सागर में एक दिन में 13 पटवारी सस्पेंड, 137 को कारण बताओ नोटिस; कलेक्टर बोलीं- स्वामित्व योजना में लापरवाही की
137 पटवारियों को नोटिस देकर उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। उनके जवाब मिलने के बाद आगे का फैसला लिया जा सकता है।
MP News: मध्य प्रदेश के सागर जिले में पटवारियों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने सरकारी योजनाओं के कामकाज में लापरवाही और लोगों तक योजनाओं का लाभ समय पर नहीं पहुंचने के मामले में पटवारियों पर कार्रवाई की है। शिनवार को कलेक्टर ने 13 पटवारियों को निलंबित किया गया है, जबकि 137 अन्य पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब प्रदेश में स्वामित्व योजना के काम को लेकर पटवारी संघ और सरकार के बीच विवाद चल रहा है।
समीक्षा के बाद लिया गया फैसला
रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और लंबित मामलों की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया। अधिकारियों का कहना है कि पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचना चाहिए। राजस्व विभाग के कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्र से जुड़े काम तय समय सीमा में पूरे करें।
प्रशासन ने काम में देरी और लापरवाही के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की। 137 पटवारियों को नोटिस देकर उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। उनके जवाब मिलने के बाद आगे का फैसला लिया जा सकता है।
कार्रवाई के दायरे में इन तहसीलों के पटवारी
मीडिया रिपोर्टों में निलंबित किए गए पटवारियों में सागर ग्रामीण तहसील की मीना खैरवार और लक्ष्मी जाटव, गढ़ाकोटा के अखिलेश दीक्षित, केसली के राजकुमार गौड़ और भूपेंद्र राज के नाम शामिल हैं।
इसके अलावा खुरई तहसील के अजय श्रीवास्तव और गोविंद राय, मालथौन के पुष्पेंद्र भदौरिया और महेंद्र अर्गल, बांदरी के योगेंद्र प्रताप तथा बंडा तहसील के दिलीप राजा और अभिषेक कोरी के नाम भी रिपोर्टों में सामने आए हैं। हालांकि, निलंबित कर्मचारियों की कुल संख्या को लेकर खबरों में अंतर है। इसलिए अंतिम संख्या की पुष्टि आधिकारिक आदेश से किया जाना जरूरी है।
नोटिस मिलने के बाद क्या होगा?
कारण बताओ नोटिस मिलने का अर्थ है कि संबंधित कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। नोटिस के जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई तय कर सकता है। वहीं, निलंबन के मामलों में संबंधित आदेशों के अनुसार विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सागर में हुई कार्रवाई से राजस्व विभाग के कर्मचारियों के बीच हलचल बढ़ गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नोटिस पाने वाले पटवारी क्या जवाब देते हैं और प्रशासन उनके जवाबों के आधार पर क्या फैसला करता है। साथ ही, स्वामित्व योजना को लेकर सरकार और पटवारी संघ के बीच चल रहे विवाद का समाधान किस तरह निकलता है, इस पर भी नजर रहेगी।
स्वामित्व योजना को लेकर क्यों है विवाद?
स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की योजना है। इसके तहत ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्तियों का सर्वे किया जाता है और लोगों को उनकी संपत्ति से जुड़े अधिकारों के दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इससे संपत्ति के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और जमीन से जुड़े विवाद कम करने में मदद मिल सकती है।
इस काम में पटवारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश में योजना के काम को लेकर पटवारी अपनी मांगों के साथ विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि संपत्ति के रिकॉर्ड और पंजीयन से जुड़े मामलों में उन्हें कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए। दूसरी ओर, सरकार चाहती है कि योजना के तहत लंबित काम समय पर पूरे हों। इसी खींचतान के बीच अलग-अलग जिलों में पटवारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं।
