राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मध्यभारत के 16 जिलों के युवाओं से संवाद किया। कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित हुआ। डॉ. भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य भारत की संस्कृति और धर्म की रक्षा करना और देश को समर्थ बनाना है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे संघ की शाखा में आएं या अपनी रुचि के अनुसार राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
गुण और योग्यता के साथ देश सेवा
उन्होंने युवाओं को बताया कि देश के लिए कार्य करते समय अहंकार और स्वार्थ को छोड़कर गुणों को अपनाना जरूरी है। संघ की शाखा व्यक्ति निर्माण और देशभक्ति का प्रशिक्षण देती है। डॉ. भागवत ने कहा कि असुरक्षा और चिंता के बजाय भयमुक्त होकर जीना चाहिए और स्वयं से पहले देश को महत्व देना चाहिए।
युवा और करियर, सुरक्षा और तकनीक
युवाओं के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है, इसलिए बिना चिंता जीवन जिएं। करियर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करें और डर को चुनौती समझें। एआई और नई तकनीक का उपयोग देश हित में करना चाहिए, न कि उसके अधीन होना।
संघ का दृष्टिकोण
अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख श्री दीपक विस्पुते ने संघ की 100 वर्ष की यात्रा और समाज में उसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संघ उत्सव मनाने के बजाय लोगों तक सीधे पहुचने और उनके जीवन में बदलाव लाने पर काम कर रहा है।
युवाओं को सामर्थ्यवान बनाना
भोपाल करुणा धाम के प्रमुख श्री सुदेश शांडिल्य ने कहा कि समर्थ वही है जिसकी नीयत सही हो। संघ युवाओं को सामर्थ्यवान बना रहा है, ताकि वे देश के विकास में योगदान दे सकें। उन्होंने युवाओं से परोपकार, सदाचार और जनकल्याण की भावना अपनाने की प्रेरणा दी।
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