Highlights
- धार भोजशाला में 10 साल बाद हिंदू पूजा और मुस्लिम जुमे की नमाज एक ही दिन शांतिपूर्ण संपन्न।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार पूजा सुबह से सूर्यास्त तक, नमाज दोपहर 1 से 3 बजे।
- 8000 से अधिक सुरक्षा जवान, ड्रोन और AI कैमरों के साथ कड़ी सुरक्षा और नो-फ्लाई जोन लागू।
Bhojshala Basant Panchami: बसंत पंचमी के अवसर पर धार स्थित विवादित धार्मिक स्थल भोजशाला में शुक्रवार को 10 साल बाद हिंदू पूजा और मुस्लिम नमाज एक ही दिन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार दोनों समुदायों को तय समय पर धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी गई।
सुबह से पूजा-पाठ
सूर्योदय के साथ ही हिंदू श्रद्धालुओं ने वाग्देवी (मां सरस्वती) की पूजा शुरू की। पूरे दिन हवन, पाठ और पूजन का कार्यक्रम चला, जो सूर्यास्त तक जारी रहेगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।
दोपहर में जुमे की नमाज
मुस्लिम समाज को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच जुमे की नमाज की अनुमति दी गई। निर्धारित समय पर मस्जिद वाले हिस्से में करीब 20 मिनट में नमाज अदा की गई। नमाज के बाद सभी को सुरक्षित बाहर ले जाया गया।
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कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भोजशाला परिसर और धार शहर में 8000 से ज्यादा जवान तैनात किए गए। सीआरपीएफ, रैपिड एक्शन फोर्स और स्थानीय पुलिस के साथ ड्रोन, सीसीटीवी और AI कैमरों से निगरानी की गई। 300 मीटर क्षेत्र को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया।
प्रशासन की अपील
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से हो रहे हैं। उन्होंने लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की।
भीड़ से बिगड़ी तबीयत
दर्शन के दौरान अधिक भीड़ के कारण कुछ श्रद्धालुओं की तबीयत खराब हुई। एक बुजुर्ग श्रद्धालु को प्राथमिक उपचार दिया गया, उनकी हालत अब सामान्य है।
विवाद की पृष्ठभूमि
भोजशाला 11वीं-12वीं सदी का ऐतिहासिक स्थल है। हिंदू इसे सरस्वती मंदिर और मुस्लिम समाज इसे कमाल मौला मस्जिद मानता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से दोनों समुदायों ने तय समय पर अपने-अपने धार्मिक कार्य पूरे किए।
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