Aayudh

कब है बसंत पंचमी, क्यों पहने जाते हैं पीले रंग के वस्त्र

बसंत पंचमी का महत्व

सनातन धर्म में माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन ही ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है और लोग बसंती रंग के वस्त्र धारण करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन क्यों मां सरस्वती की पूजा होती है और क्यों लोग इस दिन पीले या वसंती वस्त्र पहनते हैं अगर नहीं तो इस लेख में हम आपको बताएंगे। बसंत पंचमी का महत्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथी को बसंत पंचमी कह जाता है। इस दिन का सनातान धर्म में विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन प्रकृति अपने नए रूप को धारण करती है। इस समय मौसम सबसे सुहाना होता है। खेतों में सरसों के पीले फूल लहराते हैं और सभी भक्त वसंती वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की पूजा करते हैं। इस दिन पीला रंग इसलिए पहना जाता है क्योंकि यह प्रकृति को दर्शाता है साथ ही धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भी यह रंग काफी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती का जन्म हुआ था। बताया जाता है कि जब ब्रम्हा जी ने श्रृष्टी की रचना की उस दौरान उन्होंने अपने कमंडल से जल निकाला। उससे ही छः भुजाओं वोली श्वेत वस्त्र धारण किए मां सरस्वती का जन्म हुआ। यह भी पढ़ें- Uttarakhand: उत्तराखंड में एक हस्ताक्षर के बाद लागू होगा UCC कानून

Uttarakhand: उत्तराखंड में एक हस्ताक्षर के बाद लागू होगा UCC कानून

UCC कानून

इस समय की सबके बड़े खबर सामने आ रही है कि उत्तराखंड में ucc बिल को मंजूरी मिल गई है। जी हां लाख विरोध होने के बाद ही प्रदेश में ucc कानून लागू होने वाला है। अब केवल राज्यपाल के एक हस्ताक्षर की देरी है और प्रदेश में कानून लागू हो जायेगा। साल 2022 में कर दिया था ऐलान बतादें कि यह कानून  प्रदेश की जनता पर समानता से लागू किया जाएगा। हालांकि इसमें प्रदेश की अनुसूचित जातियों को नहीं गिना जाएगा।  साल 2022 में सरकार बनाते समय ही बीजेपी द्वारा ucc को लागू करने की बात कह दी गई थी । जिसके बाद उत्तराखंड इसे लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है। इस कानून को उत्तराखंड में पहली बार लागू किया जाना एक तरह से ucc कानून का ट्रायल भी कहा जा सकता है। क्या है UCC बिल की खास बातें यूनीफर्म सिविल कोड कानून में मुख्य तौर पर विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, उत्ताधिकारी और दस्तकग्रहण यानी गोदलेना से जुड़ी बातें है। साथ ही हम आपको बताते चलते हैं कि इस कानून का किसी भी प्रकार से हिंदू- मुस्लिम से ताल्लुक़ नहीं हैं, ये मोजोरिटी या माइनरिटी का बातें भी नहीं करता है। ये एक प्रोग्रेसिव कानून है क्योंकि इसका सीधा उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को अधिकारों को दिलाना है ना कि किसी भी प्रकार से अधिकारों को छीनना। हम आपको ये भी स्पष्ट कर देते हैं कि इस कानून के लागू होने पर किसी भी धर्म के शादी व्याह के रीति रिवाजों पर कोई असर नहीं होगा और ना ही किसी भी जन जाती की रीति रिवोजों और मान्यताओं पर प्रभाव पड़ेगा। यह भी पढ़ें- मध्य प्रदेश के जबलपुर में कांग्रेस को लगा बड़ा झटका

