Highlights
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा: सड़कें आवारा कुत्तों से खाली हों, दुर्घटना और हमलों से सुरक्षा जरूरी।
- राज्य सरकारों और NHAI को शेल्टर, नसबंदी और टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश।
- पकड़े गए कुत्तों को सही इलाज और काउंसलिंग के बाद ही वापस छोड़ा जाएगा।
Stray Dog Case: सुप्रीम कोर्ट ने 7 जनवरी को सुनवाई में कहा कि सड़कें आवारा कुत्तों से खाली रखनी होंगी। कोर्ट ने यह भी बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट के दो जज हाल ही में आवारा कुत्तों की वजह से दुर्घटना का शिकार हुए हैं, जिनमें से एक अभी रीढ़ की हड्डी की चोट से जूझ रहे हैं।
पीड़ितों की सुनवाई पहले
सुनवाई में बेंच ने कहा कि पहले आवारा कुत्तों से चोटिल हुए लोगों की सुनवाई होगी, फिर कुत्तों के पक्ष में पैरवी करने वालों की। कोर्ट ने पिछले 20 दिनों में हुए हादसों और बच्चों व बड़ों पर हमलों की चिंता जताई।
राज्य सरकारों और NHAI को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे और राज्य राजमार्गो से सभी आवारा पशुओं को हटाने के निर्देश दिए। एनएचएआई ने 1400 किलोमीटर संवेदनशील क्षेत्र की पहचान की है, जिसकी देखभाल राज्य सरकारों को करनी होगी।
शेल्टर और नसबंदी जरूरी
एमिकस क्यूरी ने बताया कि शेल्टर होम और नसबंदी केंद्र कम हैं। अदालत ने कहा कि पकड़े गए कुत्तों को वापस उसी जगह नहीं छोड़ा जाएगा। पहले उनका नसबंदी और टीकाकरण होगा।
बहस में कुत्तों के मूड और सुरक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ काटना ही समस्या नहीं है, दुर्घटनाओं का खतरा भी है। कुत्तों का मूड नहीं जाना जा सकता। कुत्तों को काउंसलिंग देकर सुरक्षित तरीके से छोड़ा जाना चाहिए।
अब तक इस मामले में क्या हुआ?
यह मामला 28 जुलाई 2025 से चल रहा है। अब तक 5 बार सुनवाई हो चुकी है और कई राज्यों ने अभी तक हलफनामा दाखिल नहीं किया है। 6 जनवरी को दो वकीलों ने नई याचिका लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों के मामलों में सुरक्षा और मानव जीवन सर्वोपरि है।
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