Highlights
- मकर संक्रांति के मौके पर महाकाल मंदिर में दिव्य भस्म आरती, गूंजे जयघोष
- मकर संक्रांति पर शिप्रा घाटों पर भारी भीड़, श्रद्धालुओं ने किया स्नान-दान
- अमृत सिद्धि योग में संक्रांति, 15 जनवरी को दान-पुण्य का विशेष महत्व
Ujjain Mahakaal Darshan Today: उज्जैन में मकर संक्रांति और माघ कृष्ण एकादशी के पावन अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। तड़के चार बजे मंदिर के पट खुलते ही भगवान महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। बाबा महाकाल को भस्म रमाकर दिव्य श्रृंगार किया गया और तिल से बने पकवानों का भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा।
श्रद्धालुओं को मिले दिव्य दर्शन
भस्म आरती में जल, दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से अभिषेक किया गया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। ढोल-नगाड़े, शंखनाद और मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने अलौकिक दर्शन कर पुण्य लाभ लिया।
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शिप्रा घाट पर आस्था की डुबकी
मकर संक्रांति पर शिप्रा नदी के रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट सहित अन्य घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। ठंड के बावजूद लोगों ने स्नान कर दान-पुण्य किया। सुरक्षा के लिए होमगार्ड और एसडीआरएफ की टीमें लगातार निगरानी करते रहे।
संक्रांति का समय और दान-पुण्य
पंडितों के अनुसार सूर्य 14 जनवरी को दोपहर 3:05 बजे मकर राशि में प्रवेश करेगा, इसलिए दान-पुण्य का मुख्य पर्व 15 जनवरी को माना जाएगा। इस दिन चावल, मूंग दाल, तिल, गुड़, वस्त्र और सुहाग की वस्तुओं का दान श्रेष्ठ माना गया है।
अमृत सिद्धि योग का महत्व
इस वर्ष मकर संक्रांति अमृत सिद्धि योग में आई है। मान्यता है कि इस योग में किया गया दान अक्षय फल देता है और पितरों को प्रसन्न करता है।
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