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ना रजिस्टरी ना बच्चों के रिकोर्ड 37 साल से चल रहा था ये मिशिनरी अनाथालय

अलीराजपुर के जोबट में 37 साल से चल रहे मिशिनरी अनाथालय की नहीं है रजिस्टरी.सोमवार शाम को अनाथालय पर एफआईआर हुई.संस्था में कुल 71 लड़के-लड़कियाँ है ये बच्चे कहाँ से आए कोई रिकार्ड नहीं है.जिससे संस्था पर चाईल्ड ट्राफिकिंग के आरोप भी लगाए जा रहें हैं

 पूरा मामला

दरअसल अलीराजपुर जिले के जोबट में एक मिशिनरी अनाथालय है जब अनाथालय की सोमवार को जाँच हुई तो चौंका देमे वाले कई खुलासे हुए.सबसे पहले तो ये सामने आया कि अनाथालय की रजिस्टरी नहीं है.यानी यह अनाथालय पिछले 37 साल से बिना रजिस्टरी के ही चलता आ रहा है.

मिशिनरी अनाथालय

मिशिनरी अनाथालय का सच

अनाथालय में कुल 71 बच्चे है इनमें से 35 बच्चियाँ हैं और 59 नाबालिग लड़कियाँ हैं.देर रात बच्चियों को रेसक्यू किया गय़ा था जिसके कारण उन्हें ट्राईबल हॉस्टल नें रखा गया.आगे इनका फैसला बाल कल्याण समीति द्वारा लिया जाएगा.

बाल आयोग के सदस्य ओंकार सिंह ने कहा कि संस्था के पास बच्चों का कोई रिकोर्ड नहीं है जिससे चाईल्ड ट्राफिकिंग का शक जताया जा रहा है.सभी बच्चों के बिस्तर पर से बाईबल की किताबें मिली हैं.

साथ ही अनाथालय कॉन्डम जैसी आपत्तिजनक चीजें मिली थी.बच्चों को नॉन-वेज परोसा जाता था.इसके अलावा संस्था को स्वीज़रलैंड से पिछले कई सालों से करोड़ों रुपये ट्राँस्फर किए जाने के सबूत भी मिले हैं.

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