Highlight
- इंदौर में गंदे पानी से मौतों के आंकड़े पर विवाद, सरकार ने HC में 4 मौतें बताई जबकि रिकॉर्ड में 15 सामने आई।
- लैब रिपोर्ट में पीने के पानी में सीवेज और बैक्टीरिया की पुष्टि, 200 से ज्यादा लोग अब भी अस्पताल में भर्ती।
- हाईकोर्ट और NHRC ने मामले पर रिपोर्ट तलब की, जिम्मेदारी को लेकर सियासी घमासान तेज।
Indore Polluted Water Case: इंदौर में गंदे पानी से हुई मौतों के मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की है। इसमें सिर्फ 4 मौतों की बात कही गई है। वहीं, मृतकों के परिजन और अस्पतालों के रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। सभी को उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार की शिकायत थी।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जबकि रोहित सिसोनिया को इंदौर से हटा दिया गया है। वहीं, इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण विभाग का प्रभार भी वापस ले लिया गया है।
इस पूरे मामले के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नगर निगम में आवश्यक खाली पदों को शीघ्र भरने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
पानी में सीवेज मिलने की पुष्टि
महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पानी में सीवेज मिलने की पुष्टि हुई है। कलेक्टर शिवम वर्मा और सीएमएचओ ने पानी में बैक्टीरिया पाए जाने की बात मानी है, लेकिन पूरी रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
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इलाजरत सैकड़ों मरीज
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के क्षेत्र भागीरथपुरा में 16 बच्चों समेत 201 लोग अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। मंत्री और सांसद दोनों ने पाइपलाइन लीकेज और सीवेज मिक्स होने की बात स्वीकार की है।
हाईकोर्ट और NHRC की कार्रवाई
हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 6 जनवरी तय की है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से दो हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
सियासी बयानबाजी तेज
इंदौर में पानी नहीं, ज़हर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) January 2, 2026
घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं – और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी; सरकार ने घमंड परोस दिया।
लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की – फिर भी…
राहुल गांधी ने कहा कि साफ पानी जीवन का अधिकार है और इसकी जिम्मेदारी “डबल इंजन सरकार” की है। साथ ही बताया कि “मध्यप्रदेश अब कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका है – कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पताल में बच्चों की जान लेने वाले चूहे, और अब सीवर मिला पानी पीकर मौतें। और जब-जब गरीब मरते हैं, मोदी जी हमेशा की तरह खामोश रहते हैं।”
पूर्व सीएम उमा भारती ने भी अपनी ही सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस महापाप का प्रायश्चित करना होगा साथ ही इसे सीएम यादव के लिए परीक्षा की घड़ी बताया।