Bhopal Metro: करीब 7 साल के इंतजार के बाद आज भोपाल मेट्रो का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हरी झंडी दिखाकर मेट्रो को रवाना किया। इसके साथ ही भोपाल ने मेट्रो सिटी के रूप में अपनी पहचान बना ली है। लेकिन भोपाल मेट्रो के हालात शुरूआती दौर से ही ठीक नहीं है। यात्रियों को अभी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एम्स से सुभाष नगर तक मेट्रो का सफर करने वाले यात्रीयों ने पाया कि 7 साल बाद भी सुविधाओं का इंतजार जारी है।
लंबा इंतजार और कम ट्रेनें
फिलहाल भोपाल मेट्रो में केवल एक ट्रेन चल रही है। इस कारण यात्रियों को एक से डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। सुभाष नगर से एम्स जाने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि उन्हें इलाज के लिए जल्दी पहुचना था, लेकिन स्टेशन पर 40 मिनट इंतजार करना पड़ा।
मैन्युअल टिकटिंग और कम सुरक्षा
स्टेशनों पर टिकट अभी मैन्युअल रूप से मिल रही हैं। टिकट वापसी और जांच भी सिक्योरिटी गार्ड करते हैं। इसके कारण सफर का अनुभव मेलों जैसा लग रहा है।
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महंगे किराए और छात्र असंतोष
एम्स से बोर्ड ऑफिस चौराहे तक किराया ₹30 है, जबकि पब्लिक ऑटो में ₹15। स्टूडेंट्स ने मंथली पास जैसी सुविधा की मांग की है।
अधूरे स्टेशन और सुविधाएं
8 में से 7 स्टेशनों पर काम अधूरा है। रानी कमलापति स्टेशन पर केवल सिंगल रेलिंग है, लिफ्ट और पार्किग अधूरी हैं। एमपी नगर में एस्केलेटर हैं, लेकिन पार्किग और महिला टिकट विंडो नहीं है। सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह काम नहीं कर रहा, पीने का पानी और बैठने की बेंचें भी कम हैं।
दिल्ली मेट्रो से तुलना
दिल्ली मेट्रो की तुलना में भोपाल मेट्रो अभी बहुत पीछे है। दिल्ली में हर 5 मिनट में ट्रेन मिलती है, जबकि भोपाल में डेढ़ घंटे का इंतजार करना पड़ता है। लोग चाहते हैं कि मेट्रो सुभाष नगर से एम्स तक ही नहीं, बल्कि कोलार, न्यू मार्केट, मंडीदीप और सीहोर तक पहुंचे।
भोपाल मेट्रो का उद्देश्य शहर की रफ्तार बढ़ाना था, लेकिन फिलहाल यह यात्रियों की सुविधा के मामले में अधूरी साबित हो रही है।
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