दिग्विजय सिंह के लिए बजरंग दल है चुनावी मुद्दा या पुरानी दुश्मनी…

मध्यप्रदेश चुनाव के नज़दीक आते ही कांग्रेस पार्टी के नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बजरंग दल के नाम का इस्तेमाल कर एक नहीं बल्कि कई बड़े बयान दिए . दिग्विजय सिंह ने बजरंग दल को भ्रष्ट ,बेईमान ,और राष्ट्रीय संगठन बताया ,और हाल ही में हुए बुरहानपुर दौरे के दौरान वो कहते हैं कि मोदीजी ने बजरंगबली की तुलना गुंडों की जमात बजरंग दल से की है साथ ही बताया कि वो एक हनुमान भक्त है और कमलनाथ तो उनसे भी बड़े भक्त है ,कमलनाथ ने तो छिंदवाड़ा में देश की सबसे बड़ी हनुमान जी की मूर्ति बनवाई . मोदीजी ने हमारी आस्था को ठेस पहुचाया ,जिसकी उन्हें माफी मांगनी चाहिए. क्या है बजरंग दल संगठन बजरंग दल की स्थापना 1984 में अयोध्या में हुई थी . जब अयोध्या से श्री राम जानकी रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ तो तत्कालीन सरकार ने उन्हें सुरक्षा देने से इंकार कर दिया ,तब सभी संत समाज की ओर से आवेदन करने के बाद विश्व हिन्दू परिषद ने वहां मौजूद सभी युवाओं को यात्रा की सुरक्षा का कार्य सौंपा. रामकाज में आने वाली परेशानियों का जैसे बजरंगबली सामना करते थे वैसे ही इस रामराज की रक्षा करने की वजह से उन्हें बजरंग दल का नाम दिया गया . धीरे धीरे देश भर से युवा धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए बजरंग दल से जुड़ते गए . बजरंग दल का उद्देश्य किसी का विरोध करना नहीं है बल्कि असामाजिक तत्वों से देश और धर्म की रक्षा करना है. बजरंग दल से है दिग्विजय की पुरानी दुश्मनी सन 2000 में बजरंगदल ने 18-20 फरवरी को एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का फैसला लिया . इस सम्मेलन का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जागरूक करना और आंतरिक सुरक्षा के लिए तैयार करना था . देशभर से इस सम्मेलन का हिस्सा बनने 20000 बजरंगी आने वाले थे ,जिसके लिए पहले भोपाल के दशहरा मैदान को चुना गया पर जिसे बाद में बदलकर छोला ग्राउंड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया . सम्मेलन के आयोजित होने के कुछ ही दिन पहले यानी 28 जनवरी को मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस कार्यक्रम को रद्द करने का ऐलान कर दिया . बजरंगदल के कार्यकर्ताओं ने जैसे दिग्विजय सिंह को पाठ पढ़ाने का निर्णय लेते हुए ये ऐलान कर दिया कि सम्मेलन तो होगा और अपने निर्धारित दिन पर होगा . एक ओर देश भर से धीरे धीरे बजरंगियों का आना शुरू हो गया वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री ने उन्हें रोकने और गिरफ्तार करने के निर्देश दे दिए . पुलिस ने हज़ारों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया ,पर फिर भी बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को रोकना मुश्किल रहा , कार्यकर्ताओं ने पुलिस की सारी सुरक्षाओं को लांघते हुए ,आखिर कार अपने निर्धारित लक्ष्य पर भगवा फहराया . कार्यकर्ताओं को रोकते हुए पुलिस ने लाठी ,आंसू बम , और हवाई फायरिंग की और देखते ही देखते इंसानियत की सारी हदें पार करते हुए गोलियां चला दी जिसमें 50 से ज़्यादा कार्यकर्ता घायल हुए . बाद में सभी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया ,तब जेल में भी जगह की कमी हो गयी थी . सभी बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अपने सम्मेलन को जेल में ही शुरू कर दिया . इस घटना को कई लोगों ने बजरंगदल की जीत और दिग्विजय सिंह की हार के रूप में देखा . इस घटना से बजरंगदल ने दोबारा यह साबित कर दिया कि बजरंगदल को रामराज्य और राष्ट्र कार्य के लिए कोई नहीं रोक सका .