Aayudh

मध्यप्रदेश के मंदिर में छोटे कपड़े पहनकर नहीं जा सकेंगी लडकियाँ…

जहाँ एक ओर बिहार ,उत्तरप्रदेश ,उत्तराखंड और झारखंड के कुछ मंदिरों में मर्यादित कपडे ना पहनने पर मंदिर में एंट्री बंद है तो वहीं अब ये कानून मध्यप्रदेश के मंदिरों में भी लागू होने लगा है .दरह्सल मध्यप्रदेश की राजधानी से कुछ तस्वीरें सामने आरही है जिनमे बोर्ड पर मंदिर का ड्रेस कोड दिया हुआ है .ये पोस्टर मंदिरों के मुख्य द्वार पर लगाये गए है जिनपर लिखा है कि “यह धर्मस्थल है पर्यटन स्थल नहीं कृपया मंदिर परिसर में मर्यादित वस्त्र पहनकर ही आये”. साथ ही कुछ वस्त्र जैसे छोटे कपडे ,हाफ पेंट ,मिनी स्कर्ट ,नाईट सूट,पहनने पर मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जायेगा . यह पोस्टर संकृति बचाओ मंच द्वारा लगाये गए हैं .खेडापति हनुमान मंदिर ,प्राचीन माता मंदिर ,वैष्णो धाम आदर्श नवदुर्गा मंदिर ,जैन मंदिर आदि स्थान पर ये लागू कर दिया है. आयुध मीडिया की टीम ने वैष्णो धाम आदर्श नवदुर्गा मंदिर में जाकर, मंदिर के व्यवस्थापक चन्द्र शेखर तिवारी से बात की प्रश्न क्र.1 आपको ऐसे बोर्ड लगाने की ज़रूरत क्यों पड़ी ,आपने ये निर्णय क्यों लिया ? उत्तर –धर्मस्थल से संस्कार ,संस्कृति और सभ्यता उत्पन्न होते है ,जिस मंदिर में आकर मन पवित्र होता है .ये कोई पर्यटन स्थल नहीं है जहाँ शॉर्ट्स पहनकर आजायेंगे ,अन्तरंग वस्त्र पहनकर आजायेंगे, या अर्धनग्न आजायेंगे. मंदिर में लोग अनुष्ठान करते है और अगर कोई महिला या पुरुष अर्धनग्न होकर आता है तो पूजा करने वाले 500 लोग उस एक तो देखने लगते है और उनकी पूजा से मन भटक जाता है.कभी आपने किसी महिला को पब या डिस्को में सदी पहनकर जाते देखा है नहीं ना, क्योकि उस जगह का ड्रेस अलग है .लेकिन मंदिर एक आस्था का केंद्र है यहाँ से हमे पोसिटीवीटी मिलती है . जब हम ऑफिस जाते है उसका अलग ड्रेस है ,जब हम डॉक्टर के बारे में सोचते है तो अलग छवि याद आती है ,वकील की अलग ,देवी माँ की अलग और शिवजी की अलग, वैसे ही ये भारतीय सभ्यता की पारंपरिक वेश भूषा है नाकि ड्रेस कोड.जिस तरह अब गुरुद्वारा में बिना सर ढके नहीं जा सकते वैसे ही हर जगह के नियमका आपको पालन करना होगा .अगर कोई भक्त इन नियमों का पालन नहीं करता है तो हमे ऐसे भक्तो की आवश्यकता नहीं है . प्रश्न क्र.2 सबकी आस्था अलग होती है ऐसे में आपको नही लगता की कुछ लोगों को ये फैसला खटकेगा ? उत्तर – जब संस्कृति बचाओ मंच ने ये मुहीम प्रदेश में प्रारंभ की ऐसे में देश के सभी तीर्थ स्थल ,उनके संस्थापक ,व्यवस्थापक ,यहाँ तक की जहाँ सरकार का हस्तक्षेप है वहां भी हमे समर्थन मिल रहा है .हमारा कार्य है की हम मंदिर के हित में नियम बनाये कोण क्या सोच रहा है इससे हमे फर्क नहीं पड़ता ,जिसको परेशानी हो वो ना आये लेकिन प्रवेश के लिए मर्यादित वस्त्र पहनना आवश्यक है. प्रश्न क्र.3 ड्रेस कॉड लागू करने पर लोगों का क्या नजरिया रहा ? उत्तर – हमारे इस फैसले को सोशल मीडिया पर जैसे वाट्सेप, ट्विटर , यूट्यूब द्वारा हमे सभी का समर्थन मिल रहा है . किसी भी प्रकार का कोई विरोध देखने को नहीं मिला है . सभी स्थानों के धर्माचार्य भी हमारे फैसले से खुश है .हम चाहते है की पूरे भारत में यह नियम लागू होना चाहिए . पूरा वीडियो यहाँ देखें

जल्द लागू हो सकती है समान नागरिक संहिता.. क्या होंगे बदलाव …

समान नागरिक संहिता को लेकर देश में तैयारी तेज हो गई है . भारत की 21वी विधि आयोग ने नोटिस जारी किया है जिसमे UCC को लेकर टिप्पणियां और सुझाव मांगे है.इसके पहले साल 2018 में भी कुछ सवाल किए गए थे .पूर्व कानून मंत्री बोल चुके है कि ये मुद्दा 1998 और 2019 के भाजपा के  घोषणा पत्र में शामिल रहा .साल 2019 में जब इसे संसद में पेश किया तो विपक्ष के विरोध के कारण इसे वापस लेना पड़ा था .UCC में विवाह, तलाक, गोद लेना, और संपत्ति के समान अधिकार शामिल है. कब होगा लागू विधि आयोग जब अपनी रिपोर्ट जमा करेगा तब ही केंद्र में UCC की ओर कदम बढ़ेंगे . रिपोर्ट सौंपने के लिए विधि आयोग को अगले महीने के दूसरे हफ्ते तक का समय दिया है .समय के अन्दर ही विधि आयोग द्वारा लोगों के सुझाव एकत्रित करके उसकी समीक्षा की जाएगी . रिपोर्ट तैयार होने के बाद कानून मंत्री को रिपोर्ट सौंपी जाएगी साथ ही सार्वजनिक करके उसे आगे बढ़ाया जायेगा. समान नागरिक संहिता लागू होने पर बदलाव – * विवाह के लिए सभी धर्मो की समान व्यवस्था होगी. * विवाह की संख्या 1 होगी. * दंपत्तियों को वैवाहिक पंजीयन ज़रूरी रहेगा . * पर्सनल लॉ पर रोक लगेगी * तलाक के लिए सभी धर्मों की एक प्रक्रिया होगी. *पर्सनल लॉ के तलाक जैसे तीन तलाक बंद हुए. * तलाक के लिए दोनों ही पक्ष के लिए समान होगा फैसला. * विवाहित महिलाओं के भरण पोषण और अधिकार पर समान व्यवस्था * सभी धर्मों की लड़कियों के लिए विवाह की समान न्यूनतम उम्र 18 होगी .इस्लाम में लड़कियों की पुबर्टी प्रकट होने पर ही उनकी शादी हो जाती है . * सभी धर्मों में विरासत और संपत्ति पर लड़के और लड़कियों का समान अधिकार होगा . इस्लाम में लड़कियों को संपत्ति का हिस्सा नहीं दिया जाता है .पति की मृत्यु के बाद संपत्ति विधवा पत्नी के नाम होगी. * वसीयत की मौजूदगी में उत्तराधिकारी कानून नहीं लागू होगा . * सभी धर्मों के लिए बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया