटर की कमान एलोन मस्क के हाथ मे जाते ही इस एप ने सबके उम्मीदों के बिल्कुल विपरीत जाकर प्रदर्शन दिया है। पहले इसके अलगोरिदम के साथ छेड़–छाड़ करने के बाद, इसमे मंथली सब्सक्रिप्शन लाया गया और फिर ब्लू टिक का व्यापार तो कोई भूल ही नहीं पाएगा । और अब जाकर नए नियमों के अनुसार लोग ट्विटर पर लगभग 300 ट्वीट्स ही पढ़ पाएंगे ।इन्ही सब वजहों से निवेशक, प्रचारक और यूसर्स सब इसे छोड़ रहे है और इसकी सालाना कमाई 50 प्रतिशत कम गई है । जुकरबर्ग ले आए है थ्रेडस एप आपको बात दे की थ्रेडस 5 जुलाई को लॉन्च हो चुका है। आते के साथ ही पहले सात घंटों मे इसपर 10 मिलियन यूसर्स भी आ चुके है । और ऐसा खुद मार्क ज़ुकरबर्ग ने अपने अकाउंट से पोस्ट कर बताया है। ट्विटर पर 250 मिलियन यूसर्स मौजूद है और वही इंस्टाग्राम पर उससे लगभग 10 गुना ज्यादा 2 बिलियन यूसर्स है । तो ये थ्रेडस के लिए मददगार साबित होगा क्योंकि पहले से ही जो लोग इंस्टाग्राम पर यूसरनेम का इस्तेमाल करते है, उसी के साथ ही वो थ्रेडस पर भी अकाउंट बना पाएंगे। और अपने फॉलोवर्स को भी इधर देख पाएंगे। इससे यूसर्स को पहले से ही इसे चलाने मे सहूलियत होगी ।अब ये देखना दिलचस्प होगा की थ्रेडस इंस्टाग्राम के जैसे ही लोगों का दिल जीत पाता है या फिर ट्विटर जैसे इससे भी लोग दूर भागना चाहेंगे।
क्या Jack Ma का लाहौर जाना किसी बिजनेस वेंचर का हिस्सा है?

चीन के सबसे बड़े इ-कॉमर्स टेक्नोलॉजी कंपनी अलीबाबा ग्रुप के फाउंडर जैक मा जहाँ भी जाते है वो खबर बन जाती है क्योंकि वो अक्सर मीडिया ही नही पर दुनिया की नज़रों से छिपे रहते है।वह 29 जून को पाकिस्तान के लाहौर में देखे गए थे जिसकी पुष्टि वहाँ के कई बड़े व्यपारियों ने ट्वीट कर दिया।पर वह वहाँ बस 23 घंटो के लिए रुके थे और उन्होंने इसे इतना प्राइवेट रखा की पाकिस्तान के चीनी एम्बैसी को भी इसकी पूरी जानकारी नहीं थी। अरबपति जैक मा वहां अपने प्राइवेट जेट से पहुंच कर किसी प्राइवेट जगह पर रुके थे। उन्होंने वहां ना ही किसी सरकारी अधिकारी से मुलाकात की ना ही मीडिया वालो से। वैसे इसे पर्सनल विजिट बता रहे है पर इससे पहले 28 जून को वह नेपाल की राजधानी काठमांडू गए थे और 27 जून को बांग्लादेश की राजधानी ढाका गए थे। उनकी ये दोनों दौरे भी 1 दिन की रही है। उनके इस दौरे को सब किसी व्यापार का रूप उनके साथ आये लोगों के वजह से दे रहे है। उनके साथ कुल 7 लोगों की टीम थी जिसमे 5 चीन के ही थे, 1 डेनमार्क का था और 1 अमेरिका से।पाकिस्तान से निकलते ही फिर 30 जून को वो उज़्बेकिस्तान पहुँच गए। अब ये तो वक़्त के साथ ही पता चलेगा की इन विज़िट्स के पीछे क्या राज़ है या कोई राज़ है भी कि नहीं। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया पर इसी बीच पाकिस्तान के बड़े अफसर और व्यापारियों का ये मानना है कि जैक मा का पाकिस्तान आना उधर की टूरिज्म और अर्थव्यवस्था के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है।इसे जैक मा का असर समझे या पाकिस्तान की बद से बत्तर आर्थिक संकट की वहां के व्यापारियों ने ये तक कहा की अगर वो बस इस्लामाबाद के आईटी सेक्टर पर बयान भी दे देंगे तो ये बहुत बड़ा बदलाव दिखला सकती है।जैसा जैक मा का इतिहास रहा है, अब पाकिस्तान के लोग इस उम्मीद में है की शायद उनकी डूबती अर्थव्यवस्था को तिनके का सहारा मात्र ही मिल जाए।