पीएम मोदी ने राज्यसभा के भाषण में मचा दी धूम, पढ़ी नेहरू की चिट्ठी

पीएम मोदी

आज प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में भाषण देते वक्त कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने पार्टी के बड़े नेता और सांसद राहुल गांधी को स्टार्टअप कह दिया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने भाषण के दौरान पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की एक चिट्ठी पढ़ी जिसने राज्यसभा में हंगामा मचा दिया। इस चिट्ठी में उन्होंने आरक्षण को लेकर बड़ी बात कह दी है। पीएम मोदी ने राज्यसभा में मचा दी धूम बुधवार को पीएम मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बात की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पार्टी के बड़े नेता राहुल गांधी को युवराज कहकर सम्बोधित किया साथ ही उनकी तुलना स्टार्टअप से की। मोदी ने राज्यसभा में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की चिट्ठी भी पढ़कर सुनाई। इतना ही नहीं उन्होंने अपने भाषण में कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष खड़गे को भी तंज कंसा। खड़गे के लम्बे भाषण पर साधा निशाना पीएम मोदी ने राहुल गांधी के लिए कहा कि पार्टी ने युवराज को स्टार्टअप के तौर पर पेश किया था। लेकिन वह तो नॉन स्टार्टर निकला, ना ही वह लिफ्ट हुआ और ना ही लॉन्च। इसके साथ ही उन्होंने खड़गे के लम्बे भाषण पर कहा कि मैं तो ये नहीं समझ पा रहा हूं कि इनको इतना बोलने की इजाजत कौन देता है फिर समझ आया कि आज वो दो कॉमांडर नहीं हैं जो हमेशा साथ रहते हैं। पीएम मोदी ने नेहरू की चिट्ठी पढ़कर सुनाई पीएम मोदी ने राज्यसभा के भाषण के दौरान भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की लिखी एक चिट्ठी पढ़ी। वह बताते हैं कि यह चिट्ठी उस दौर के प्रधानमंत्री को लिखी गई थी। पीएम चिट्ठी पढ़ते हैं कि – मैं किसी भी आरक्षण को पसंद नहीं करता और नौकरी में आरक्षण तो बिल्कुल नहीं। वह कहते हैं कि मैं किसी अकुशलता को बढ़ावा नहीं देता। यह भी पढ़ें- दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बरसे आफतों के बादल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बरसे आफतों के बादल

अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को कोर्ट की तरफ से आदेश जारी किया गया है। अब तक उन्हें ईडी द्वारा 5 समन दिए जा चुके हैं पर नेता ने राजनैतिक साजिश बताते हुए सभी समन खारिज कर दिए। जिसके बाद अब कार्ट द्वारा उन्हें पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। अरविंद केजरीवाल का बैड लक इन दिनों केजरीवाल का बैड लक चल रहा है। नेता के ऊपर चोरों तरफ से आफतों के बादल मंडरा रहे हैं। एक ओर ईडी का खौफ है ,वहीं दूसरी ओर दिल्ली क्राईम ब्रांच का डर। इतना ही नहीं उनपर एक पत्रकार का अपहरण कराने के आरोप भी लग चुके हैं। बतादें कि ईडी नेता को शराब घोटाले के मामले में अब तक 5 समन दे चुकी है। लेकिन केजरीवाल उपस्थित नहीं हुए जिसके कारण जांच एजेंसी को कोर्ट की मदद लेनी पड़ी। कोर्ट ने जारी किया आदेश केजरीवाल के जवाब ना देने पर ईडी ने कार्ट में याचिका दर्ज की थी। जिसकी सुनवाई होने के बाद राऊज एवेन्यू कोर्ट ने नेता को 17 फरवरी को पेश होने के आदेश दे दिए हैं। बतादें कि ईडी, नेता से शराब घोटाले को लेकर सवाल पूछना चाहती है इस केस में केजरीवाल का बयान दर्ज करना चाहती है। लेकिन केजरीवाल को 5 समन जारी करने के बाद भी वह उपस्थित नहीं हुए। अरविंद केजरीवाल को है ईडी का डर आप नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री के मुताबिक ईडी के समन उनके खिलाफ बीजेपी की एक राजनैतिक साजिश हैं। इसलिए वह समन को खारिज कर रहे हैं। वह कहते हैं कि बीजेपी चाहती है कि वह लोकसभा चुनाव का प्रचार ना कर पाएं इसलिए भाजपा ईडी का इस्तमाल कर रही है। उनका कहना है कि ईडी उनसे पूछताछ नहीं करना चाहती बल्कि उन्हें बुलाकर गिरफ्तार करना चाहती है। यह भी पढ़ें- मध्य प्रदेश के जबलपुर में कांग्रेस को लगा बड़ा झटका

propose day पर कैसे कहें अपने मन की बात

propose day

वैलेंटाईन वीक की शरूआत हो चुकी है। इस हफ्ते में हर शख्स अपने साथी को अपना प्यार दर्शाता है। इस लव वीक का दूसरा दिन प्रपोज़ डे (propose day) होता है। इस दिन प्रेमी ,प्रेमिका एक दूसरे से अपने प्यार का इज़हार करते हैं। अगर आप इस प्रपेज़ डे किसी खास को अपने दिल की बात बताना चाहते हैं तो अपनाएं ये शानदार तरीके जिनकी मदद से आप बिना डरे अपने दिल की बात अपने साथी से कह सकेंगे। propose day पर कहें रोमेंटिक शायरी जब भी प्यार की बात आती है तो शेरों शायरी की बातें भी होने लगती हैं। इन शेरों शायरी की मदद से आप अपने मन की बात कह सकते हैं। अगर आप अपने प्रेमी के लिए प्यार भी शायरी पढ़ेंगे तो वह आपकी बात ज़रूर सुनेगा। लेकिन ध्यान रखें कि आपको ऐसी शायरी सुनानी है जो आपके प्रेमी ने कभी ना सुनी हो। फिल्मी डायलोग का करें इस्तमाल प्रपोज़ डे(propose day) पर आप अपने साथी को फिल्मी स्टाईल में भी प्रपोज़ कर सकते हैं। खासकर अगर आप किसी लड़की को अपने मन की बात बताना चाहते हैं तो किसी भी मश्हूर फिल्म का रोमेंटिक सा डायलोग लेकर आप अपने मन की बात उसके सामने रख सकते हैं। क्योंकि ज्यादातर लड़कियों को फिल्मी स्टाइल में प्रपोजल पसंद आ जाते हैं। यह भी पढ़ें- ईशा देओल और भरत तख्तानी के तलाक की खबरों पर लगी मुहर

