Highlights
- मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक, बजट 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान।
- भाजपा का ‘जनता बजट’: कल्याणकारी योजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और महिलाओं-युवाओं पर फोकस।
- कांग्रेस ने कर्ज, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर सत्र से पहले ही सरकार पर साधा निशाना।
MP Budget Session: मध्यप्रदेश विधानसभा का आगामी बजट सत्र इस बार सिर्फ वित्तीय हिसाब-किताब नहीं बल्कि राजनीतिक टकराव का भी मंच बनेगा। भाजपा सरकार अपने पहले पूर्ण बजट से ‘विकसित मध्यप्रदेश’ की तस्वीर दिखाने की कोशिश कर रही है, तो वहीं कांग्रेस कर्ज, महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों को लेकर हमला बोलने की तैयारी में है।
ऐतिहासिक बजट
सूत्रों के अनुसार, इस बार प्रदेश का बजट 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है, जो राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा बजट होगा। सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगा। सरकार इसे ‘जनता का बजट’ बताकर आम लोगों, किसानों और व्यापारियों से सुझाव भी ले रही है।
लाड़ली बहना और खजाने पर दबाव
बजट में महिलाओं, युवाओं और उद्योगों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शामिल हैं। विशेष रूप से ‘लाड़ली बहना योजना’ को संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यह खजाने पर भारी दबाव डाल सकती है।
विपक्ष का हमला
कांग्रेस ने बजट को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश कर्ज में डूब रहा है और महंगाई व बेरोजगारी चरम पर हैं।
भाजपा का जवाब
भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बजट में महिलाओं, युवाओं और उद्योगों का ध्यान रखा गया है। पार्टी का कहना है कि यह बजट ऐतिहासिक होगा और जनता को वास्तविक लाभ पहुंचाएगा।
सत्र की चुनौती
यह बजट सत्र भाजपा के ‘वेलफेयर मॉडल’ और कांग्रेस के ‘कर्ज व कुप्रबंधन’ के आरोपों के बीच सीधी टक्कर बन गया है। अब देखने वाली बात यह है कि यह बजट जनता को राहत देगा या कर्ज का बोझ बढ़ाएगा।
READ MORE: जुमे की नमाज और सरस्वती पूजा को लेकर दिग्विजय सिंह ने ASI आदेश लागू करने की मांग की