हाइलाइट्स
- कर्नाटक में CM बदलने की अटकलें तेज।
- सिद्धारमैया के इस्तीफे की चर्चा राजनीतिक गलियारों में।
- डीके शिवकुमार को नया मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना।
- दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ 6 घंटे की बैठक।
Karnataka Politics : बेंगलुरू। कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे की चर्चा राजनीतिक गलियारों में गर्म हो गई है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई है और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को नया मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। यह पूरा मामला तब और गंभीर हो गया जब दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ एक लंबी बैठक हुई, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेता शामिल थे।
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दिल्ली में 6 घंटे की बैठक के बाद बढ़ी हलचल
मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सांसद राहुल गांधी के साथ सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की करीब 6 घंटे तक बैठक हुई। इस बैठक के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर गंभीर चर्चा हुई और पार्टी ने 2028 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए रणनीति पर काम किया।
सिद्धारमैया के इस्तीफे और नई भूमिका की चर्चा
रिपोर्ट्स के अनुसार, राहुल गांधी ने सिद्धारमैया से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की बात कही और उन्हें राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया। साथ ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी भूमिका देने की चर्चा भी हुई।
बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया ने अपने समर्थकों से बातचीत के बाद कहा है कि वे पार्टी हाईकमान के फैसले को स्वीकार करेंगे। हालांकि, उन्होंने पहले कुछ समय विचार के लिए मांगा है।
डीके शिवकुमार को मिल सकता है CM पद
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व अब कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में नजर आ रहा है। डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने पर गंभीर विचार चल रहा है। हालांकि, पार्टी यह बदलाव बहुत सावधानी से करना चाहती है, क्योंकि सिद्धारमैया के समर्थक विधायकों की संख्या काफी अधिक मानी जाती है।
कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चल रहा है विवाद
कर्नाटक में 2023 में सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान चल रही है। समर्थकों का दावा है कि 2.5-2.5 साल के फॉर्मूले पर सहमति बनी थी, जबकि इसे आधिकारिक तौर पर कभी स्वीकार नहीं किया गया। 20 नवंबर 2025 को सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद यह विवाद और तेज हो गया। अब एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।