मध्य प्रदेश के जबलपुर में कांग्रेस को लगा बड़ा झटका

जबलपुर

लोकसभा चुनाव आते आते दल बदली का सिलसिला शुरू होता दिखाई दे रहा है। जिसमें कांग्रेस पिछड़ती नज़र आ रही है। मध्य प्रदेश के जबलपुर में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। जबलपुर मेयर जगत बहादुर सिंह और डिंडोरी जिला पंचायत अध्यक्ष ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया है। जबलपुर मेयर ने थामा बीजेपी का दामन मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ी फेरबदल होती दिखाई दे रही है। प्रदेश में आज जबलपुर मेयर जगत बहादुर सिंह अन्नू, डिंडोरी जिला पंचायत अध्यक्ष समेत कई नेताओंने कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी को अपना लिया है। सभी नेताओं ने प्रदेश सीएम डॉ मेगन यादव , प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, मुकेश सिंह, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा और मंत्रा प्रहलाद सिंह पटेल के समक्ष पार्टी की सदस्यता स्वीकार की। अब शहर में होगी त्रिपल इंजन की सरकार जबलपुर महापौर ने बताया कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने राममंदिर का आमंत्रण ठुकराया तो मेरी भावनाएं आहत हुई। उस वक्त ,सोचा कि बीजेपी में शामिल होना चाहिए। बीजेपी योजना और गारंटी दे रही है जिससे मैं प्रभावित हुआ। वह आगे कहते हैं कि अब जबलपुर में त्रिपल इंजन की सरकार होगी जिसके फलस्वरूप शहर में विकास की गंगा बहेगी। यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में यूसीसी (UCC) के विरेध में मुस्लिम समुदाय उतरा सड़कों पर

ईशा देओल और भरत तख्तानी के तलाक की खबरों पर लगी मुहर

भरत तख्तानी

बॉलिवुड एक्ट्रेस ईशा देओल ने शादी के 11 साल बाद पति भरत तख्तानी ने तलाक ले लिया है। बतादें कि लम्बें समय से दोनों को लेकर खबरें सामने आ रही थी। दोनों का रिश्ता मुश्किल हालातों से गुज़र रहा था जिसके बाद अब कपल ने सोशल मीडिया पर ऐलान कर दिया है कि वह अलग हो गए हैं। कपल ने किया तलाक का ऐलान हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की बेटी ईसा देओल और भरत तख्तानी के तलाक की खबरों पर अब मुहर लग गई है। कपल ने खुद ज्वाइंट स्टेटमेंट में इसकी जानकारी दी है। वह बताते हैं कि दोनों ने शादी के 11 साल बाद आपसी सहमति से तलाक लिया है। दोनों ने अपने बच्चों की भलाई के बारे में सोचा है वह कहते हैं कि उनके बच्चे हमेशा उनकी प्राथमिकता रहेंगे। कपल ने सभी से उनकी प्राईवेसी का ध्यान रखने का अनुरोध किया है। भरत तख्तानी के बिना ही स्पॉट हुई ईशा आपको बतादें कि लम्बे समय से ईशा देओल और भरत तख्तानी के रिश्तों को लेकर कई बातें सामने आ रही थी। इसके साथ ही देखा जा रहा है कि ईशा हर इवेंट में या तो अकेली नज़र आती हैं या फिर माँ हेमा मालिनी के साथ स्पॉट हो रही हैं। वहीं पहले ईशा हर ईवेंट में पति के साथ ही आया करती थी। इतना ही नहीं इस दिवाली के ईवेंट में तक वह पति के बिना ही दिखाई दी थी ऐसे में हर कोई उनके रिश्ते को लेकर बात करता दिखाई दे रहा था। जिसके बाद में अब कपल ने खुद अपने तलाक को लेकर ऐलान कर दिया है। यह भी पढ़ें- राहुल गांधी ने कार्यकर्ता को खिलाया कुत्ते का बिस्कुट, वायरल हुआ विडियो

उत्तराखंड में यूसीसी (UCC) के विरेध में मुस्लिम समुदाय उतरा सड़कों पर

यूसीसी (UCC)

