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वंदे मातरम् पर संसद में तकरार; मोदी के नेहरू वाले आरोप पर कांग्रेस का पलटवार; कहा – नेहरू पर दाग नहीं…

वंदे मातरम्

लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर सोमवार को हुई चर्चा जमकर राजनीतिक रंग में रंग गई। पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् को दो हिस्सों में बांटकर इसके साथ अन्याय किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जवाहरलाल नेहरू जिन्ना के सामने झुक गए थे और वंदे मातरम् के इस्तेमाल की जांच करवाई थी।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इसका जोरदार जवाब दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बार-बार नेहरू का नाम लेकर इतिहास को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। गोगोई ने सवाल उठाया कि जब ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ हो रहा था, तब बीजेपी और RSS के राजनीतिक पूर्वज कहां थे? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् को आज़ादी की लड़ाई में अंग्रेजों के खिलाफ नारा बनाकर इस्तेमाल किया, जबकि मुस्लिम लीग और हिंदू महासभा दोनों ने इस फैसले की आलोचना की थी।

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बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि वंदे मातरम् राष्ट्रभक्तों की ऊर्जा है, लेकिन कुछ लोग इससे एलर्जी रखते हैं। उन्होंने जिन्ना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब “जिन्ना के मुन्ना” को भी वंदे मातरम् से दिक्कत है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि वंदे मातरम् देश को जोड़ने का गीत है, लेकिन आज कुछ लोग इसे समाज में दरार पैदा करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

इतिहास के अनुसार बंकिम चंद्र चटर्जी ने वंदे मातरम् 1875 में लिखा था और 1896 में पहली बार कांग्रेस अधिवेशन में गाया गया था। सदन की चर्चा में इस गीत के इतिहास, महत्व और राजनीति में इसके इस्तेमाल को लेकर तीखी बहस होती रही।

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