MP News: साल 2025 मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। छिंदवाड़ा के कफ सिरप कांड में दो दर्जन मासूम बच्चों की मौत, इंदौर और जबलपुर के अस्पतालों में चूहों के हमले, सतना में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को संक्रमित रक्त देने और सागर में आयुर्वेदिक दवाओं में एलोपैथिक इंग्रेडिएंट्स मिलने जैसी घटनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर कमी उजागर की।
प्रदेश में अस्पतालों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, जरूरी मशीनों की अनुपलब्धता और डॉक्टरों का अपने कार्यालय से ही अटेंडेंस अपडेट करना आम खबर बन गई। इन सभी घटनाओं ने प्रदेश को शर्मसार किया और सरकार पर जनता का विरोध बढ़ा।
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अब सरकार द्वारा सुधार की दिशा में कदम उठाए गए हैं। डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि लापरवाही के मामलों में सख्ती की गई, जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड किया गया और पेस्ट कंट्रोल सहित कई जरूरी काम किए गए।
साथ ही कैबिनेट ने पुराने अस्पतालों के रीडेवलपमेंट की मंजूरी दी है। इसके तहत इंदौर एमवाय अस्पताल (772 करोड़), रीवा मेडिकल कॉलेज (322 करोड़) और जबलपुर, ग्वालियर मेडिकल कॉलेज (800 करोड़) के लिए काम शुरू होगा।
बताया जा रहा है कि नए साल 2026 में सरकार के सामने ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना बड़ी चुनौती होगी। जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर बनाना, गांवों तक डॉक्टर और विशेषज्ञ पहुंचाना और अमानक दवाओं पर नियंत्रण करना प्राथमिकता होगी।
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