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा बीते दिन विधानसभा में यूसीसी (UCC) बिल पेश किया गया था। इस बिल को लेकर कल संसद में विपक्षी दलों ने हंगामा मचा दिया। इस कारण संसद स्थगित करना पढ़ा पर आज दोबारा इसे लेकर सुनवाई की जाएगी। इस बिल के विरोध में अब प्रदेश के मुस्लिम संगठन भी विरोध करते दिखाई दे रहे हैं। आज होगी यूसीसी (UCC) पर सुनवाई यूसीसी बिल पर आज संसद में सुनवाई की जाएगी। बतादें कि इस बिल को लेकर साल 2022 में ही सरकार द्वारा घोषणा कर दी गई थी। इसके बाद उत्तराखंड पहला राज्य बनने वाला है जो यूसीसी को लागू करेगा। इस बिल के कानूनों में राज्य की आदिवासी जनता को छूट दी जाएगी जिसे लेकर मुस्लिम समुदाय में जमकर आक्रोश भरा हुआ है। शरीयत ने नहीं करेंगे समझौता राज्य की जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मुख्य मौलाना ने बयान दिया है। उनका कहना है कि जब राज्य के आदिवासी समूदाय को कानून में छूट मिल सकती है तो धार्मिक स्वतंत्रता के आधार पर अल्पसंख्यकों को भी इस कानून से अलग रखना चाहिए। वह आगे कहते हैं कि एक मुसलमान हर चीज से समझौता कर सकता है पर अपने शरीयत और मज़हब से नहीं। मौलाना का कहना है कि इस कानून के सभी पहलुओं की जांच उनकी कानून टीम करेगी जिसके बाद इसे लेकर निर्णय लिया जाएगा। यूसीसी (UCC) का किसी धर्म से नहीं है ताल्लुक आपको बतादें कि इस बिल में पहले ही यह स्पष्ट कर दिया गया है कि इसका किसी भी मज़हब या बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक से कोई ताल्लुक नहीं है। साथ ही यह भी बताया गया है कि किसी भी धर्म के रीति रिवाज़ों पर इस बिल का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह बिल केवल और केवल महिलाओं औप बच्चों के अधिकारों को उन तक पहुँचाने का काम करेगा ना कि किसी के अधिकार छीनने का। यह भी पढ़ें- मोदी की ख्वाइश होगी पूरी,जारी होगा UPA शासन का श्र्वेत पत्र (white paper)

कृष्णा नदी की तलहटी में मिली अयोध्या के रामलला जैसी प्रतिमा

रामलला

कर्नाटक की कृष्णा नदी की तलहटी से भगवान विष्णु और शिवलिंग मिली हैं। बतादें कि यह मूर्तियाँ नदी पर पुल बनाने के दौरान मिली हैं। खास बात यह है कि भगवान विष्णु की प्रतिमा बिल्कुल अयोध्या स्थित रामलला की प्रतिमा से मिलती हैं जिनको शायद मुस्लिम शासकों से बचाने के लिए नदी की तलहटी में डाला गया होगा। रामलला जैसी है भगवान विष्णु की प्रतिमा कर्नाटक के रायचुर जिले में कृष्णा नदी पर पुल बनाने की प्रक्रिया चल रही है इस दौरान नदी से हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियाँ मिली हैं। बतादें कि नदी की तलहटी से भगवान विष्णु की चतुर्भुज प्रतिमा और शिवलिंग मिली हैं। भगवान विष्णु की प्रतिमा की आभा अयोध्या स्थित श्रीरामलला की बाल स्वरूप प्रतिमा से मिलती जुलती है। इस प्रतिमा में भी रामलला की प्रतिमा जैसे ही आस पास भगवान के दशावतार की कृतियाँ उकरी हुई हैं। मूर्ति को वेंकटेश्वर प्रतिमा जैसा भी माना जा रहा है। चालुक्य राजवंश की है ये प्रतिमा इस प्रतिमा को लेकर इतिहासकार पद्मजा देसाई का कहना है कि ये 11वी शताब्दी की प्रतिमा है।इस प्रतिमा में भगवान के दशावतार उकरे हुए हैं। साथ ही उनका चतुर्भुज रूप है। जिसमें ऊपर के दो हाथों में शंख और चक्र और नीचे के हाथ आशीर्वाद देते हुए मुद्रा में हैं। वह बताते हैं कि यह चालुक्य राजवंश की है उस समय प्रिमा को आक्रांतियों से बचाने के लिए उन्हें नदी की तलहटी में डाल दिया गया होगा। इन प्रतिमाओं को एएसआई को सौंप दिया गया है। यह भी पढ़ें- पीएम मोदी ने दी हरदा (harda) ब्लास्ट (blast) पर ये प्रतिक्रिया