उत्तर प्रदेश के गीता प्रेस ,गोरखपुर को साल 2021 का गाँधी शांति पुरस्कार दिया जायेगा .यह पुरस्कार संस्कृति मंत्रालय द्वारा दिया जायेगा, इस बारे में 18 जून को केंद्र सरकार की तरफ से एक आधिकारिक जानकारी में बताया गया .यह पुरस्कार गीता प्रेस को अहिंसा और और अन्य गांधीवादी तरीके से सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक परिवर्तन में सहायता करने के लिए दिया जायेगा . इस मुद्दे पर भी अब राजनीतिक घमासान की शुरुआत हो गयी है .जहां प्रधानमंत्री ने गीता प्रेस गोरखपुर को बधाई दी वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के नेता इसका विरोध कर रहे हैं .
क्या है गीता प्रेस ,गोरखपुर
गीता प्रेस की स्थापना 1923 में ब्रह्मलीन श्रीजयदयालजी गोयन्दका द्वारा हुई . यह कोलकाता के गोविन्द भवन कार्यालय की टुकड़ी है .श्रीजयदयालजी एक भक्त थे. ये सनातन धर्म के प्रचार और इसकी अच्छाई को लोगों तक पहुंचाने के लिए किताबों का प्रकाशन करते थे .गीता प्रेस का उद्देश्य सनातन धर्म के सिद्धांतों का प्रचार प्रसार करना है .
ये अपने द्वारा प्रकाशित गीता ,रामायण ,वेद ,उपनिषद और पुराण से आम लोगों के बीच हिन्दू धर्म और ग्रंथ का प्रचार करते है .प्रेस द्वारा कई काव्य ,कहानी और चरित्र की कथा का प्रकाशन भी होता है ताकि लोग जीवन जीने का सही तरीका सीख पाएं .
प्रेस में काम की शुरुआत प्रार्थना से होती है .इस साल गीता प्रेस गोरखपुर को सेवाएँ देते हुए 100 साल पूरे हो जायेंगे. इनकी मानवता के प्रति अहिंसा सेवा भाव को देखते हुए, साथ ही उनका भारत के सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक परिवर्तन में सहभागिता को देखकर साल 2021 का गाँधी शांति पुरस्कार दिया जायेगा .
“ये सावरकर और गोडसे को पुरस्कार देने जैसा है”- कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी ने गीता प्रेस गोरखपुर को गांधी शांति पुरस्कार देने का विरोध किया है . कांग्रेस पार्टी के सांसद जयराम रमेश ने ट्वीट कर कहा कि साल 2021 का गाँधी शांति पुरस्कार गीता प्रेस को दिया जा रहा है जो इस साल अपने 100 साल पूरे कर रहा है .2015 में आई अक्षय मुकुल की एक बहुत अच्छी जीवनी में उन्होंने इस संगठन के महात्मा गांधी के साथ तकरार भरे रिश्तों और उनके साथ सामाजिक, राजनीतिक,धार्मिक बातों को लेकर झगड़े का भी खुलासा किया है .यह फैसला वास्तव में एक उपहास है और ये सावरकर और गोडसे को पुरस्कार देने जैसा है.
इसके पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ट्वीट कर कहा कि ‘ मैं गीता प्रेस , गोरखपुर को गांधी शांति पुरस्कार 2021 से सम्मानित किए जाने पर बधाई देता हूँ. उन्होंने पिछले 100 सालों में लोगों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन को आगे बढ़ाने की दिशा में काफी सराहनीय कार्य किया ‘
क्या है गाँधी शांति पुरस्कार
गांधी शांति पुरस्कार की शुरुआत 1995 से हुई .महात्मा गांधी की 125 वीं जयंती पर उनके आदर्शों को श्रद्धांजलि समर्पित करने हर साल गाँधी शांति पुरस्कार दिया जाता है . यह पुरस्कार किसी भी जाती ,धर्म के लोगो को दिया जा सकता है . इस पुरस्कार को देते वक्त एक करोड़ नकद रुपये ,एक पट्टिका ,एक प्रशस्ति पत्र और एक पारंपरिक हस्तशिल्प दिया जाता है .
यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है जो अहिंसा के माध्यम से सामाजिक ,आर्थिक और राजनीतिक तौर पर परिवर्तन लाते हैं. विजेता का चुनाव करने वाली समिति में प्रधानमंत्री, देश का मुख्य न्यायाधीश , लोकसभा का अध्यक्ष ,लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी का नेता और सुलभ इंटरनेशनल का संस्थापक शामिल होते हैं . प्रधानमंत्री इसकी अध्यक्षता करता है .