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शंकराचार्य विवाद में UP सरकार का यू-टर्न! माफी मांगने को तैयार प्रशासन, अविमुक्तेश्वरानंद ने रखी दी ये शर्तें

Shankaracharya Controversy

Highlights

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से माफी मांगने को तैयार प्रयागराज प्रशासन
  • माघी पूर्णिमा के संगम स्नान के लिए शंकराचार्य ने रखी दो शर्तें
  • लखनऊ के दो वरिष्ठ अधिकारी वाराणसी जाकर करेंगे मध्यस्थता

Shankaracharya Controversy: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से विवाद के बाद अब प्रयागराज प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन शंकराचार्य से माफी मांगने को तैयार हो गया है। उन्हें 1 फरवरी को माघी पूर्णिमा के अवसर पर संगम स्नान के लिए मनाने की कोशिश तेज हो गई है।

लखनऊ के अधिकारी करेंगे मध्यस्थता

लखनऊ से दो बड़े अधिकारी वाराणसी जाकर शंकराचार्य से मुलाकात करेंगे। इसके बाद उन्हें ससम्मान प्रयागराज लाकर संगम स्नान कराया जाएगा। बातचीत लगभग अंतिम चरण में है और जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा हो सकती है।

शंकराचार्य की दो अहम शर्ते

शंकराचार्य ने संगम स्नान के लिए दो शर्तें रखी हैं। पहली, जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा लिखित रूप में माफी मांगी जाए। दूसरी, चारों शंकराचार्यों के लिए तय प्रोटोकॉल को स्नान के दौरान पूरी तरह लागू किया जाए।

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मीडिया प्रभारी ने की पुष्टि

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने पुष्टि की है कि प्रशासन माफी के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि 28 जनवरी को शंकराचार्य के अचानक माघ मेला छोड़कर वाराणसी जाने से प्रशासन हैरान रह गया था।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन संगम नोज तक पालकी ले जाने को लेकर शंकराचार्य के शिष्यों और प्रशासन के बीच टकराव हुआ था। इसके बाद शंकराचार्य धरने पर बैठ गए और 12 दिन तक विरोध जारी रहा।

सरकार पर बढ़ा दबाव

संत समाज, सोशल मीडिया और सरकार के भीतर से विरोध के सुर उठने लगे थे। डिप्टी सीएम केशव मौर्य के समर्थन के बाद सरकार पर दबाव बढ़ा, जिसके चलते अब सुलह की कोशिश की जा रही है।

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