Highlights
- मध्यप्रदेश के कई जिलों में GBS के मामले सामने आए, नीमच के मनासा में दो बच्चों की मौत।
- इंदौर के अस्पतालों में 11 मरीज भर्ती, दो बच्चों की हालत गंभीर और वेंटिलेटर पर।
- बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र और राज्य की संयुक्त जांच टीम सक्रिय, घर-घर सर्वे शुरू।
मध्यप्रदेश में गुइलेन–बैरे सिंड्रोम (GBS) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। नीमच जिले के मनासा में दो बच्चों की मौत के बाद अब मंदसौर, धार, खंडवा और अन्य क्षेत्रों में भी मरीज मिलने लगे हैं।
कई जिलों में GBS की पुष्टि
मनासा में अब तक GBS से दो बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 18 से अधिक बच्चों का इलाज जारी हैं। नीमच शहर में भी एक केस सामने आया है। मंदसौर के गरोठ और सुवासरा में भी मरीज मिले है। कुछ संदिग्ध मामले ग्वालियर और बैतूल से भी रिपोर्ट हुए हैं।
इंदौर में 11 मरीज भर्ती
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इंदौर के सरकारी और निजी अस्पतालों में कुल 11 मरीजों का इलाज चल रहा है। चाचा नेहरू अस्पताल में दो बच्चों को वेंटिलेटर पर रखा गया है। एमवाय अस्पताल, पीडियाट्रिक यूनिट और बांबे अस्पताल में भी मरीज भर्ती हैं। डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम लगातार निगरानी कर रही है।
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केंद्र–राज्य की संयुक्त जांच
GBS के बढ़ते मामलों को देखते हुए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) और राज्य सरकार की संयुक्त टीम इंदौर पहुंची है। टीम ने अस्पतालों का निरीक्षण किया और जांच के लिए सैंपल लिए। इसके बाद टीम नीमच में प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी। मनासा में घर-घर सर्वे भी शुरू किया गया है।
क्या है GBS?
GBS एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें शरीर की इम्यूनिटी नसों पर हमला करने लगती है। शुरुआती लक्षणों में पैरों में सुन्नपन, कमजोरी और चलने में परेशानी शामिल है। गंभीर स्थिति में सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
समय पर इलाज जरूरी
विशेषज्ञों के मुताबिक, समय पर इलाज मिलने पर 80–90 प्रतिशत मरीज ठीक हो जाते हैं। बच्चों में अचानक कमजोरी या सांस की परेशानी दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
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