Bihar SIR: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया।
राजद और AIMIM ने समय सीमा बढ़ाने की याचिका दायर की थी। उन्होंने बाढ़ और तकनीकी समस्याओं का हवाला दिया था। याचिका में 1 सितंबर की डेडलाइन को 15 सितंबर तक बढ़ाने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग की तय प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। समय सीमा बढ़ाना पूरी प्रक्रिया में बाधा डालेगा। अदालत ने राजनीतिक दलों से सक्रिय सहयोग की अपील की।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इतने बड़े राज्य में सिर्फ 120 आपत्तियां दर्ज हुई हैं, यह हैरान करने वाली बात है। उन्होंने कहा कि हम बार-बार एक ही आदेश नहीं दे सकते।
आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 1 सितंबर के बाद भी दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं। इन पर विचार अंतिम मतदाता सूची बनने तक किया जाएगा। आयोग ने कहा कि यह एक सतत प्रक्रिया है और नामांकन की अंतिम तिथि तक दावे स्वीकार किए जाएंगे।
आयोग ने बताया कि 2.74 करोड़ मतदाताओं में से 99.5% ने दस्तावेज जमा कर दिए हैं। ज्यादातर राजनीतिक दल नाम जोड़ने के बजाय नाम हटाने के लिए आवेदन कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता का तर्क
याचिकाकर्ता की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि आयोग अपनी ही नियमावली का पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पारदर्शिता की कमी है और कई नाम बिना आवेदन के ही जोड़े गए हैं।
आयोग की सफाई
आयोग ने कहा कि जिन मतदाताओं के दस्तावेज अधूरे हैं, उन्हें सात दिन के भीतर नोटिस दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि नाम हटाने के अधिकतर मामले मृत्यु या डुप्लीकेट प्रविष्टि के कारण हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बिहार SIR प्रक्रिया तय समयसीमा के अनुसार ही चलेगी। हालांकि, मतदाता 1 सितंबर के बाद भी दावे और आपत्तियां दाखिल कर सकते हैं। इन पर विचार अंतिम मतदाता सूची बनने से पहले किया जाएगा।