Highlights
- बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को इस्तीफा देने के बाद यूपी सरकार ने सस्पेंड किया
- मामले की जांच बरेली कमिश्नर को सौंपी, मजिस्ट्रेट को सरकारी आवास और गाड़ी वापिस ली गई
- शंकराचार्य ने समर्थन दिया, उमा भारती ने प्रशासन को मर्यादा का पालन करने की सलाह दी
Alankar Agnihotri: गणतंत्र दिवस पर इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को यूपी सरकार ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। उन्हें शामली अटैच किया गया और मामले की जांच बरेली कमिश्नर भूपेंद्र एस. चौधरी को सौंप दी गई। सरकारी आवास पर सस्पेंशन का नोटिस चस्पा किया गया।
धरने पर बैठे अग्निहोत्री
मंगलवार को अग्निहोत्री डीएम से मिलने कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन अंदर नहीं जाने दिया गया। वे करीब दो घंटे धरने पर बैठे रहे। इसके बाद उन्होंने कहा कि वे इस्तीफा वापस नहीं लेंगे और कहा कि सरकार से मोहभंग हो गया है।
शंकराचार्य ने दिया बड़ा ऑफर
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री से फोन पर बात की !!
— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) January 26, 2026
शंकराचार्य बोले– जो पद सरकार ने दिया था, उससे बड़ा पद धर्म के क्षेत्र में हम आपको देने का प्रस्ताव रखते हैं !! https://t.co/UPke9OxIwG pic.twitter.com/VsCVEmWWmo
इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अग्निहोत्री को फोन कर कहा कि उनका निर्णय सनातन धर्म के प्रति निष्ठा दिखाता है और समाज गर्वित है। उन्होंने धर्म के क्षेत्र में बड़ा पद देने का प्रस्ताव भी रखा।
उमा भारती की प्रतिक्रिया
मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा किंतु प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, यह प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है, यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों…
— Uma Bharti (@umasribharti) January 27, 2026
पूर्व मंत्री उमा भारती ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य से प्रमाण मांगना गलत है। यह अधिकार केवल शंकराचार्य और विद्वत परिषद का है। उन्होंने प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी, लेकिन मर्यादा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।
अलंकार अग्निहोत्री ने क्यो दिया था इस्तीफा
अलंकार अग्निहोत्री ने UGC के नए नियम और शंकराचार्य के शिष्यों की पिटाई के विरोध में इस्तीफा दिया था। उनका कहना है कि वे सरकार से मोहभंग महसूस कर रहे हैं।
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